आज सारे सरकारी बैंक पर लगा ताला, ग्राहक बनें वजह

बैंकों में ग्राहकों से वसूली व डूबत वसूलने में आनाकानी का विरोध, निजी बैंकों में होगा कामकाज

By: amit mandloi

Published: 22 Aug 2017, 11:45 AM IST

इंदौर. अब तक अपने हितों की लड़ाई के लिए हड़ताल करते आए सरकारी बैंकों के कर्मचारी इस बार ग्राहकों के हित की लड़ाई में उतरे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों में ग्राहकों से हो रही वसूली और डूबत खातों के ऋण वसूली में की जा रही आनाकानी का बैंक कर्मचारी ही विरोध कर रहे हैं। 22 अगस्त को इस मु²े पर सभी सार्वजनिक बैंक के कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। हालांकि निजी बैंकें चालू रहेंगी।

बैंक कर्मचारियों का आरोप है, डूबत ऋणों की वसूली करने के बजाय बैंकें सेवा शुल्क के बहाने आम ग्राहकों की जेब से इसकी भरपाई करने में जुटी हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के संयोजक मोहनकृष्ण शुक्ला ने कहा, सरकार ने १ अप्रैल से सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग भी महंगी बना दी हैं। इससे बैंकिंग व्यवस्था प्रभावित हो रही है। निजी बैंकें सेवा शुल्क को लेकर अपने स्तर पर शिथिल कर या ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए योजनाओं के बहाने लाभ दे रहे हैं, जबकि स्टेट बैंक सहित सार्वजनिक बैंकों में इस तरह की कोई योजना नहीं है।

इससे ग्राहक निजी बैंकों का रुख करने लग हैं। इस नीति के विरोध में देशभर में 10 लाख कर्मचारी मंगलवार को काम नहीं करेंगे। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पुरानी निजी बैंकें व क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की सभी शाखाओं में काम नहीं होगा। बैंककर्मी सीतलामाता बाजार से रैली के रूप में राजबाड़ा पहुंचेंगे, जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के समक्ष प्रदर्शन कर सभा होगी। शुक्ला के अनुसार इस साल स्टेट बैंक समूह को 1.5 लाख करोड़ रुपए का लाभ हुआ है, जबकि इसे मात्र 473 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। 1 अप्रैल से लागू सेवा शुल्क से स्टेट बैंक ने पहली तिमाही में ही 235 करोड़ रुपए वसूले हैं।

इन शुल्क का विरोध
खाते में न्यूनतम राशि 3 हजार रुपए नहीं होने पर पेनल्टी का प्रावधान। फ्री दी जाने वाली चेक बुक के लिए अब चार्जेस निर्धारित हैं। चेक रिटर्न होने पर पेनल्टी बढ़ाकर ४३५ रुपए कर दी गई

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