सौ रुपए में फर्जी सिम बनाकर अमेजन को लगा दिया लाखों का चूना, देखिए कैसे

nidhi awasthi

Publish: Feb, 15 2018 01:02:30 PM (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India

100 रुपए में फर्जी सिम लेकर शॉपिंग वेबसाइट को लगाई लाखों की चपत, माल नहीं मिलने का बहाना कर ले लेते थे रिफंड

इंदौर. आधार लिंक हुई सिम को 100 रुपए में हासिल कर दो युवक फर्जी पेमेंट वॉलेट बना ई-कॉमर्स कंपनियों को चपत लगा रहे थे। सामान मिलने पर बॉक्स खाली मिलने की शिकायत कर उसका रिफंड वे ले लेते थे। वहीं, सामान को कम कीमत पर ऑनलाइन कंपनी ओएलएक्स पर बेच देते थे। अपनी पहचान छिपाने के लिए आरोपित सॉफ्टवेयर की मदद से मोबाइल की आईएमईआई नंबर व कम्प्यूटर का आईपी एड्रेस भी छिपा लेते थे।

 

crime case

एसपी राज्य साइबर सेल जितेंद्र सिंह ने बताया, प्रिंस कुमार सिंह (१९) निवासी चिकित्सक नगर व विकास ङ्क्षसह परिहार (२२) निवासी जवाहर नगर को पकड़ा गया है। इनके पास से कम्प्यूटर पाट्र्स, महंगे कपड़े बरामद हुए हैं। कुछ दिनों पहले साइबर सेल ने सोहेल पटेल को पकड़ा था। उसने बताया था कि इंदौर में कुछ युवक राजस्थान व उड़ीसा से फर्जी सिम मंगवाकर उसका इस्तेमाल साइबर अपराध के लिए कर रहे हैं। इसकेबाद साइबर सेल के टीआई राशिद अहमद, एसआई आशुतोष मिठास की टीम जांच में जुटी। इसमें दोनों आरोपित पकडे़ गए। आरोपित फर्जी सिम के जरिए ई-वॉलेट पर कई खाते बना लेते थे। इसके बाद फर्जीवाड़ा करते थे। आरोपित के पास कुछ ऐसे सॉफ्टवेयर भी हैं, जिनसे वे साइबर ठगी के दौरान अपने मोबाइल का आईएमईआई नंबर व कम्प्यूटर का आईपी एड्रेस छिपा लेते थे। ऐसे में किस मोबाइल व कम्प्यूटर से ई-वॉलेट बना व ऑर्डर किया गया, इसका पता करना मुश्किल होता है। दोनों आरोपित को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस टीम में आमोद सिंह राठौर, अंबाराम बारूड़, धीरज सिंह गौर, राकेश बामनिया, आशीष शुक्ला, विवेक सिंह, राहुल सिंह गौर, गजेंद्र सिंह राठौर शामिल थे।

 

 

crime case

बेड डिलीवरी के जरिए करते थे खेल
दोनों आरोपित फर्जी सिम से बने ई-वॉलेट खाते से पांच हजार रुपए से कम कीमत का सामान बुक करते थे। जब डिलेवरी देने कोरियर कंपनी का कर्मचारी आता तो घर के बजाय रास्ते में कहीं बुलाकर डिलेवरी लेते और रुपए दे देते। कुछ कंपनियों की पॉलिसी है कि पांच हजार रुपए से कम कीमत के सामान होने पर ग्राहक अगर बेड डिलीवरी या प्रोडक्ट खराब होने की शिकायत करता है तो कंपनी तुरंत ही उसके वॉलेट में पैसा रिफंड कर देती है। वह इसके लिए किसी तरह की जांच नहीं करती। आरोपित इसी पॉलिसी का फायदा उठाते थे। विकास जो सामान मंगवाता, उसका खुद इस्तेमाल करता था और प्रिंस इन सामान को कम कीमत पर ओएलएक्स पर बेच देता था।

गर्लफ्रेंड के लिए इंदौर आया
मूलत: बिहार निवासी प्रिंस झारखंड से बीएससी करने के बाद दिल्ली चला गया। वहां साइबर ठगी की ट्रिक सीखी। फेसबुक पर इंदौर की युवती से दोस्ती होने पर अक्टूबर २०१७ में इंदौर आ गया। यहां साइबर ठगी से अपना व गर्लफें्रड का खर्च उठाता था। विकास निजी कॉलेज से बॉयोटेक फाइनल कर रहा है। पहले कोटा में रहकर दो साल पीएमटी की तैयारी की। चयन नहीं होने पर तीन साल पहले इंदौर आ गया। वह एथिकल हैकर बनना चाहता है।

 

crime case

ओटीएम गु्रप के जरिए मिलती है सिम
आरोपित ने बताया, साइबर ठग देशभर में ओटीएम गु्रप (वन टाइम पासवर्ड) से जुड़े रहते थे। इसमें कोई एक-दूसरे को नहीं जानता। ठगी के लिए फर्जी सिम के साथ हर तरह की मदद इस पर मिल जाती। जिसके पास जानकारी होती है, वह सीधे संपर्क कर मदद करता और पैसा ले लेता। कई रिटेलर इन गु्रप के जरिए १०० व २०० रुपए में फर्जी सिम उपलब्ध करवाते थे। ये सिम कोरियर के जरिए आती है।

1
Ad Block is Banned