डॉक्टर्स 5 साल गांव में करेंगे प्रैक्टिस तो पढ़ाई का खर्च उठाएगी सरकार

एमजीएम में योजना की शुरुआत

इंदौर. प्रदेश में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए इसी शिक्षण सत्र से मुख्यमंत्री मेधावी योजना लागू करने की तैयारी कर ली गई है। इंदौर सहित आसपास के मेडिकल कॉलेजों के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज डीन को सेंक्शनिंग अथॉरिटी बनाकर एक सप्ताह में प्राइवेट, सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में पात्र छात्रों की सूची मांगी गई है। ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने के बांड भरने पर छात्रों की फीस सरकार भरेगी।
एमजीएम डीन डॉ. शरद थोरा ने बताया, चिकित्सा शिक्षा विभाग से मिले निर्देशों पर एमजीएम के साथ अरबिंदो मेडिकल-डेंटल, शासकीय डेंटल अस्पताल, मॉडर्न मेडिकल-डेंटल, इंडेक्स मेडिकल-डेंटल, आरडी गार्डी कॉलेज उज्जैन व अमलतास मेडिकल कॉलेज देवास में नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। साथ ही डॉ. विजय भाईसारे को को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया है। सभी कॉलेजों से सात दिन में योजना के पात्र व इच्छुक विद्यार्थियों की सूची मांगी गई है। हामी भरने के बाद बांड व फॉर्म के साथ जरूरी दस्तावेज भोपाल भेजे जाएंगे। छात्रों की फीस सीधे कॉलेज के खाते में जमा होगी। पांच साल में सरकार एक छात्र की पढ़ाई पर 30 लाख रुपए खर्च करेगी। वहीं मेडिकल कॉलेज में मेरिट के आधार पर चयन के कारण ९९ फीसदी छात्रों के अंक 75 प्रतिशत से ज्यादा हैं। इस योजना में जाति का बंधन नहीं होगा।
योजना प्रदेश के विद्यार्थियों पर ही लागू होगी।

ये होंगे पात्र
जिन छात्रों के 12वीं में 75 फीसदी से ज्यादा अंक और परिवार की सालाना आमदनी छह लाख रुपए से कम है।

दस्तावेज देना होंगे
एडमिशन के दस्तावेजों के साथ १२वीं की मार्कशीट, मूल निवासी प्रमाण-पत्र, परिवार की आय के प्रमाण-पत्र की कॉपी देना होगी।

ये रहेंगी शर्तें
निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में फीस नियामक आयोग द्वारा निश्चित शिक्षण शुल्क राशि छात्रों को तब दी जाएगी, जब वह शासन के पक्ष में बांड भरकर देंगे कि एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद 5 वर्ष के लिए सेवाएं ग्रामीण अस्पतालों या ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में देंगे।

 

अर्जुन रिछारिया Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned