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सावधान! आपके बच्चे चिडि़चिड़े हो रहे हैं तो पढ़ ले ये खबर, मासूमों को बेचने चल रहा प्रयास

कोरोनाकाल में बच्चों के व्यवहार में आया बदलाव तो कई गंभीर दुष्परिणाम आ रहे सामने

इंदौर

Published: March 04, 2022 04:13:14 pm

प्रमोद मिश्रा
इंदौर. पुलिस कमिश्नर प्रणाली में शहर का भांपने के बाद अधिकारी अब अलग अलग नवाचार कर लोगों की परेशानी दूर करने का प्रयास कर रहे है। इसके तहत बच्चों की गुमशुदगी खासकर बालिकाओं, किशोरियों की गुमशुदगी कम करने के ज्यादा प्रयास किए जा रहे है। शहर में हर दिन 2 से ज्यादा बच्चियों की गुमशुदगी हो रही है। पुलिस का अपहरण का केस दर्ज करती है, हालांकि 98-99 प्रतिशत बच्चियां मिल जाती है लेकिन तब तक परिवार को परेशानी होती रहती है। इसे ध्यान में रख पुलिस बच्चियां घर न छोड़े अभियान चला रही है। आंकलन किया है कि कोरोनाकाल में बच्चे सेंसेटिव व एग्रेसिव हो रहे है। किसी की बात नहीं सुनते, छोटी बातों पर विश््वास कर लेते है। उनका फायदा उठाकर दूसरे लोग बरगला लेते है, सोशल मीडिया भी इसका एक बड़ा कारण बन रहा है।
सावधान! आपके बच्चे चिडि़चिड़े हो रहे हैं तो पढ़ ले ये खबर, मासूमों को बेचने चल रहा प्रयास
सावधान! आपके बच्चे चिडि़चिड़े हो रहे हैं तो पढ़ ले ये खबर, मासूमों को बेचने चल रहा प्रयास
पुलिस के जोन 4 में इन दिनों बच्चों खासकर बालिकाओं-किशोरियों की काउंसलिंग का अभियान शुरू हुआ है। डीसीपी राजेशकुमार सिंह, एडिशनल डीसीपी प्रशांत चौबे , एएसपी एसकेएस तोमर की टीम गुमशुदगी के मामले कम करने में लगी है, इसलिए ऑफिस से निकलकर बस्तियों, मोहल्लों में जाकर बात की जा रही है। पालक व बच्चों से अधिकारी व उनकी टीम सीधी बात कर रहे है। अभियान का नाम दिया है, घर छोड़कर न जाओ। डीसीपी के मुताबिक, बच्चे छोटी छोटी बातों पर बिफर जाते है, घर से चले जाते है, दूसरी को झांसे मेें फंस जाते है।
गुमशुदगी के पीछे मुख्य कारण
- जल्दबाजी अथवा बहकावे में बच्चियां घर छोडऩे का फैसला ले लेते हूं।

- कुछ मामलों में अपराध का शिकार होती है तो अधिकांश मामलों मे ंदूसरे लोग उनकी बाल पन का फायदा उठा लेते है।
अपराध में नंबर दो पर बच्चों की गुमशुदगी का मामला इसलिए शुरू किया अभियान

पुलिस के पास आने वाली शिकायतों में दूसरे नंबर पर गुमशुदगी खासकर बच्चियों से जुड़ी गुमशुदगी होती है। डीसीपी के मुताबिक, पहले नंबर पर जमीन व धोखाधड़ी के अपराध तो दूसरे नंबर पर गुमशुदगी है जिसमें पुलिस अपहरण का केस दर्ज करती है। महिला अधिकारी, सब इंस्पेक्टर के नेतृत्व में स्पेशल विंग बनी है। क्षेत्र की आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को भी साथ लिया है। इन लोगों को इलाके के घर घर तक संपर्क का फायदा हो रहा है।
इन क्षेत्रों से समझाइश की शुरुआत
थाना द्वारकापुरी, छत्रीपुरा, जूनीइंदौर व रावजीबाजार

ऑनलाइन फ्रेंड अथवा शादी का झांसी में न आए, यह कानून गलत है

पुलिस ने पिछले तीन साल में बच्चियों के अपहरण के मामलों की समीक्षा की है। कई मामलों में ऑनलाइन दोस्त की झांसे में आकर 16 से 18 साल के मध्य घर से चली जाती है और अपराध का शिकार हो जाती है।
इस तरह कर रहे काउंसलिंग
- बच्चियों को समझाया जा रहा है कि वचुर्अल वल्र्ड में धोखा ज्यादा है, सच्चाई कम इसलिए ऐसे झांसे में न आए।
- झांसे में लेकर बच्चों को बेचने, भीख मंगवाने जैसा काम होता है।
- कई बार योजनाबद्ध तरीके से उन्हें शादी का झांसा दिया जाता है। बच्चों को कानूनी पक्ष समझ रहे है ताकि वे शादी का झांसे में पडे।
- 18 साल के कम उम्र में शादी अनैतिक व शून््य होती है।
- इमोशनल एंगल से समझाया जा रहा है कि एक छोटा से फैसला खुद के साथ माता-पिता के सपनो को खत्म कर देता है।
- अगर कोई बरगलाए, झांसा दे तो अपनी मां व परिवार के दूसरे सदस्य से साझा करें, जरूरत लगे तो पुलिस के पास आए। सभी मदद करेंगे।
गुमशुदगी व बरामदी में इंदौर प्रदेश में आगे

छोटे बच्चों के लापता होने तथा बरामद होने दोनों के मामलंोंं में इंदौर प्रदेश में अन्य जिले में आगे है। वर्ष 2021 में इंदौर में कुल 952 बच्चे लापता हुए और बरामदी 1003 की हुई। पिछले सालों में खोए बच्चे भी इस दौरान मिले।
जिला बरामदगी
इंदौर 1003

भोपाल 639
जबलपुर 549

धार 546
सागर 533

वर्ष 2021 की स्थिति

गुम बालक गुम बालिका कुल
186 766 952

कोरोना काल में बच्चे एग्रेसिंव हुए

साइकोलाजिकिल काउंसलर माया वोहरा के मुताबिक, बच्चे कोरोनाकाल में ज्यादा सेसेंटिव व एग्रेसिव हुए है। आज ही एक केस आया जिसमें परिजन बालक को लेकर आए थे। लगातार घर में रहने से यह स्थिति बनी है। इसलिए छोटी बातों पर विवाद, चिढ़चिढ़ापन बढ़ रहा है। ऐसे में मोरल पुलिसिंग की जरुरत है, पालकों को बच्चों को समय देना होगा, उनकी बातों को समझना होगा।

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