scriptIDA forgot by acquiring land worth 230 crores | 230 करोड़ की जमीन अधिग्रहण कर भूला आईडीए | Patrika News

230 करोड़ की जमीन अधिग्रहण कर भूला आईडीए

पूर्व संचालक ने लिखा अध्यक्ष को पत्र, दिलाया याद मामला रिंग रोड के लिए तैयारी हुई योजना-94 का

 

इंदौर

Published: April 28, 2022 11:09:24 am

इंदौर। शहर के यातायात को सुगम बनाने के लिए दो दशक पहले इंदौर विकास प्राधिकरण ने ङ्क्षरग रोड की योजना बनाई थी। उसके लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जिसके चलते जमीन मालिकों को मुआवजा भी दे दिया गया। रोड तो बन गई, लेकिन बची जमीन को आईडीए भूल गया, जिसकी वर्तमान में कीमत 230 करोड़ रुपए से कम नहीं है। उस पर व्यावसायिक व आवासीय
ह्रश्वलॉट निकाले जाने थे।
230 करोड़ की जमीन अधिग्रहण कर भूला आईडीए
230 करोड़ की जमीन अधिग्रहण कर भूला आईडीए
इंदौर विकास प्राधिकरण ने शहर में कई योजनाओं को लागू करने के लिए जमीनों का अधिग्रहण किया। बकायदा उसका मुआवजा भी किसान को दे दिया गया, लेकिन ऐसी कई जमीन हैं, जिस पर प्राधिकरण ने ध्यान नहीं दिया। उन पर कब्जे हो गए हैं। ऐसा ही एक मामला प्राधिकरण की ङ्क्षरग रोड को लेकर बनाई गई योजना 94 का भी है। सड़क के आसपास की जमीन को भी आईडीए ने अधिगृहित किया था, लेकिन कई जमीनें उसके पास नहीं हैं या ये भी कहा जा सकता है कि अफसरों की लापरवाही से वह लूटती रही हैं।
ऐसा ही एक मामला पूर्व आईडीए संचालक राजेश उदावत ने अध्यक्ष जयपालङ्क्षसह चावड़ा को पत्र लिखकर उजागर किया। बताया कि खजराना के सर्वे नंबर आईडीए की योजना 94 में खजराना सर्वे नंबर 587, 588, 589, 31/2, 31/1 पार्ट 17, पार्ट 16, पार्ट 18, पार्ट 30 और पार्ट 19/1 की जमीन है। दो बार पूर्व में भी वे लिख चुके हैं, लेकिन कीमती जमीन का कब्जा आज तक नहीं लिया गया है। प्राधिकरण को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य तथ्यों की जानकारी मांगी थी, लेकिन जवाब दिया गया कि दस्तावेज तकनीकी शाखा में उपलब्ध नहीं हैं और जानकारी 20 साल पुरानी होने से कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।
ये योजना 14 किलोमीटर लंबी है जिसके कई प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन भी हैं। ऐसी महत्वपूर्ण नस्ती कार्यालय के रिकॉर्ड में उपल?ध नहीं होना ङ्क्षचता का विषय है। यदि जानकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है तो फिर कोर्ट में पेश शपथ पत्र झूठे हैं। प्राधिकरण अफसर गुमराह (बिना किसी दस्तावेजी साक्ष्य के ) करते हैं कि 2009 में सिटी फॉरेस्ट की जमीन नगर निगम को हस्तांतरित करना बता रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब सिटी पार्क नहीं बना तो निगम को कैसे हस्तांतरित कर दी गई। योजना 94 की सभी अधिग्रहित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में प्राधिकरण के नाम पर ही है। जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाता है तो 230 करोड़ रुपए से अधिक का धन निकलकर सामने आ सकता है।
बताई जमीन
- सर्वे नंबर 587 से 89 पी की कुल 1.05820 एलआईजी ङ्क्षलक रोड से शुरू होकर सिटी बस डिपो की दीवार जो जो स्वर्ण बाग जाने वाले रास्ते के पास है।
- सर्वे नंबर 31/2, 31/1, पार्ट 17,16,18, 30 की जमीन पर अतिक्रमण है जिसका क्षेत्रफल 1 लाख 9 हजार वर्गफीट है। पार्ट 16 की जमीन पर लगभग 36 हजार वर्गफीट जमीन से 10 जनवरी को अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन फिर हो गया। जमीन के पास अवैध भूसा मंडी है।
- सर्वे नंबर 7/9/1 पाट्र्स मुलतानी कॉलोनी मस्जिद के पास सरकारी स्कूल में मध्य है जो 10 हजार वर्गफीट की जमीन है।

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