कुटुम्ब न्यायालय में बढ़ रही पेंडेंसी

कोरोना के कारण गत वर्ष करीब 8 माह नहीं हो सकी सुनवाई

By: रमेश वैद्य

Published: 08 Apr 2021, 08:39 PM IST

इंदौर. कोरोना वायरस संक्रमण का असर न्याय व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। पिछले वर्ष लॉकडाउन और कफ्र्यू के चलते इंदौर के कुटुम्ब न्यायालय में करीब आठ महीने तक नियमित सुनवाई नहीं होने से यहां विचाराधीन केसों की संख्या में काफी इजाफा हो गया है। इस समय कोर्ट में करीब ९ हजार केसों की पेंडेसी हो गई है।
पिछले साल अप्रैल में यह संख्या करीब 5000 केसों की थीं। नियमित सुनवाई नहीं होने के साथ ही कोरोना काल के लॉकडाउन और कफ्र्यू के दौरान पारिवारिक विवादों की संख्या भी बढ़ी है, इसके चलते भी केसों में इजाफा हो रहा है। लगातार पेेंडेंसी बढऩे के बाद कोरन संक्रमण की दूसरी लहर आने से फिर केसों की सुनवाई प्रभावित होना शुरू हो गई है। हाई कोर्ट ने गाइड लाइन जारी कर कोर्ट परिसर में पक्षकारों के प्रवेश पर रोक लगा दिया है। पक्षकार की उपस्थिति अनिवार्य होने पर कोर्ट की इजाजत के बाद ही पक्षकार कोर्ट में प्रवेश कर सकेंगे। पक्षकारों के खिलाफ वारंट जारी करने पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है।
तलाक के केसों में इजाफा
कुटुम्ब न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट जितेंद्र सिंह राठौर का कहना है पिछले 6 महीने में तलाक के केसों में बढ़ोतरी हुई है। इंदौर के कुटुम्ब न्यायालय में इस समय करीब तलाक के करीब 3500 केस विचाराधीन है। विवाद के चलते तलाक के अलावा आपसी सहमति से तलाक के केसों में भी बढ़ोतरी हो र ही है। न्यायालय में केस के विचारण में समय लगने के चलते कई लोग सहमति से तलाक ले रहे हैं।
भरण-पोषण वसूली में आएगी परेशानी
एडवोकेट प्रमोद जोशी ने बताया कोरोना संक्रमण के चलते अगले एक महीने तक कुटुम्ब न्यायालय में पक्षकारों के प्रवेश पर रोक और वारंट जारी नहीं होने से भरण पोषण राशि की वसूली से जुड़े केसों में महिला पक्षकारो को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। पिछले वर्ष लगे लॉकडाउन और कफ्र्यू में सबसे अधिक परेशानी इन्हीं केसों में हुई थी। कोर्ट के आदेश के बाद भी पुरुष पक्षकारों ने महिलाों और उनके बच्चों को भरण पोषण की राशि नहीं दी थी।
दो न्यायाधीश बीमार, एक संभाल रहे जिम्मेदारी
कुटुम्ब न्यायालय में इस समय तीन जज प्रकरणों की सुनवाई के लिए नियुक्त हैं। प्रधान न्यायाधीष आरसी शर्मा के अलावा प्राणेष कुमार प्राण और अनिल सोहाने यहां पदस्थ है। लेकिन पिछले एक सप्ताह से आरसी शर्मा ही केसों को सुन रहे हैं। अस्वस्थता के चलते न्यायाधीष प्राणेश कुमार और अनिल सोहाने फिलहाल कोर्ट नहीं आ रहे हैं।
फैक्ट फाइल
9000 केस पेंडिग
4500 तलाक केस
2500 भरण पोषण और राशि वसूली
1000 मुस्लिम लॉ से जुड़े केस
1000 बच्चों की कस्टडी से जुड़े
(नोट : आंकड़े प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के मुताबिक)

रमेश वैद्य Desk
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