गुप्त नवरात्रि दस दिन की, दस माताओं का होगा पूजन

25 जनवरी से होगी शुरुआत, साधनाओं के लिए विशेष महत्व।

इंदौर. गुप्त नवरात्रि इस बार दस दिन २५ जनवरी से शुरू होकर ३ फरवरी तक रहेगी। इसका साधकों के लिए विशेष महत्व है। तंत्र-मंत्र साधना के लिए विशेष अनुष्ठान होंगे। माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मानी जाती है। ज्योतिषी मितेश मालवीय ने बताया, वर्षभर में चार नवरात्रि होती हैं, जिनमें दो गुप्त मानी जाती हैं। माघ और आसाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि को देव नवरात्रि भी कहा जाता है। इसमें सिद्धि, तंत्र-मंत्र और दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति, देवताओं द्वारा माता की विशेष-पूजन अर्चना की जाती थी। देवी के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं का पूजन किया जाता है। कलश स्थापना का मुहूर्त 25 को सुबह 7.13 से 10.50 तक रहेगा। माता पार्वती और शिवजी का आपस में विवाद हो गया। विवाद से बचने के लिए दूसरी तरफ मुंह घुमाते हैं, वैसे ही माता का विकराल रूप उनके सामने आ गया। हर दिशा में मुंह फेरने पर सभी दिशाओं में माता के 10 रूप दिखे। दस महाविद्या विभिन्न दिशाओं की अधिष्ठात्री शक्तियां हैं।

यह हैं दस महाविद्या के नाम
काली, तारा, त्रिपुरा सुंदरी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।

ग्रहों की शांति दस महाविद्या की साधना से
हर ग्रह का संबंध किसी एक महाविद्या से है। ग्रह संबंधी महाविद्या की आराधना से उससे संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। सूर्य ग्रह के लिए मातंगी, चंद्रमा के लिए भुवनेश्वरी, मंगल के लिए बगलामुखी, बुध के लिए त्रिपुरा सुंदरी, गुरु के लिए तारा माता, शुक्र के लिए कमला माता, शनि के लिए माता काली, राहू के लिए छिन्नमस्तिका, केतु के लिए धूमावती की पूजा की जाना चाहिए। लग्न कमजोर या कोई दुष्प्रभाव है तो माता त्रिपुरा भैरव की आराधना से लग्न मजबूत होता है।

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shatrughan gupta
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