वीडियो - इंदौर के DUSSEHRA मैदान पर होगा वॉटर प्रूफ रावण का दहन, 111 फीट के रावण को त्रिपाल से किया कवर

वीडियो - इंदौर के DUSSEHRA मैदान पर होगा वॉटर प्रूफ रावण का दहन, 111 फीट के रावण को त्रिपाल से किया कवर
वीडियो - इंदौर के DUSSEHRA मैदान पर होगा वॉटर प्रूफ रावण का दहन, 111 फीट के रावण को त्रिपाल से किया कवर

Reena Sharma | Publish: Oct, 06 2019 05:39:45 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

  • इंदौर में फिर शुरू हुई झमाझम बारिश
  • दुकानों पर बिक रहे वॉटर प्रूफ रावण

रीना शर्मा विजयवर्गीय @ इंदौर. रविवार को शहर में एक बार फिर झमाझम बारिश का शुरू हो गई जबकि रविवार सुबह से ही तेज धूप खिली हुई थी। एक बार फिर हुई झमाझम बारिश को देखते हुए दशहरा के दिन जलने वाले रावण पर भी संकट के बादल छा गए। शहरभर में रावण का दहन होना है ऐसे में हर किसी को बारिश के चलते वॉटर प्रूफ रावण बनाना पड़ रहे है। ऐसा ही एक नजारा आप इंदौर के दशहरा मैदान पर भी देख सकते हैं।

गणेश चतुर्थी के दिनों से ही दशहरा मैदान पर रावण के बनने की प्रक्रिया लगभग शुरू हो गई थी और रविवार को ही यहं रावण को खड़ा भी कर दिया गया था लेकिन दोपहर 1 बजे से फिर शहर में तेज बारिश शुरू हो गई जिसके चलते दशहरा महोत्सव समिति द्वारा रावण को त्रिपाल से ढाका गया।

वीडियो - इंदौर के DUSSEHRA मैदान पर होगा वॉटर प्रूफ रावण का दहन, 111 फीट के रावण को त्रिपाल से किया कवर

समिति के संयोजक सत्यनारायण तलवारिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 51 सालों से दशहरा मैदान पर रावण दहन किया जा रहा है। इसलिए इस बार भी भले ही बारिश हो रावण दहन जरूर होगा। इस बार 111 फीट का रावण बनाया गया है। रावण पूरी तरह वॉटर प्रूफ है। तलवारिया ने बताया दशहरा के दिन राम, लक्ष्मण और हनुमान वानर सेना की शोभा यात्रा भी निकाली जाएगी। इसकी शुरुआत शाम ५ बजे से महू नाका से होगी और ये दशहरा मैदान आएगी।

दुकानों पर बिक रहे वॉटर प्रूफ रावण

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रावण बनाने वाले दुकान संचालकों ने बताया कि तेज बारिश को देखते हुए इन दिनों मार्केट में वॉटर प्रूफ रावण बनाए गए हैं। जिसे लोग खरीदकर दशहरा पर्व मना सकते है। इन रावणों की कीमत 300 से 1500 रुपए तक है। रावण लगभग सभी साइज के उपलब्ध है।

फसल कटाई के बाद भी करेंगे नुकसान का आकलन
जिले में प्रशासन के सर्वे में अभी कहीं नुकसान नहीं बताया गया। हालांकि यह जरूर बताया कि खेत में पानी भराया और दाने कमजोर हुए, लेकिन पूरी फसल को नुकसान सामने नहीं आया। वहीं फसल कटाई के बाद फिर तोलकर फसल नुकसानी का जायजा लिया जाएगा। शासन के नियमों के तहत 30 फीसदी से अधिक नुकसान को ही दर्ज किया जाता है और बीमा क्लेम मिलता है।

फोटो/वीडियो - रविन्द्र सेठिया

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