हाईकोर्ट के फैसले के बाद लहसुन किसानों को मिलेगा फायदा, ये होगा नया बदलाव

हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के आदेश के बाद पिछले 10 सालों से मध्यप्रदेश की मंडियों में चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया है।

By: Narendra Hazare

Published: 01 Mar 2017, 10:57 PM IST


इंदौर। हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के आदेश के बाद पिछले 10 सालों से मध्यप्रदेश की मंडियों में चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि कृषि उपज मंडी का लक्ष्य किसानों को उनकी फसल का ज्यादा दाम दिलाकर उन्हें फायदा पहुंचाना है। इसलिए किसान अब अपनी स्वेच्छा के अनुसार कृषि उपज मंडी या फिर आढ़तियों के द्वारा जहां उन्हें ज्यादा मुनाफा मिले अपनी लहसुन बेच सकते हैं।


सन 2007 में राज्य सरकार ने फैसला दिया था कि लहसुन केवल सरकारी मंडियों द्वारा ही बेची जाएगी और आढ़तियों एजेंटों की इसमें कोई भूमिका नहीं होगी। लेकिन इस व्यवस्था से किसानों का नुकसान होने लगा क्योंकि सरकार उन्हें उनकी लहसुन का पूरा दाम नहीं दिला सकी। इस व्यवस्था से नाखुश किसानों ने फिर से मांग की कि उनकी लहसुन आढ़तियों (एजेंटों) द्वारा बिकवाई जाए। जिसके बाद राज्य सरकार ने मार्च 2015 में यह आदेश निकाला कि किसान की लहसुन आढ़तियों (एजेंटों) द्वारा बेची जाए, लेकिन लहसुन बेचने का फैसला ऐच्छिक हो, मतलब किसान अपनी इच्छानुसार किसी भी तरीके से अपनी लहसुन बेच सके। लेकिन इस व्यवस्था के विरोध के चलते राज्य सरकार को एक बार फिर यह आदेश खारिज करना पड़ा और किसानों का माल फिर से सरकारी कृषि उपज मंडी में बिकने लगा।

garlic

 इसके बाद आलू प्याज़ कमीशन एजेंट एसोसिएशन (आड़तिये) अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट गए और हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य में मंडियां  किसानों के हित के लिए है। तथा किसानों को उचित और अच्छा दाम मिले इसलिए बनाई गई है।  इसके लिए कोर्ट ने खाप के हवाले दिए जिनमें लिखा है। मंडी बोर्ड ने जो आदेश निकाला था। धारा 80 के अंतर्गत उसमें मंडी को यह अधिकार है कि वो अपनी विक्रय व्यवस्था जरूरत के अनुसार बदल सकती है। इसलिए नियमानुसार आड़तिये (एजेंट) भी लहसुन  को बेच सकते हैं लेकिन इसमें एक संशोधन यह कर दिया गया कि फसल बेचने के लिए किसान से किसी भी प्रकार का कोई कमीशन (आढ़त) नहीं लिया जाएगा।


आलू प्याज़ कमीशन एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष नारायण हरी चौधरी ने बताय की मध्य प्रदेश की मंडियों में किसानों से किसी भी प्रकार की फसल पर  आढ़त (कमीशन) नहीं ली जाती है अब हाईकोर्ट का यह आदेश  आ जाने के बाद इंदौर, रतलाम, जावरा, नीमच, मंदसौर तथा आसपास की मंडियों सहित पूरे मध्यप्रदेश में किसान अपनी लहसुन सरकारी मंडी के साथ-साथ आढतियों (एजेंट्स ) द्वारा भी भी बेच सकते हैं। 
Show More
Narendra Hazare
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned