समाजों की अनदेखी प्रभावित कर सकती है चुनाव परिणाम


- विभिन्न समाजों बैठकों में लेंगे निर्णय, कई ऐसे समाज जिनको नहीं दिया प्रदेश में एक भी टिकट


इंदौर। मतदान का टिकट निकट जैसे-जैसे करीब आता जा रहा है वैसे-वैसे माहौल भी गर्म होता जा रहा है। चुनाव प्रत्याशी समाजों और संगठनों से संपर्क कर उन्हें मनाने में जुट गए है। लेकिन टिकट वितरण में समाजों की अनदेखी राजनीतिक पार्टियों के लिए महंगी साबित हो सकती है। ऐसी कई विधानसभा है जिसमें कई समाजों के निर्णायक वोट है और वे परिणाम बदल सकते है इसके बावजूद प्रत्याशी के चयन में कोताही बरती गई है। समाज के वरिष्ठों और पदाधिकारियों ने फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है कि किस पार्टी के साथ जाएंगे। चुनाव के कुछ दिनों पहले ही समाज तय करने की स्थिति में होगा। फिलहाल पार्टी और प्रत्याशियों पर पैनी निगाह जमाए हुए है। पत्रिका ने समाज के पदाधिकारियों का रूख टटोलने का प्रयास किया तो उन्होंने खुलकर तो कुछ नहीं बोला पर इशारे में कई बातें कहीं।

अग्रवाल समाज

जिले में जनसंख्या - १७५०००
जिले में मतदाता - १२५०००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा - विधानसभा ३ में ३५ हजार मतदाता , दो में २५ हजार मतदाता
प्रदेश में प्रत्याशी - प्रदेश में पार्टियों ने सिर्फ २ टिकट ही दिए है।

माहेश्वरी समाज

जिले में जनसंख्या - ६००००
जिले में मतदाता - ३५०००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा - विधानसभा ४ में १५ हजार और एक नंबर में ७ हजार
प्रदेश में प्रत्याशी - प्रदेश में एक भी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं बनाया।

बोहरा समाज

जिले में जनसंख्या - ३५०००
जिले में मतदाता - २२०००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- विधानसभा ४ में १४ हजार और राऊ में ५ हजार
प्रदेश में प्रत्याशी- प्रदेश में एक भी टिकट नहीं है।

सिख समाज

जिले में जनसंख्या - १०००००
जिले में मतदाता - ६५०००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- विधानसभा ४ में २५ हजार और राऊ में २० हजार
प्रदेश में प्रत्याशी - राजनीतिक पार्टियों ने ६ टिकट दिए है।

जैन समाज

जिले में जनसंख्या - १७००००
जिले में मतदाता - ९००००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- विधानसभा ५ में ३० हजार और ४ में २५ हजार है
प्रदेश में प्रत्याशी - राजनीतिक पार्टियों ने ९ प्रत्याशी बनाए है।

सिंधी समाज

जिले में जनसंख्या - २५००००
जिले में मतदाता - २०००००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- विधानसभा ४ में ६६ हजार और एक में १५ हजार है।
प्रदेश में प्रत्याशी - प्रदेश में एक टिकट दिया है।

खंडेलवाल समाज

जिले में जनसंख्या - १५०००
जिले में मतदाता - ९०००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा - विधानसभा ३ में ५ हजार और एक में ३ हजार है।
प्रदेश में प्रत्याशी - प्रदेश में एक टिकट मिला है।

ब्राह्मण समाज

जिले में जनसंख्या - ३०००००
जिले में मतदाता - २१००००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- विधानसभा २ में २५००० और ४ में १६००० है।
प्रदेश में प्रत्याशी - विभिन्न राजनीतिक पार्टियो ने ४० प्रत्याशी बनाए है।

मुस्लिम समाज

जिले में जनसंख्या - ५०००००
जिले में मतदाता - २८००००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा - विधानसभा ५ में एक लाख २५ हजार और तीन में ४८ हजार है।
प्रदेश में प्रत्याशी - विभिन्न पार्टियों ने २ प्रत्याशी बनाए है।

गुजराती समाज

जिले में जनसंख्या - ४००००
जिले में मतदाता - ३२०००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- विधानसभा ५ में १० हजार और ३ में ८ हजार है।
प्रदेश में प्रत्याशी - एक भी प्रत्याशी नहीं बनाया।

