scriptError to get VIP number in Madhya pradesh | कैलाश के खास द्वारा बोली लगाने के साथ ही समय से तीन मिनट पहले बंद कर दी वेबसाइट | Patrika News

कैलाश के खास द्वारा बोली लगाने के साथ ही समय से तीन मिनट पहले बंद कर दी वेबसाइट

- हरीश विजयवर्गीय को मिला वीआईपी नंबर
- 0001 नंबर की बिक्री में गड़बड़ी: ज्यादा में बिक सकता था, लेकिन 3.66 लाख में ही बिका
- विभाग को राजस्व का नुकसान

इंदौर

Updated: April 23, 2022 08:52:10 am

इंदौर। परिवहन विभाग की ओर से लगातार बेहद खास व वीआईपी नंबरों की नीलामी की जाती है। जिससे विभाग को राजस्व में कुछ लाभ हो। ऐसे में जहां कई लोग इन वीआईपी नंबरों की चाहत रखते हैं, तो वहीं इसे पाने के लिए कहीं ज्यादा पैसा देकर भी बोली लगाते हैं।

Vip Number of vehicles
Vip Number of vehicles

लेकिन इस बार मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में भी सेंधमारी होती दिखी है। जिसके चलते खास लोगों को कम दाम में वीआईपी नंबर दिलाने के लिए तीन मिनट पहले ही वेबसाइट बंद कर दी गई। गुरुवार को खत्म हुई नंबरों की नीलामी में वीआईपी नंबर 0001 एचआर ग्रीन्स होटल को 3.66 लाख में ही दे दिया गया और इससे ज्यादा बोली लगाने वाले दावेदार बैठे रह गए। एचआर ग्रीन्स होटल भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के खास कहे जाने वाले हरीश विजयवर्गीय की है।

आरटीओ कार्यालय में रसूखदारों को फायदा पहुंचाने की एक बानगी गुरुवार रात देखने को मिली। पिछले दिनों परिवहन विभाग ने कार की नई सीरीज एमपी 09 डब्ल्यूएम शुरू की थी। गुुरुवार को नीलामी का आखिरी दिन था। इस सीरीज के 0001 नंबर के लिए 7 दावेदार थे। इस नंबर के लिए रात तक 3.31 लाख रुपए की बोली लग चुकी थी। 11 बजकर 57 मिनट पर लगी आखिरी बोली 3.66 लाख रुपए को मान्य कर लिया और इसके बाद सभी नंबर वेबसाइट से गायब हो गए। जो दावेदार 3.66 लाख से ज्यादा बोली लगाने के लिए बैठे थे, वे राशि नहीं बढ़ा पाए।

हर बोली पर मिलता है 15 मिनट का समय
बोली में शामिल होने वाले एजेंटों ने बताया कि वीआईपी नंबरों की नीलामी रात 12 बजे तक चलती है। नियमों के अनुसार, आखिरी वक्त पर एक बोली के बाद दूसरे दावेदार को पैसा बढ़ाने के लिए 15 मिनट का समय मिलता है, लेकिन गुरुवार रात ऐसा नहीं हुआ। 12 बजने से तीन मिनट पहले वेबसाइट बंद हो गई, सभी नंबर हटा दिए गए। 15 मिनट के नियम के चलते 12 बजे बाद तक नीलामी चलती है। कई बार रात 4 बजे तक भी नीलामी हुई।

फायदा पहुंचाने के लिए हुई गड़बड़ी
आरटीओ के जानकारों के अनुसार, कभी-कभी तकनीकी दिक्कत आती है। तीन मिनट पहले वेबसाइट से सभी नंबर हटाने की घटना पहली बार हुई है, ताकि दूसरा बोली न लगा सकेे। वेबसाइट का संचालन स्मार्ट चिप करती है। बिना गड़बड़ी के नंबर समय से पहले हटना संभव नहीं है।

13 लाख में बिक चुका है नंबर
0001 नंबर कोरोना पूर्व 13 लाख रुपए तक में भी बिक चुका है। बीते साल यह नंबर 3 लाख 91 हजार में बिका था। इस नंबर के लिए वाहन स्वामी लाखों रुपए देने के लिए तैयार रहते हैं। अधिकारियों की मिलीभगत के चलते जो नंबर ज्यादा में बिक सकता था, वह 3.66 लाख में ही बिका। इससे परिवहन विभाग को राजस्व का नुकसान हुआ और ज्यादा पैसे देने वाले वाहन स्वामियों को निराश होना पड़ा।

89 वीआईपी नंबर बिके
वेबसाइट में हुई गड़बड़ी के बीच एमपी 09 डब्ल्यूएम की नई सीरीज के 89 नंबर बिके। 0005 नंबर 98 हजार, 0002 नंबर 50074, 0009 नंबर 101000, 9000 हजार नंबर 82 हजार, 0002 नंबर 50 हजार और 0909 नंबर 55 हजार में बिका।

ये गलत है कि किसी विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया है। समय से पूर्व अगर वेबसाइट बंद हो गई है तो इसके पीछे तकनीकी कारण हो सकता है। शिकायत आई है। मामले की जांच कराएंगे।
- अर्चना मिश्रा, एआरटीओ

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