आइडीए की जमीन के नामांतरण की कोशिश में भी जाकिर की भूमिका

आइडीए की जमीन के नामांतरण की कोशिश में भी जाकिर की भूमिका

Pawan Rathore | Publish: Sep, 04 2018 11:09:46 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

खजराना पटवारी की हैसियत से की जमावट और जांच भी

 

इंदौर।
खजराना में आइडीए की योजना की जमीन के किसी अन्य व्यक्ति के नामांतरण में भी पटवारी जाकिर हुसैन की भूमिका ही सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक जिस जमीन के नामांतरण के लिए मालिकी हक के दस्तावेजों के न होने के बाद भी आवेदन लेकर प्रक्रिया में डाल दिया गया उसकी जांच और सीमांकन हुसैन ने ही किया था।

लोकायुक्त ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में पिछले सप्ताह पटवारी हुसैन के घर छापा मारा था। इसमें काफी अघोषित और बेहिसाब संपत्ति का खुलासा हुआ। निगम के बेलदार असलम खान की तरह इसका काला चिट्ठा भी धीरे-धीरे खुलता जा रहा है। खजराना क्षेत्र में काफी सरकारी-गैर सरकारी जमीनों के नामांतरण की बात सामने आ रही है, जिसमें उसने प्रत्यक्ष भूमिका निभाई। एक बड़ा मामला अभी पेंडिंग है और इसका निपटारा करने की भी पूरी तैयारी थी। जमीन खसरा नंंबर 57/१४६५ मिन-2 की ०.१५० हेक्टेयर है।

इसके नामांतरण के लिए जब्बार खान के वारिसों ने तहसीलदार विजय नगर को आवेदन किया। आवेदन के साथ न तो ऋण पुस्तिका थी और न ही कोई और ऐसा दस्तावेज जो जमीन पर जब्बार के वारिसोंका मालिकाना हक सिद्ध करता हो। इसके बाद भी न केवल आवेदन स्वीकार किया गया, बल्कि पटवारी हुसैन ने मौका निरीक्षण और सीमांकन कर रिपोर्ट भी तैयार कर ली। जबकि यह जमीन आइडीए की योजना में शामिल है। आइडीए से इस जमीन का नामांतरण के लिए अभिमत तक मांग लिया गया।
जाकिर के कार्यकाल के सभी आदेशों की जांच

जाकिर को सस्पेंड कर दिया गया है और अब लोकायुक्त कलेक्टोरेट से उन सभी मामलों की फाइलें निकलवा रहा है, जिनसे जाकिर जुड़ा था। इसमें नामांतरण से लेकर बटांकन, सीमांकन तक के मामले हैं। दरअसल लोकायुक्त के सामने ऐसे कई मामले भी आए, जिनमें आदेश भी खुद उसी ने बना लिए थे। उसके पास से मिली कोरी ऑर्डर शीट्स से इस बात को बल मिला कि वह खुद भी ऐसे मामलों में आदेश दे देता था। इसके चलते लोकायुक्त उसके जरिए हुए सभी प्रकरणों की जांच करेगा। इसमें उन अफसरों की भूमिका भी जांची जाएगी, जिनके दस्तखत से आदेश जारी हुए थे।

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