डॉक्टर की मौत हो गई, फिर कौन चला रहा उनका अस्पताल

बिना लायसेंस चल रहा अस्पताल, संचालक की मौत, एयरपोर्ट रोड पर स्थित रामकृष्ण हॉस्पिटल, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चुप

By: amit mandloi

Published: 10 Nov 2017, 08:41 PM IST

लखन शर्मा. इंदौर
शहर में धड़ल्ले से खुल चुके अस्पतालों में बिना योग्यता के डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौन बैठे हैं। कल पुलिस ने दो ऐसे लोगों पर कार्रवाई की थी। एयरपोर्ट रोड स्थित रामकृष्ण अस्पताल इन दिनों बिना संचालक के ही संचालित हो रहा है। जिन डॉ. प्रताप देवड़ा के नाम पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन है उनकी कुछ माह पहले मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद यहां का अब तक नया रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, लेकिन अस्पताल संचालित हो रहा है। खास बात है कि यहां बिना योग्यता के ही डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। यहां तक कि आईसीयू भी संभाला जा रहा है। जानकारी मिलने के बाद कल न्यूज टुडे की टीम ने यहां का स्टिंग ऑपरेशन किया।

आईसीयू में ओपीडी
न्यूज टुडे रिपोर्टर करीब ७.३० बजे अस्पताल पहुंचे। यहां काउंटर पर डॉक्टर को दिखाने की बात कही। हमने डॉक्टर का पूछा और कहा कि किसी एमडी मेडिसिन को दिखाना है। इस पर रिसेप्शनिस्ट ने कहा कि यहां एमबीबीएस है उनको दिखा लीजिए। उसने आईसीयू में बैठे डॉक्टर को दिखाने का कहा। हमने हां कहा और फीस देकर आईसीयू में दाखिल हो गए। यहां आईसीयू में ही ओपीडी भी संचालित हो रही थी जो नियमानुसार गलत है। यहां डॉ. प्रतिपाल सिंह ने हमें देखा और कुछ एलोपैथी की दवाइयां लिख दीं। दवाइयों को बाहर बने मेडिकल से लेने के लिए कहा गया।

इंटर्नशिप करने वालों को नहीं होती पात्रता
रिपोर्टर ने इलाज कराने के बाद जब फोन पर डॉ. प्रतिपाल परमार से अपनी डिग्री और एमबीबीएस रजिस्ट्रेशन की जानकारी मांगी तो उन्होंने इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने की जानकारी दी। यह प्रोवीजनल रजिस्ट्रेशन था जो मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल की तरफ से जारी किया गया था जिसकी तारीख ६ फरवरी २०१७ है। इसके बाद डॉक्टर को एक साल इंटर्नशिप करनी होती है। नियम कहते हैं कि इस सर्टिफिकेट के बाद एमबीबीएस डॉक्टर किसी भी प्रायवेट अस्पताल में स्वयं आईसीयू नहीं संभाल सकता, न ही मरीजों को स्वयं देख सकता है। सिर्फ किसी एमडी मेडिसिन के अंडर में इंटर्नशिप कर सकता है, लेकिन डॉ. प्रतिपाल यहां आईसीयू तो संभाल ही रहे थे साथ ही रिपोर्ट पर ट्रीटमेंट भी उन्होंने ही कर दिया। जो गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है।

अब तक नहीं हुआ रजिस्ट्रेशन
धारा १९९७ के नियम १२ के अनुसार किसी भी अस्पताल में कोई भी स्टाफ में परिवर्तन हो जाए तो उसकी जानकारी तुरंत सीएमएचओ कार्यालय में देनी होती है और अगर संचालक जिसके नाम पर अस्पताल रजिस्टर्ड है उसकी मौत हो जाए तो दूसरे को संचालक बनाना पड़ता है। इस अस्पताल में संचालक की मौत के महीनों बीत जाने के बाद अब तक नया रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।

हम तो कर रहे गरीबों की सेवा
अस्पताल का मैनेजमेंट संभालने वाले अनिल शर्मा से जब इस संबंध में बात की तो पहले तो वे अनियमितताएं होने से मना करते रहे। जब उन्हें सबूतों और नियमों की जानकारी दी तो कहने लगे हम तो गरीबों की सेवा करते हैं। हमारे अस्पताल में और भी डॉक्टर हैं। हमने नए रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाय भी कर दिया है। उधर, जब डॉ. परमार से बात की कि वे किस डॉक्टर के अंडर में इंटर्नशिप कर रहे हैं तो वे किसी भी डॉक्टर का नाम नहीं बता सके।


अस्पताल पर होगी कार्रवाई
जिस तरह की जानकारी मिली है उसके अनुसार अस्पताल में नियम तोडक़र काम किए जा रहे हैं। हम टीम बनाकर भेजेंगे और अस्पताल का दौरा करवाएंगे। अस्पताल के ऊपर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
डॉ. एचएन नायक, सीएमएचओ

amit mandloi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned