लाखों बैंक खातों में जमा कराए, न डीलरशिप दी और न ही कोई उत्पाद बेचा, कंपनी बंद

आयुर्वेदिक दवाइयों की डीलरशिप के नाम पर धोखाधड़ी

By: KRISHNAKANT SHUKLA

Updated: 29 Feb 2020, 12:24 PM IST

इंदौर. आयुर्वेदिक दवाइयों की डीलरशिप के नाम से लोगों को संपर्क कर झांसे में लेने के बाद उनसे लाखों रुपए बैंक खातों में जमा कराए, न डीलरशिप दी और न ही कोई उत्पाद बेचा और कंपनी बंद कर दी। बाद में दूसरी जगह नए नाम से कंपनी खोलकर फिर इसी तरह धोखाधड़ी शुरू कर दी। पुलिस ने कंपनी के एमडी को गिरफ्तार कर लिया है।

क्राइम ब्रांच थाने में आयुष श्रीवास्तव, लखनऊ की शिकायत पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करने के बाद आरोपी कपिल करदिले निवासी एमआइजी थान को गिरफ्तार किया है। एएसपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक, फरियादी ने बताया था कि आरोपी कपिल करदिले की कंपनी आरोग्यांजलि आयुर्वेदिक प्रा. लि. ने डीलरशिप के लिए उससे बात की और 3 लाख रुपए बैंक खाते में जमा करवा लिए। कंपनी ने डीलरशिप के साथ ही जमा राशि जितनी दवाएं भेजने का वादा किया था लेकिन बाद में न डीलरशिप दी और न ही दवा।

हाल ही में उसे पता चला कि कंपनी का बीसीएम हाइट्स विजयनगर में ऑफिस था। यह कंपनी पंजीकृत थी लेकिन एक साल पहले धोखाधडी करने के बाद कंपनी बंद कर दिया। शिकायत की जांच शुरू हुई तो पता चला कि आरोपी ने विजयनगर की साईं संपनी बिल्डिंग में आरोग्य ऋषि नाम से नया कामकाज शुरू कर दिया और वहां भी लोगों को ठगा जा रहा है। यह संस्था पंजीकृत भी नहीं थी। पुलिस ने आरोपी के ऑफिस में छापा मारा तो वहां कम्प्यूटर, लैपटॉप व कई मोबाइल मिले।

एएसपी दंडोतिया के मुताबिक आरोपी कपिल करदिले पिता दत्तात्रय निवासी एमआइजी को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। छानबीन में पता चला कि आरोपी करीब 4 साल से कंपनी के नाम पर धोखाधडी कर रहा है। वह इंटरनेट के जरिए छोटे कारोबारियों की जानकारी हासिल करता। आरोपी ने एक तरह से अपना कॉल सेंटर शुरू कर रखा था जहां तैनात कर्मचारी लोगों को झांसा देते।

भाजपा नेताओं से नजदीकी

पुलिस के मुताबिक, आरोपी कपिल स्नातक है, पहले वह निजी बैंक में काम करता था लेकिन बाद में कंपनी खोल ली। वह सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं के साथ फोटो डालकर अपना रसूख बताता था। उसकी साइड पर कई लोगों ने ठगी की शिकायतें कर रखी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती थी।

दो साल से जांच जारी, हो गई लाखों की ठगी

कपिल के खिलाफ पहले भी शिकायत हुई थी। दो साल से तो क्राइम ब्रांच ही जांच कर रही थी। जांच के कारण कार्रवाई नहीं हुई और इधर आरोपी लगातार ठगी करता रहा। एएसपी ने भी माना कि दो साल से जांच चल रही थी। आरोपी ने दूसरे राज्यों को लोगों को ज्यादा निशाना बनाया। बाहरी लोगों ने आकर अफसरों से मुलाकात की तब कहीं जाकर कार्रवाई हुई।

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