बचने के लिए जाल, हेलमेट और लाइफ जैकेट तक नहीं है वन विभाग के पास

बेहाल विभाग....

इंदौर. शहरी क्षेत्र में तेंदुए की दस्तक के बावजूद वन विभाग आम जनता की सुरक्षा को लेकर संजीदा नहीं है। शुक्रवार को पल्हरनगर में तेंदुए के घुसने के बाद विभाग ने न तो अब तक कोई जांच बैठाई है और न ही तेंदुए के फुट प्रिंट तलाशी को लेकर अभियान शुरू किया है। विभाग के आला अधिकारी भी मामले में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।

सुरक्षा संसाधनों की कमी को लेकर भी विभाग के आला अफसरों के पास पुख्ता जवाब नहीं है। वन अफसरों के मुताबिक शहर के बीच किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता ही विभाग के लिए पर्याप्त है। विभाग सिर्फ इंदौर वन क्षेत्र में मौजूद वन्य प्राणियों की गणना को लेकर तैयारी में जुटने का दिखावा कर रहा है।

पल्हरनगर में तेंदुए घुसने के बाद से ही क्षेत्र के रहवासी दहशत में हैं। वन विभाग ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन के नाम पर टीम को तो भेजा, लेकिन बगैर चिडि़याघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव की मदद के टीम को सफलता नहीं मिली। दो एसडीओ आरएन सक्सेना और आरसी चौबे तेंदुए के हमले में घायल भी हुए।

तेंदुए को जैसे-तैसे पकड़ तो लिया गया पर यह बात सामने आई कि विभाग के पास न तो जाल, हेलमेट और लाइफ जैकेट थे, न ही तेंदुए को ट्रेंकुलाइज करने के लिए पर्याप्त बंदूकें। जिस गन से तेंदुए को ट्रेंकुलाइज किया गया, वह भी चिडि़याघर प्रबंधन की थी।

जाल भी छोटा
संसाधनों की कमी कहें या अनुभव की। दोनों ही एसडीओ तेंदुए की मौजूदगी के बावजूद सुरक्षा साधनों से लैस नहीं थे। यही हाल अन्य अमले का भी था। सभी के पास खुद की सुरक्षा को लेकर कोई साधन मौजूद नहीं थे, जो संसाधन लेकर वन विभाग का दल तेंदुए को पकडऩे के लिए पहुंचा था, उसमें मात्र एक जाल, एक पिंजरा ही मौजूद था। खास बात यह है कि जो जाल दल लेकर पहुंचा था, उनकी लंबाई और चौड़ाई भी पर्याप्त नहीं थी। यही वजह है कि उन्हें इतने लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा।

लापरवाही पड़ी भारी
तेंदुए को जब ट्रेंकुलाइज किया गया था, उसके बाद उसे बेहोश होने में करीब आधे घंटे से लेकर 3 घंटे तक का समय लगता है। इसके बावजूद पर्याप्त समय न होते हुए भी एसडीओ आनएन सक्सेना ने तेंदुए के नजदीक जाने की कोशिश की। इस पर तेंदुआ भडक़ गया और उसने उन पर हमला बोल दिया। एसडीओ के इस कदम से वहां बड़ी संख्या में मौजूद लोगों की जान पर बन आती।

सीधी बात
- शहर में तेंदुए की आमद को लेकर क्या कोई जांच की जा रही है?
जंगली जानवरों की स्थिति का पता लगना मुश्किल होता है। तेंदुआ काफी तेजी से आगे बढ़ता है, इसलिए उसके आने के रूट का पता नहीं लगा सकते।
- तो क्या मामले में किसी तरह की कोई जांच नहीं की जाएगी?
हम वन मंडल इंदौर में मौजूदा वन्य प्राणियों की गणना का कार्य कर रहे हैं। उसमें पता लग जाएगा कि किस क्षेत्र में कितने तेंदुए थे।
- रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए संसाधनों की कमी का क्या कारण है?
संसाधनों की कमी तो हर क्षेत्र में होती है। प्रदेश के कई विभाग हैं, जहां कमियां हैं।
- तो क्या कमियों को पूरा नहीं किया जाएगा?
एेसा नहीं है, जहां तेंदुए को पकड़ा गया, वहां हजारों की संख्या में लोग थे। एेसे में बगैर किसी जनहानि के उसे पकडऩा ही सबसे बड़ी सफलता है।
पुरुषोत्तम धीमान, सीसीएफ

अर्जुन रिछारिया Incharge
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