अब भी नहीं संभले तो डायनासोर की तरह लुप्त प्रजाति हो जाएंगे मनुष्य

आईआईटी मुंबई के प्रो. डॉ. चेतनसिंह सोलंकी का व्याख्यान

By: हुसैन अली

Published: 29 Mar 2019, 02:49 PM IST

इंदौर. ऊर्जा का जिस तरह अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है, उसे देखते हुए आशंका है इंसान भी डायनासोर की तरह लुप्त प्रजाति न हो जाए। कोयले से बनी बिजली की जगह अगर हम रिन्यूएबल एनर्जी पर नहीं गए तो बहुत मुश्किल होने वाली है। यह कहना है आईआईटी मुंबई के प्रो. डॉ. चेतनसिंह सोलंकी का। वह गुरुवार को एसजीएसआइटीएस में जीजीएसवाय यानी गांधी ग्लोबल सोलर यात्रा के तहत व्याख्यान दे रहे थे। डॉ. सोलंकी का कहना है कि जिस तरह गांधी जी ने ग्राम स्वराज का नारा दिया था, उसी तरह ऊर्जा स्वराज होना चाहिए।

इस यात्रा के तहत एशिया-अफ्रीका के दस देशों के बाद अब अगले सप्ताह यूरोप जा रहे हैं। डॉ. सोलंकी बोले, कार्बन उत्सर्जन से 50 बरसों में पृथ्वी का तापमान एक डिग्री बढ़ गया है। अब भी नहीं संभले तो सदी के अंत तक तापमान चार से पांच डिग्री तक बढ़ जाएगा, जिससे मानव का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। दुनियाभर में प्रकृति का दोहन अंतिम कगार पर है। हम भी 500-600 फीट बोरिंग खोद कर पानी ले रहे हैं। वह पानी हमारा है ही नहीं, जिसे हम खींच रहे हैं। अब डिसिप्लीन में आना होगा।

हर घर, हर ग्राम खुद पैदा करे अपनी बिजली
डॉ. सोलंकी ने कहा, जिस तरह ग्राम स्वराज में हर गांव अपनी जरूरत की चीज खुद उत्पादित करता है, उसी तरह हर गांव और हर घर अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर सकता है। मैं इसी अभियान के लिए लोगों को जागरूक कर रहा हूं। यह काम मुश्किल नहीं है बल्कि आसान है। यह कोरी कल्पना नहीं बल्कि इसे हकीकत में बदलना आसान है।

हुसैन अली
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned