10वीं मैथ्स में फेल विद्यार्थियों को भी इंजीनियर बनने की चाह!

10वीं मैथ्स में फेल विद्यार्थियों को भी इंजीनियर बनने की चाह!

अभिषेक वर्मा. इंदौर. 10वीं में बेस्ट ऑफ फाइव योजना से नतीजों में बड़ा सुधार दिखा है, पर 11वीं की पढ़ाई शुरू होने से पहले नई मुसीबत खड़ी हो गई। बड़ी संख्या में ऐसे छात्र भी इंजीनियर व डॉक्टर बनने के लिए मैथ्स और बॉयो विषय लेना चाह रहे हैं, जो इनमें 33 अंक भी नहीं ला सके। स्कूल अपने स्तर पर उन्हें काउंसलिंग कर दूसरे विषय लेने की समझाइश दे रहे हैं।

10वीं बोर्ड में इस साल 66.54 फीसदी बच्चे पास हुए हैं। 2017 में 49.83 फीसदी, 2016 में 53.87 फीसदी बच्चे सफल हुए थे। माशिमं द्वारा हाई स्कूल में लागू बेस्ट ऑफ फाइव स्कीम में 6 में से अधिक अंक वाले 5 विषयों के आधार पर रिजल्ट तैयार किया गया। एक विषय में फेल छात्र को पास की श्रेणी में रखा, जबकि दो में फेल होने पर एक विषय में पूरक दे दी गई। 10वीं में सबसे ज्यादा बच्चे गणित व साइंस में फेल हुए। स्कीम की बदौलत 11वीं में पहुंच गए।

समझा रहे कैसे बनाओगे कॅरियर
अहिल्याश्रम स्कूल की प्राचार्य डॉ. पूजा सक्सेना ने बताया, विषय चयन के लिए काउंसलिंग में १०वीं का स्कोर देखने के साथ उनकी पसंद-नापंसद का ध्यान रख रहे हैं। मैथ्स या बॉयो चुनने की जिद करने वालों को समझाया जा रहा है कि आगे की पढ़ाई मुश्किल है।

अभी कम अंक मिले तो आगे इस विषय में पढ़कर कैसे अच्छा कॅरियर बनाया जा सकता है। माशिमं के अनुसार बेस्ट ऑफ फाइव में पास बच्चे अपनी पसंद के विषय चुन सकते हैं। ऐसा कोई नियम नहीं है, जिससे एक विषय में फेल होने वाले को वह विषय चुनने से रोका जाए।

जिले में 70 % रिजल्ट
इस साल 10वीं बोर्ड में जिले का रिजल्ट 70.36 फीसदी रहा। 36554 परीक्षार्थियों में से 25707 पास हुए। 14014 ने फस्र्ट डिवीजन, 9728 ने सेकंड व 1961 ने थर्ड डिवीजन से परीक्षा पास की। 3353 को पूरक आई, जबकि 7469 परीक्षार्थी फेल हुए।

प्रदर्शन देखकर चुनना चाहिए विषय
ऐसा कोई नियम नहीं है कि बच्चे कम नंबर वाला विषय नहीं चुन सके, लेकिन बच्चों को अपना प्रदर्शन देखकर विषय का चयन करना चाहिए।
- डॉ. भागीरथ कुमरावत, उपाध्यक्ष, माशिमं

अर्जुन रिछारिया Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned