6 मौतों के दूसरे ही दिन बिटिया ने पुनीत अग्रवाल के घर में कम किया ढेर 'सारा' गम, गमगीन दादी के खिले चेहरे

सारा के जन्म के बाद पुनीत अग्रवाल की पत्नी और बेटे के चेहरे पर आई मुस्कान, तस्वीर देख लोग बोले- ऐसी शक्ति सभी को देना दाता

By: Muneshwar Kumar

Updated: 03 Jan 2020, 03:23 PM IST


इंदौर/ महू लिफ्ट हादसे में पाथ इंडिया कंपनी के मालिक पुनीत अग्रवाल समेत उनके परिवार के छह लोगों की मौत हो गई है। परिवार ही नहीं शहर भी गमगीन था। लेकिन दो दिन बाद ही परिवार में एक बिटिया ने जन्म लिया तो ढेर सारा गम हो गया। जिस दिन उस बिटिया का जन्म हुआ, उसी दिन पुनीत अग्रवाल के बेटे निपुण अग्रवाल का बर्थडे भी था। सारा आई तो अपने साथ गमगीन परिवार के लिए खुशियां भी लेकर आईं।

सारा के जन्म के साथ ही पुनीत अग्रवाल की फैमिली में एक नई उर्जा आई है। जिस दिन सारा का जन्म हुआ, उसी दिन उसके पिता निपुण अग्रवाल का बर्थडे भी था। परिवार के लिए उस दोहरी खुशी का दिन था। लेकिन दो दिन पहले हादसे में उसके दादा और भाई समेत छह लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे में परिवार के लिए इस पल को सेलिब्रेट करना आसान नहीं था।

निपुण ने अस्पताल में ही काटा केक
सारा के जन्म के बाद परिवार का गम कुछ गम था। निपुण ने बिटिया को गोद में लेकर मां नीति अग्रवाल के साथ अस्पताल के कमरे में ही केक काटा। इस दौरन दोनों के चेहरे पर हल्की मुस्कुराहट भी देखने को मिली। परिवार के लोगों ने गम के बीच इस तस्वीर को जारी किया है। इस तस्वीर को देख लोगों के लिए सुकून भरी बात यह है, यह परिवार धीरे-धीरे इस हादसे को भूल जाएगा।

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ऐसी शक्ति सभी को देना दाता
दरअसल, हादसे वक्त पुनीत अग्रवाल की पत्नी नीति अग्रवाल और बेटे निणुण अग्रवाल भी मौके पर मौजूद थे। दोनों इस हादसे के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं। नीति के आंखों के सामने पति, बेटी, दामाद, पोते और रिश्तेदारों की मौत हुई। निपुण ने अपने आंखों के सामने ही अपने लाडले को हमेशा के लिए दूर जाते हुए देखा है। उसके बाद दोनों के चेहरे पर दो दिन बाद जब यह खुशी दिखी तो सभी लोगों ने यहीं कहा कि ऐसी ही शक्ति को सभी को देना दाता।

आसान नहीं होता खुद को संभालना
सोचिए, जिस परिवार छह सदस्यों की मौत एक साथ हो जाए। उस परिवार पर क्या हाल होगा। ताउम्र शायद इस दर्द को भूला पाना आसान नहीं होता। कुछ महीने तो उससे उबरने में लग ही जाता है। लेकिन कुछ बिरले ऐसे भी होते हैं, जिनके हौसले के आगे गमों का पहाड़ टूट जाता है। शायद सारा के आने के बाद नीति और निपुण खुद को संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

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