बैंक लौटा रही जीएसटी चालान, कैसे जमा होगी कर की राशि

सॉफ्टवेयर काम नहीं कर रहा है, इसमें दिए ऑप्शन एेसे बनाए गए हैं, जिनका एक बार चुनाव करने के बाद दोबारा बदल नहीं सकते हैं।

By: amit mandloi

Published: 18 Aug 2017, 12:58 PM IST

इंदौर. पहले जीएसटी लागू होने के हल्ले में उद्योग-व्यापार प्रभावित रहा। अब इसे भरने को लेकर चल रही गहमा-गहमी से कारोबारी खासी मुश्किल में है। वजह एक नहीं अनेक है। सॉफ्टवेयर काम नहीं कर रहा है, इसमें दिए ऑप्शन एेसे बनाए गए हैं, जिनका एक बार चुनाव करने के बाद दोबारा बदल नहीं सकते हैं। इससे भी ज्यादा मुश्किल तो पैसे भरने को लेकर हो रही है। बैंक चालान यह कहते हुए नहीं ले रहे हैं, इसे जमा किस मद में करेंगे। इसके अलावा टैक्स की दरों और काउंसिल द्वारा लिए फैसलों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

देश में 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने के बाद से ही सरकार के रंग रोजाना बदल रहे है। व्यापारियों को बड़ी राहत देते हुए रिटर्न भरने की तिथि एक माह आगे बढ़ा दी, लेकिन सरकार को जब समझ आया, अगस्त में खजाना खाली रह जाएगा। ताबड़-तोड़ एक आदेश जारी करते हुए एक नया फॉर्म 3बी लेकर आए और 20 अगस्त तक जुलाई माह का अनुमानित जीएसटी भरने के निर्देश दे दिए। कमर्शियल टैक्स प्रेक्टिशनर्स एसोसिएशन के सदस्यों ने इन सभी की जानकारी राज्य कर आयुक्त को भी दे दी है। हालांकि इससे समस्या हल होना नहीं है, क्योंकि निर्णय तो केंद्रीय काउंसिल के स्तर पर ही होगा।

क्या कहते हैं जानकार
एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक गौर का कहना है, सरकार के फरमान के बाद व्यापारी कर तो जमा करना चाह रहे हैं। सिस्टम और दिशा-निर्देशों में समन्वयन नहीं होने से मुश्किल आ रही है। बैंकों की ओर से मना करने की समस्या के लिए वाणिज्यिक कर विभाग को अवगत कराया गया है। इसके लिए केंद्र सरकार यदि बैंकों को दिशा निर्देश जारी कर दें तो कई तरह की मुश्किलें समाप्त हो जाएगी। सबसे बड़ी बात सरकार को तिथि में बदलाव करना चाहिए।

सीए नितेश गुप्ता ने बताया, सरकार ने ३ बी फॉर्म का फॉर्मेट तो जारी कर दिया, लेकिन दिशा-निर्देशों के अभाव में इसे भरने में समस्या आ रही है। इसके लिए विभागीय स्तर पर भी कई बार निराकरण की स्थिति नहीं होती है। इसके अलावा काउंसिल की बैठक में कुछ फैसले तो ले लिए, लेकिन इनके लागू होने की तिथि स्पष्ट नहीं होने से इन पर अमल कैसे करें यह बड़ी समस्या है।

एेसे हो रही मुश्किल
जीएसटी भुगतान की समस्या : जानकारों के अनुसार जीएसटी भरने के लिए तीन ऑप्शन दिए हैं। व्यापारी अपना कर ई-पेमेंट, ओवर द काउंटर या चालान व आरटीजीएस या नेफ्ट के जरिए भर सकता है। इसके लिए उसे किसी एक ऑप्शन का चुनाव करना होता है। बड़े कर दाता तो ई-पेमेंट से आसानी से कर रहे हैं। चालान व आरटीजीएस या कार्ड से भुगतान में परेशानी आ रही है।

अनेक बैंकों द्वारा व्यापारियों के चालान लेने या आरटीजीएस करने से मना किया जा रहा है। तर्क दिया जाता है, इस संबंध में दिशा-निर्देश नहीं मिलें है, जीएसटी की राशि किस मद या खाते में जमा की जाएगी। इसे विभाग को कैसे दिया जाएगा? इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। कुछ बैंके ले रही है, लेकिन वहां केश जमा करने को ले कर परेशानी है। व्यापारियों की दिक्कत यह है, एक बैंक द्वारा जमा करने से मना करने पर दूसरी बैंक चुनने में सॉफ्टवेयर सहयोग नहीं कर रहा है।

माईग्रेशन नहीं होने से मुश्किल

इसके अलावा माईग्रेशन नहीं होने से भी कर जमा करने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। व्यापारियों ने अपने दस्तावेज स्कैन कर लोड कर दिए हैं। इसका जब वेरिफिकेशन किया जा रहा है, तो तकनीकी त्रुटि होने पर उसे सही करने के लिए कहा जाता है। एेसे में कई व्यापारियों के माईग्रेशन की प्रक्रिया ही अटक गई है।

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