निगम ने पेश नहीं की हुकमचंद मिल मजदूरों को पैसे देने की प्लानिंग

लीज निरस्ती के प्रस्ताव पर हाई कोर्ट की रोक जारी

By: रमेश वैद्य

Published: 02 Mar 2021, 08:09 PM IST

इंदौर. पिछले करीब २९ साल से अपने हक के पैसों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हुकमचंद मिल के मजदूरों की याचिका पर सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस रोहित आर्य की एकल पीठ ने नगर निगम परिषद की फरवरी 2020 में हुई आखिरी बैठक में हुकमचंद मिल की जमीन की लीज निरस्ती से जुड़े प्रस्ताव पर रोक जारी रखने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट के समक्ष नगर निगम को टाइम बाउंड प्रोग्राम पेश करना था, जिसके माध्मय से मिल के करीब ५८०० मजदूरों की बकाया करीब १७९ करोड़ रुपए की राशि लौटाई जानी है, लेकिन एक बार फिर निगम की वकील द्वारा इस पर समय मांग लिया गया। कोर्ट ने तीन सप्ताह बाद 23 मार्च को अगली सुनवाई के आदेश दिए हैं। मजदूरों की ओर से एडवोकेट धीरज सिंह पंवार ने आपत्ति ली। उन्होंने कहा कोर्ट के आदेश के बावजूद निगम ने पिछले 10 महीने से मजदूरों को उनका पैसा चुकाने का कोई प्लान नहीं दिया है। लगातार मजदूरों की जान जा रही हैं। कोरोना काल में पिछले करीब ११ महीने में मिल के ८९ मजदूरों की जान चली गई है, हाई कोर्ट में सुनवाई की हर सुनवाई के पहले किसी न किसी मजदूर की मौत की सूचना मिल रही है। मजदूरों को जल्द से जल्द उनका पैसा दिलाया जाए। मजदूरों को जमीन नहीं बस उनके हक का पैसा मिलना चाहिए। इस पर कोर्ट ने शासन और नगर निगम को फटकार लगाते हुए २३ मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में पैसे चुकाने का पूरा प्लान और बिना कोर्ट के अनुमति लीज निरस्ती का प्रस्ताव लाने को लेकर शपथ-पत्र पर स्पष्टीकरण मांगा है। मजदूरों का कहना है निगम को लीज निरस्ती का प्रस्ताव का अधिकार ही नहीं है क्योंकि पिछले करीब 20 साल से तो हाई कोर्ट में ही मामला विचाराधी है। सरकार, नगर निगम सहित अन्य पक्ष मामले को अनावश्यक विलंब में ले जा रहेैं, दूसरी तरफ लगातार बुजुर्ग मरीजों की जाने जा रही हैं, इसलिए जल्द से जल्द इस मामले का निराकरण कर मजदूरों को उनके हक का पैसा लौटाया जाना चाहिए।
12 दिसंबर 1991 को बंद हुई थी मिल
मजदूर नेता नरेंद्र श्रीवंश और हरनाम सिंह धालीवाल ने बताया 29 साल पहले 12 दिसंबर 1991 को हुकमचंद मिल बंद हो गया था। इसके बाद से मिल के मजदूर मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। करीब 5800 मजदूरों का २२९ करोड़ रुपए बकाया था, जिसमें से अब तक कोर्ट की सख्ती के बाद सिर्फ ५० करोड़ रुपए मिला है। 179 करोड़ रुपए अब भी बाकी है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट सालों पहले मिल की जमीन बेचकर मजदूरों को भुगतान करने का आदेश दे चुका है, लेकिन कागजी अडंग़ों के चलते जमीन बिक नहीं रही।

रमेश वैद्य Desk
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