डॉक्टरों में रोष : स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर को प्रोफेसर बनाया

- डॉक्टरों में आक्रोश : सर्जन को प्रोफेसर बनाने में अफसर रहे सफल
- मेडिकल कॉलेज में नियमों को ताक पर रख पदोन्नति

By: हुसैन अली

Published: 19 Jan 2019, 12:37 PM IST

इंदौर. प्रदेश में सरकार पर अफसरशाही अब भी भारी है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी स्वास्थ्य विभाग से आए डॉक्टर को सीधे प्रोफेसर बनवाने में आखिरकार सफल रहे। शासकीय कैंसर अस्पताल में पदस्थ सीएमओ सर्जन डॉ. नितिन तोमर को आगामी आदेश तक या तीन वर्ष के लिए कैंसर अस्पताल में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर विशेष आदेश के तहत प्रतिनियुक्ति दे दी गई है। असिस्टेंट सर्जन को सीधे प्रोफेसर पदोन्नत करने का यह पहला मामला है। इससे वरिष्ठ डॉक्टरों में आक्रोश है। हैरानी यह है, दिसंबर में ही यह मुद्दा कार्यपरिषद की बैठक में उठा था। वहीं एमवायएच में कई डॉक्टर वर्षों से प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं पर उन्हें नियमों का हवाला देते हुए पदोन्नति नहीं मिली।

यह है पूरा मामला
एमजीएम में 6 दिसंबर को ईसी बैठक में कैंसर अस्पताल के सर्जन को सीधे प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव रखा गया था। यह मुद्दा अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया की मौजूदगी में उठा था। प्रस्ताव एजेंडे में शामिल होकर मंजूर भी हो जाता, पर वरिष्ठ डॉक्टरों के विरोध से टल गया था।

- कैंसर अस्पताल में रहते डॉ. तोमर ने कई ऑपरेशन किए हैं। मेडिकल काउंसिल के दौरे में भी उन्हें सीनियर रेसिडेंट के तौर पर दिखाया गया है। वे सारी अर्हताएं भी पूरी करते हैं, इसलिए कॉलेज में खाली पद पर प्रतिनियुक्ति के तहत पदोन्नत किया गया है।
- डॉ. ज्योति बिंदल, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

बैठक में ली थी आपत्ति
डॉ. तोमर के पास मूलत: डिग्री ईएनटी विभाग की है। कुछ माह पूर्व प्रोफेसरों की भर्ती हुई थी तब डॉ. तोमर ने इंटरव्यू में भाग नहीं लिया था। कॉलेज की ईसी बैठक के एजेंडे में यह मुद्दा सामने आते ही वरिष्ठ डॉक्टर अचंभित रह गए। मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही एसीएस ने डॉ. तोमर द्वारा विशेष तकनीक से किए जा रहे ऑपरेशनों का हवाला देते हुए उन्हें पदोन्नति की अनुशंसा कर डाली। इस पर सर्जरी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर ने आपत्ति दर्ज करवाई थी।

हुसैन अली
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