आउटसोर्स कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने में आनाकानी

मामला पीएफ राशि के घोटाले का : प्रधानमंत्री स्व-रोजगार प्रोत्साहन योजना के साथ बिजली कंपनी से भी लिया 10.59 करोड़ का लाभ

By: रमेश वैद्य

Published: 14 Jan 2021, 06:18 PM IST

इंदौर. बिजली कंपनी की 4 आउटसोर्स कंपनियों द्वारा पीएफ का 10.59 करोड़ रुपए का घोटाले में सामने आया है। गड़बड़ी करने वाली तीनों कंपनियों ने प्रधानमंत्री स्व-रोजगार प्रोत्साहन योजना के साथ ही बिजली कंपनी से भी करोड़ों का लाभ ले लिया। मामले में बिजली कंपनी के अफसरों की भी भूमिका भी संदेह के घेरे में है। गड़बड़ी करने वाली कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करने में अफसर आनाकानी कर रहे हैं।
पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने पश्चिम क्षेत्र की चारों कंपनियों को करीब ३०० करोड़ का टेंडर निकाल कर निविदाएं आमंत्रित की थीं। चारों कंपनियों ने करीब ८ हजार कर्मचारियों को काम पर लगाया हुआ है। आउटसोर्स कंपनियों द्वारा सेवाएं देने के साथ ही प्रधानमंत्री स्व-रोजगार प्रोत्साहन योजना का दुरुपयोग किया। कंपनियों ने राशि की छूट लेकर बिजली कंपनी से भी राशि का भुगतान ले लिया। मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने ईओडब्ल्यू को जांच कर मार्च तक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
दस्तावेज में की हेरफेर
भार्गव के अनुसार ईपीएफ भुगतान के टीआरआरएन नंबर को ईपीएफ पोर्टल पर जांचने पर पाया गया कि चारों कपंनियों ने पीएमपीआरवाय योजना का लाभ लिया, लेकिन उसी टीआरआरएन नंबर का दस्तावेज जो बिल के साथ संलग्न है। उसमें छेड़छाड़ कर योजना की राशि को डिलीट कर दिया, ताकि यह दर्शाया जा सके कि योजना का लाभ कंपनियों को नहीं मिला। बिजली कंपनी ने योजना की राशि को नहीं काटते हुए पूरा भुगतान कंपनियों को कर दिया।
बढ़ सकती है घोटाले की राशि
शिकायतकर्ता अवधेश भार्गव ने इस संबंध में प्रतिवाद कोर्ट के समक्ष पेश किया था। जिस पर सुनवाई के बाद जांच के आदेश किया गया। भार्गव ने बताया, इस घोटाले में बिजली कंपनी के अधिकारियों की अहम् भूमिका है। सिक्युरिटी सर्विसेस से जुड़ी कंपनियों ने 12 प्रतिशत राशि की छूट भविष्य निधि से तो ले ली, विद्युत विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर भी राशि प्राप्त कर ली। इसमें कई तरह की गड़बडि़यां की गई हंै। यह तो एक ही डिविजन का मामला है। मध्य और पूर्व डिविजन में भी गड़बड़ी हो सकती हैं।
बिजली कंपनी भी संदेह के घेरे में!
जब चारों आउटसोर्स कंपनियों ने बिल के साथ पीएफ चालान लगाया तो नियमानुसार विभाग को जांच करने के बाद ही पीएफ की राशि जारी करनी चाहिए थी, लेकिन एेसा नहीं किया गया। इससे साफ जाहिर है कि विभाग के अफसरों ने भी लापरवाही की है। इसके अलावा पीएफ विभाग द्वारा जानकारी देने के बाद भी कंपनियों पर कार्रवाई नहीं की गई। अफसरों के मुताबिक चारों कंपनियों से पीएफ राशि वसूल ली गई, लेकिन कंपनियों को ब्लैक लिस्टेड नहीं किया जा रहा है। कंपनी के सभी कर्मचारी पूरे प्रदेश में काम कर रहे हैंं।
पीएफ विभाग ने खोली पोल
कर्मचारी भविष्य निधि विभाग ने गड़बड़ी की जांच की थी इसमें सामने आया कि कंपनियों ने पीएफ राशि की हेराफेरी की है। इस मामले में जांच रिपोर्ट की जानकारी विभाग ने विद्युत विभाग को दी थी। सालभर होने के बाद भी विद्युत विभाग ने मामले में कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की।
पीएफ विभाग से भी मामले में जानकारी आई थी
आउटसोर्स कंपनियों के पीएफ मामले में कुछ राशि की वसूली विभाग कर चुका है। टेंडर की शर्तों का अध्ययन किया जा रहा है। पूर्व में पीएफ विभाग से भी मामले में जानकारी आई थी। उसका भी अध्ययन कर रहे हैं। पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अमित तोमर, एमडी, बिजली कंपनी पश्चिम क्षेत्र

रमेश वैद्य Desk
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