scriptHonor returned with heritage, but now confused on identity | धरोहरों के साथ लौटा सम्मान, लेकिन अब पहचान पर उलझन | Patrika News

धरोहरों के साथ लौटा सम्मान, लेकिन अब पहचान पर उलझन

- वर्षों बाद स्वदेश लौटीं 250 से अ धिक ऐतिहासिक मूर्तियां व पुरावस्तुएं, इनमें ज्यादातर कहां की इसकी जानकारी नहीं
- प्रदेश की भी काफी संख्या में दुर्लभ प्राचीन प्रतिमाएं और आकृतियां शामिल
- पहचान के बाद संग्रहालय या संबंधित पुरास्थल में की जाएंगी पुनर्स्थापित-प्रदर्शित

इंदौर

Published: July 27, 2022 11:54:16 pm

इंदौर। भारत का वैभवशाली इतिहास यहां की मूर्तिकला और पुरावस्तुओं में छिपा है। वर्षों से देश की बहुमूल्य धरोहरें चोरी-तस्करी के बाद विदेशी संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं। इन्हें लाने के लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन अब जाकर सफलता मिलनी शुरू हुई है। इधर, इन धरोहरों के संबंध में कम जानकारी इनकी पहचान में बाधा बन रही है। वि भिन्न देशों से अब तक 250 से अधिक पुरावस्तुएं भारत को मिल भी चुकी हैं। इस सूची में मध्यभारत की काफी संख्या में दुर्लभ सामग्री व मूर्तियां शामिल हैं। पुरातत्वविदों और विभागीय अफसरों का कहना है कि कब-किस जगह से गायब हुईं थीं। उनका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है, ताकि उन्हें उसी जगह या निकटतम संग्रहालय में पुनर्स्थापित किया जा सके।
वापसी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया
विदेशों से भारतीय धरोहरों को लाने की दिशा में वैसे तो 1976 से ही प्रयास किए जा रहे थे। लेकिन पांच साल पहले तक कोई उल्लेखनीय कामयाबी नहीं मिली थी। विभिन्न देशों से भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध मधुर होने के बाद किए गए समझौतों के आधार पर अब तक 210 पुरावस्तुएं स्वदेश लाई जा चुकी हैं। विदेश में किसी स्थान पर भारतीय मूल की कोई कलाकृति होने की जानकारी मिलती है तो या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआइ) के ध्यान में लाई जाती है तो उसे वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय और संबंधित दूतावासों के साथ मामले को प्रमुखता से उठाया जाता है।
दो दशक में ये मूर्तियां हुईं चोरी
- मंदसौर से गौरी प्रतिमा 2001 में
- शहडोल के कंकली देवी मंदिर से खंडित मूर्ति 2010 में
- शहडोल से ही नृत्य गणेश की प्रतिमा 2012 में
- नीमच से नटराज, चामुंडा और विष्णु मस्तक व नायिका की प्रतिमा 2011 में
- रायसेन से वराह व अन्य प्रतिमाएं 2012 में
- ग्वालियर से अष्टभुजा देवी की प्रतिमा 2020 में
कब-कहां से लाई गईं
- 2022 में अब तक ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से 30 वस्तुएं वापस लाई गई हैं
- 2021 में अमरीका, कनाडा और ब्रिटेन से 159 पुरावस्तुएं लाई गईं
- 2017 से 2020 तक अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से 21 पुरावस्तुएं वापस लाई गईं थीं
यूएसए से लाईं गई मध्य क्षेत्र की पुरावस्तुएं
- त्रिभंग मुद्रा में बलुआ पत्थर से निर्मित पुरुष की आकृति
- बलुआ पत्थर से बनी महिला की अवाक्ष प्रतिमा
- बलुआ पत्थर की टूटी हुई आकृति
- नृत्य मुद्रा में नटराज की बलुआ पत्थर की आकृति
- बलुआ पत्थर का पैनल, जिसमें दो पुरुष आकृतियां (विद्याधर) दर्शाई गईं हैं
- भक्तों के साथ चौड़ी धारक
- जोड़ा व तीर्थंकर की प्रतिमा
- शीर्ष, महिला देवी, प्रेमी युगल प्रतिमाएं
- पुरुष आकृति- बोधिसत्व मैत्रेय की अवाक्ष प्रतिमा
- सूर्य और ब्रह्मा, बोधिसत्व की मूर्ति
- पुरुष की अवाक्ष मूर्ति और बुद्ध का शीर्ष
- युद्ध के दृश्य में विष्णु को दर्शाता हुआ पैनल
- महिला की आकृति संभवत: शालभंजिका
- विष्णु और उनके सहचर को दर्शाता पैनल
- कार्नर स्टोन पर खड़ी दो पुरुष आकृतियां
- विष्णु और शिव, उमा महेश्वर
- महिला की आकृति, ड्रम बजाती महिला, जैन चौबीसी
ऑस्ट्रेलिया से लौटाई गईं पुरावस्तुएं
- रागमाला शृंखला के पृष्ठ
- नागराज की पत्थर प्रतिमा
वर्जन
1 - इंदौर के इतिहास से संबंधित दुर्लभ खजाना यहां-वहां बिखरा पड़ा है। लेकिन जिम्मेदारों को इनकी सुध लेने की फुर्सत नहीं है। कुछ सामग्री अब भी गायब हैं। पांडुलिपियां बाहर चली गई हैं। इस दिशा में शोधपरक कार्य की नितांत आवश्यकता है।
जफर अंसारी, पुरातत्वविद्
historical sculptures and antiquities
historical sculptures and antiquities
2 - धरोहरों को स्वदेश वापस लाने की पहल स्वागत योग्य है। अब उनकी वास्तविक जगह की पहचान जरूरी हो गई। उन्हें निकटतम पुरास्थल या संग्रहालयों में विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
डॉ शिवाकांत वाजपेयी, अधीक्षण पुरातत्वविद् जबलपुर मंडल
3 - पुरावस्तुओं की पहचान की एक लंबी प्रक्रिया होती है। खजुराहो की एक मूर्ति की पहचान की जानकारी जरूर आई है, जिसे वहां पुनस्र्थापित किया गया है। ऐसी कोई सामग्री संज्ञान में आई तो उसकी पहचान कराई जाएगी।
डॉ. मनोज कुमार कुर्मी, अधीक्षण पुरातत्वविद्, भोपाल मंडल

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