मराठी समाज

जिले में जनसंख्या - ७०००००
जिले में मतदाता - ३५००००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- राऊ विधानसभा में ७० हजार और २ में ४० हजार है।
प्रदेश में प्रत्याशी - एक भी प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया।

राजपूत समाज

जिले में जनसंख्या - १००००००
जिले में मतदाता - ४५००००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा- देपालपुर विधानसभा में ५० हजार से अधिक और सांवेर में ४० हजार है।
प्रदेश में प्रत्याशी - विभिन्न पार्टियों ने ५० से अधिक वोट दिए है।

ईसाई समाज

जिले में जनसंख्या - ३२०००
जिले में मतदाता - २२०००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा - दो नंबर में २ हजार से अधिक और ५ में १५०० से अधिक है।
प्रदेश में प्रत्याशी - एक भी समाज के व्यक्ति को टिकट नहीं दिया।

वाल्मिकी समाज

जिले में जनसंख्या - ९००००
जिले में मतदाता - ७००००

सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा - ४ नंबर में २० हजार और ३ में १५ हजार है।
प्रदेश में प्रत्याशी - पार्टियों ने दो प्रत्याशी बनाए है।

चुनाव को लेकर होगी बैठक उसके बाद ही होगा कोई निर्णय

- आमतौर पर समाज का रूख भाजपा की तरफ ही होता है। व्यक्तिगत निष्ठा का कुछ नहीं कह सकते है। संघ को लेकर कांग्रेस की बयानबाजी से समाज नाराज है। समाज वैसे हमेशा से राष्ट्रवादी रहा है। फिलहाल समाज ने कुछ निर्णय नहीं लिया है।
जयंत भिसे, मराठी समाज

- भाजपा ठाकुरों को हमेशा अधिक टिकट देती है इसके चलते उस तरफ हमेशा झुकाव रहता है। इस बार भाजपा के कुछ गलत निर्णय के चलते कुछ आक्रोश है। जहां पर समाज के प्रत्याशी है वहां पर पार्टी नहीं देखेंगे। उसके बाद सपाक्स को मदद कर सकते है।

विजय सिंह परिहार , अभा क्षत्रिय महासभा
- गुजराती समाज हमेशा से प्रत्याशी को देखकर मतदान करता रहा है। टिकट नहीं देने से कुछ नाराजगी है। समाज हमेशा से विकास के साथ रहा है। भाजपा को लेकर आक्रोश तो दिख रहा है। वैसे बैठक होने के बाद ही कुछ निर्णय लेंगे।

मुकेश पटेल, गुजराती समाज

- समाज अच्छे आदमी को देखकर ही मतदान करेंगा। पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है। समाज का किसी भी पार्टी को कोई समर्थन नहीं है। लोकतंत्र में सभी को अपने मत के उपयोग का अधिकार है और सभी इसके लिए स्वतंत्र है। इस संबंध में समाज को निर्णय नहीं लेता है।
बिशप चाको, ईसाई समाज

- समाज हमेशा से कांग्रेस के साथ ही रहा है। कांग्रेस ने समाज की हमेशा मदद करती आई है। फिलहाल समाज ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है कि किसे वोट देंगे। सभी पंचायतों को बैठाकर बात की जाएगी।
लेखराज नरवले, वाल्मिकी समाज

- हमारा समाज कोई फतवा जारी नहीं करता है। पूरा शिक्षित समाज है और सभी अपने मतदान का अधिकार जानते है। ऐसी स्थिति में किसी को कुछ कहने की जरूरत नहीं है। वैसे तो कोई बैठक नहीं हुई है पर मतदान को लेकर बैठक भी नहीं बुलाई गई है।
मजहर सेठजीवाला, बोहरा समाज

- मतदाता का निजी अधिकार है। सिख समाज तो हमेशा से विकास के साथ रहा है। फिलहाल तो कुछ भी तय नहीं है। हम तो हमेशा से देश हित को लेकर ही काम करते रहे है। समाज ऐसा सामूहिक निर्णय कभी नहीं लेता है।
मंजीत सिंह भाटिया, सिख समाज

