कैलिग्राफी से पेंटिंग्स को नया आयाम देकर बना रहे सशक्त

शहर के आर्टिस्ट प्रयोगधर्मी हैं

By: हुसैन अली

Published: 29 Mar 2019, 03:02 PM IST

इंदौर. नए प्रयोगों के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इसी कड़ी में कलाकार कैलिग्राफी में रुचि ले रहे हैं। अपनी पेंटिंग्स को कैलिग्राफी से नया आयाम दे रहे हैं। हालांकि कैलिग्राफी अलग विधा है, लेकिन इसे पेंटिंग्स में इस्तेमाल कर ज्यादा प्रभावशाली बना रहे हैं। ऐसा करने वालों में वरिष्ठ कलाकार भी हैं और युवा भी। कुछ ने तो बाकायदा कैलिग्राफी की टे्रनिंग भी ली है। कुछ खुद ही इसे डेवलप कर रहे हैं।

अक्षर भी है आकृति
कलाकारों का कहना है कि अक्षर अपने आप में एक आकृति होता है इसलिए वह पेंटिंग में सहजता से मर्ज हो जाता है। दो विधाएं साथ आने से कला विस्तारित होती है। सपना शर्मा ने कहा कि मैं भारतीय महिलाओं को पेंट करती हूं। उन्हें धर्म-अध्यात्म के साथ मर्ज करती हूं। मैंने कई पेंटिंग्स में वैदिक मंत्रों, श्लोकों का उपयोग किया है। इस तरह से सबजेक्ट और फिगर कोरिलेट हो जाता है। कई बार एेसा होता है कि पेंटिंग की मुख्य आकृति तो आकर्षक होती है पर बैकग्राउंड कुछ फीका सा लगता है तब पेंटिंग को बैलेंस करने के लिए कैलिग्राफी का इस्तेमाल करती हूं। मैंने कैलिग्राफी का कोर्स भी किया है इसलिए अब मुझे ये आसान भी लगता है।

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फॉर्म बन जाती है कैलिग्राफी
फॉर्म बन जाती है कैलिग्राफी शुभा वैद्य कहती हैं, पेंटिंग में कई बार कैलिग्राफी को एक फॉर्म के रूप में इस्तेमाल होती है। मैं इसे एक डिजाइन के रूप में भी इस्तेमाल करती हूं, कभी कैनवास को डिवाइड करने के लिए। कैलिग्राफी से कंपोजिशन को बेहतर बनाया जा सकता है। सबसे जरूरी है कैनवास के निगेटिव स्पेस का इस्तेमाल। कैलिग्राफी के जरिए निगेटिव स्पेस को पॉजिटिव स्पेस में बदला जाता है। पेंटर कैलिग्राफी को पेंटिंग की मुख्य आकृति में या सहायक आकृतियों में या बैकग्राउंड में अपनी कल्पना के मुताबिक ले सकता है।

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कविताओं को रीक्रिएट करने की कोशिश
पंकज अग्रवाल ने कहा कि जो कविताएं उन्हें अच्छी लगती हैं, उनका उपयोग पेंटिंग में करता हूं। मुझे कुंअर नारायण की कविताएं पंसद हैं इसलिए उन्हें पेंटिंग, ड्राइंग और स्कल्प्चर में यूज करता हूं। कबीर को भी स्कल्प्चर में लिया है। ये एक तरह से दो कलाओं का आपसी संवाद है। कविता से जो ग्रहण करता हूं उसे अभिव्यक्त करने का प्रयास है ये। ये वैसा ही है जैसे मध्यकालीन काव्य को शास्त्रीय संगीत और शास्त्रीय नृत्य में इस्तेमाल किया जाता है। राजेश शर्मा कहते हैं,मैने अपनी ड्राइंग्स में कविताओं का इस्तेमाल किया है। ये एक तरह से कला और भाषा का समायोजन है। इसके जरिए ड्रॅाइंग इन्हांस हो जाती है।

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