ऐतिहासिक फैसला : मेदांता हॉस्पिटल में महिला से यौन प्रताडऩा, हाई कोर्ट का आदेश- 25 लाख मुआवजा दो

ऐतिहासिक फैसला : मेदांता हॉस्पिटल में महिला से यौन प्रताडऩा, हाई कोर्ट का आदेश- 25 लाख मुआवजा दो
ऐतिहासिक फैसला : मेदांता हॉस्पिटल में महिला से यौन प्रताडऩा, हाई कोर्ट का आदेश- 25 लाख मुआवजा दो

Hussain Ali | Updated: 17 Sep 2019, 10:55:03 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

- प्रबंधन कर्मचारी महिला की शिकायत को अनसुना करने और विशाखा कानून के उल्लंघन को दोषी
- हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपए जुर्माना भी लगाया

इंदौर. मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में महिला कर्मचारी को यौन प्रताडऩा मामले में इंदौर हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए पीडि़ता को 25 लाख रुपए मुआवजा 8 सप्ताह में अदा करने का आदेश दिया है। विशाखा कानून के तहत कमेटी नहीं बनाने और पीडि़ता की शिकायत को अनसुना करने का दोषी पाते हुए 50,000 रुपए का जुर्माना भी किया, जो 4 सप्ताह में रजिस्ट्री को जमा कराना होगा। समयसीमा में पीडि़ता को राशि नहीं देने पर 9 फीसदी की दर से ब्याज देना होगा।

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मामला 2017 का है। मेदांता हॉस्पिटल इंदौर में मार्केटिंग मैनेजर पद पर कार्यरत महिला ने अस्पताल प्रबंधन के व्यक्ति द्वारा सेक्सुअल हरासमेंट (यौन प्रताडऩा) करने की शिकायत की। हॉस्पिटल के उच्च प्रबंधन ने पीडि़ता की सुनवाई करना तो दूर, उसे नौकरी से ही निकाल दिया। पीडि़ता ने सेक्सुअल हरासमेंट एक्ट एट वर्क प्लेस 2013 के तहत महिला आयोग को शिकायत की। आयोग की इंदौर जिला स्तरीय शिकायत कमेटी ने जांच में मामला सही पाया और हॉस्पिटल पर प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए।

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2013 में एक्ट प्रभावशील होने के बाद पहला फैसला

जिला कमेटी के इस आदेश के खिलाफ अस्पताल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पीडि़ता की ओर से प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर जस्टिस रोहित आर्या की बेंच ने यह भी माना कि पीडि़ता को मानसिक, सामाजिक प्रताडऩा के अलावा नौकरी का नुकसान भी सहना पड़ा। संभवत: सेक्सुअल हरासमेंट एक्ट एट वर्कप्लेस 2013 के प्रभावशील होने के बाद किसी पीडि़ता के पक्ष में यह पहला फैसला आया है। अभिभाषक राहुल सेठी के अनुसार फैसले में कोर्ट ने अस्पताल प्रबंधन को न केवल पीडि़ता के पीएफ व अन्य सभी बकाया अदा करने के लिए कहा, बल्कि उन्हें अच्छे कार्य अनुभव के साथ केरेक्टर सर्टिफिकेट भी जारी करने के निर्देश दिए।

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