अमरीकी बचे ठगी से.... एफबीआइ ने इसलिए किया पुलिस का सम्मान

अमरीकी बचे ठगी से.... एफबीआइ ने इसलिए किया पुलिस का सम्मान

Pramod Mishra | Updated: 11 Jul 2019, 10:07:45 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

दो कॉल सेंटर में पकड़ाए थे 78 आरोपी


इंदौर. साइबर सेल ने पिछले दिनों दो फर्जी कॉल सेंटर पकड़े थे जिसके जरिए अमरीकियों को ठगने का काम किया जा रहा था। एफबीआइ के अफसरों ने इस पर प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी वीके सिंह को प्रशस्ति पत्र व शील्ड दी।
भोपाल में गुरुवार को एफबीआइ के एजेंट माइक स्टूकेस व अन्य अफसरों ने डीजीपी वीके सिंह से मुलाकात कर कॉल सेंटर पकड़कर अमरीकियों के साथ हो रही ठगी को रोकने पर आभार माना। इस दौरान साइबर सेल के एसपी जितेंद्रसिंह व अन्य अफसर भी मौजूद थे। साइबर सेल ने पिछले दिनों विजयनगर इलाके में छापा मारकर दो कॉल सेंटर से करीब 78 आरोपी पकड़े थे। अमरीकियों को सोशल सिक्यूरिटी नंबर ब्लाक करने की धमकी देकर आरोपी उनसे ठगी कर रहे थे। मामले में भी कुछ आरोपी फरार है जिनकी तलाश में टीमें गुजरात गई है। गुरुवार को दूसरी बार भोपाल आए एफबीआइ के अफसरों ने पुलिस अफसरों से मुलाकात की। साइबर सेल ने करीब 150 अमरीकियों की पूरी डिटेल एफबीआइ को सौंपी। इन 150 अमरीकियों से ठगी गई राशि का ब्योरा भी दिया। इसके अलावा आरोपियों के पास जो डाटा बैस मिला था वह भी सौंपा। एफबीआइ अब अमरीका के पीडि़तों की तलाश करेगी, अगर वहां कोई केस दर्ज है तो उसकी जानकारी भी देगी। प्रयास है कि वहां के ठगाए व्यक्ति के मामले में बयान करवाकर केस को मजबूत किया जा सके।

१२ जून को की थी बड़ी कार्रवाई
साइबर सेल ने पूयी फोर की दो बिल्डिगों में चल रहे कॉल सेंटर पर 12 जून को छापा मारकर 78 आरोपियों को पकड़ा था जिसमें 19 युवतियां भी शामिल थी। मुख्य आरोपी जावेद, शाहरुख व भाविल को रिमांड पर लेकर पूछताछ हुई तो पता चला कि भाविल ही ठगी के लिए अमरीका के लोगों का डाटा उपलब्ध कराता और ठगी के जरिए जो राशि मिलती उसका मैनटेंनेंस देखता था। पूछताछ में पता चला कि आरोपियों ने कॉल सेंटर खोलने के लिए फर्जी नाम से एक बीपीओ कंपनी भी बनाई थी। कंपनी का दूरसंचार विभाग से रजिस्ट्रेशन होना चाहिए लेकिन वह नहीं कराया था। यह कंपनी लीड जेक इनफोकॉम के नाम से बनी थी। यह कंपनी मुंबई निवासी विपिन उपाध्याय के नाम है। जावेद ने कॉल सेंटर खोलने के लिए विपिन के नाम से ही भवन मालिक से एग्रीमेंट किया था और विपिन को इसके एवज में हर महीने 40 हजार का भुगतान होता था।

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