- दोनों पार्टियां सम्पर्क में है। वैेसे कांग्रेस का शहर अध्यक्ष हमारे समाज से है। समाज ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। आगामी दिनों में समाजजनों के साथ बैठकर विचार करेंगे।
राजकुमार पाटोदी, जैन समाज

- सिंधी समाज को हमेशा से दूर रखा जाता है। टिकट मांगना हमारा अधिकार है। वैसे प्रत्याशी को देखकर ही हम वोटिंग करेंगे। हमेशा से भाजपा की तरफ रूख रहा है। टिकट नहीं देने से राजनीतिक पार्टियों से नाराजगी तो है। समाज की बैठक बुलाएंगे। वैसे एक निर्दलीय प्रत्याशी भी खड़ा हुआ है।
दयाल ठाकुर, सिंधी समाज

- खंडेलवाल समाज प्रत्याशी को देखकर ही वोट करेंगा। वैसे हमेशा से भाजपा के साथ रहा है। फिलहाल बैठक में निर्णय होगा। इंदौर में जहां पर वैश्य समाज का प्रत्याशी होगा वहां पूरा समर्थन देंगे।
धीरज खंडेलवाल, खंडेलवाल समाज

- ब्राह्मण समाज का रूक दोनों पार्टियों की तरफ रहेगा। सरकार से जरूर कुछ लोग खिन्न है। एक तरफा वोटिंग की स्थिति इस बार नहीं है। बैठक के बाद ही कुछ कह सकेंगे कि समाज किस तरफ जाएगा। वैसे समाज के प्रत्याशी को देखकर वोटिंग करने का रूख दिख रहा है।
प्रहलाद मिश्रा , ब्राह्मण समाज

- मुस्लिम समाज को विरोधी की कोशिश रहती है कि वोट नहीं डालने दिया जाए। पहले की अपेक्षा समाज का वोट प्रतिशत गिर रहा है। लोकतंत्र में हर समाज की हिस्सेदारी होना चाहिए। प्रदेश में ७८ लाख जनसंख्या है और कम से कम १५ टिकट देना चाहिए। समाजजन को हर हालत में अपने मताधिकार का उपयोग जरूर करना चाहिए।
शहरकाजी डॉ इशरत अली, मुस्लिम समाज

- टिकट नहीं मिलने से दोनों पार्टियों से समाज नाराज जरूर है। इसके बावजूद मतदाताओं पर ही मतदान का निर्णय लेने पर छोड़ा है। समाज की बैठक बुलाएंगे उसके बाद ही कुछ निर्णय लिया जाएगा। हमारा समाज व्यापारी वर्ग से है। देश हित के लिए हमेशा से काम करता रहा है।
किशोर गोयल, अग्रवाल समाज

- माहेश्वरी समाज हमेशा से अधिकतर रूप से भाजपा के साथ रहा है लेकिन अभी तक किसी प्रकार का कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसको लेकर बैठक करेंगे। इस बार नोटा पर भी विचार किया जा सकता है। व्यापार वर्ग से अधिक जुड़ा हुआ है। टिकट की मांग भी की थी लेकिन एक भी नहीं हुआ।
अशोक ईनानी , माहेश्वरी समाज

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पारंपरिक वोट पर नहीं देती राजनीतिक पार्टी ध्यान
कांग्रेस हो या भाजपा हमेशा से वह अपने पारंपरिक वोट की तरफ ध्यान ही कम देती है। कांग्रेस को मालूम है कि मुस्लिम वोट हमेशा से उनके है और भाजपा को मराठी वोट को हमेशा से अपनी जेब में मानती है। ऐसे में दोनों ही पार्टी अपने पारंपरिक वोट की तरफ कम ही ध्यान देती है। वे मानकर चलती है कि ये वोट तो उनकी झोली में है ही। लेकिन अब इन समाजों में युवा वर्ग अनदेखी से नाराज होकर अब अपनी परंपरा को तोड़ रही है। युवा प्रत्याशी को देखकर वोट देने लगी है या फिर नोटा का उपयोग कर रही है। ऐसे में पार्टी को भी नुकसान होने लगा है। यहां तक की मतदान करने भी नहीं जाते है जिससे पार्टी को कई सीटों पर नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

 

सुधीर पंडित
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