पेंटिंग ऐसी कि दीवार में दिखे दरवाजा, पास जाएं तो दिखे दीवार ही है

Indore News : फोर डी पेंटिंग से क्रिएट हो रहा इल्यूजन, फोर डी पेंटिंग से इंटीरियर डिजाइनिंग में हो रहा इनोवेशन

इंदौर. किसी ड्राइंग रूम में आप जाएं और एक दीवार में महसूस हो कि वहां कोई दरवाजा या विंडो है, लेकिन पास जाकर पता चले कि यह तो दीवार ही है। कुछ इस तरह की डिजाइनिंग कंसेप्ट इंटीरियर को बहुत अलग तरह का लुक देतीे हैं। इस तरह के कॉन्सेप्ट पर शहर में काम हो रहा है। हालंकि अभी यह शुरुआती दौर में ही है। इस कॉन्सेप्ट में आर्ट और डिजाइनिंग का परफैक्ट बैलेंस जरूरी है।
गवर्नमेंट फाइन आर्ट कॉलेज के पूर्व छात्र धीरेन्द्र मांडगे पिछले कुछ बरसों से थ्रीडी पेंटिंग्स पर काम कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने इससे भी आगे बढक़र फोर डी पेंटिंग्स बनाई हैं। इनका इस्तेमाल इंटीरियर डिजाइनिंग में हुआ है। उनके इस आर्ट को डिजाइनिंग में यूज किया है इंटीरियर डिजाइनर मिलिंद बारगल ने।
मिलिंद बारगल ने इस कॉन्सेप्ट को सबसे पहले अपने ही ऑफिस में इस्तेमाल किया। वे बताते हैं, मेरे ऑफिस में एक कॉर्नर एेसा था जो खाली था और बड़ा अजीब लग रहा था। इस कॉर्नर की गहराई करीब दो फीट थी और दोनों साइड की दीवारों पर तीन-तीन फीट जगह थी। इस जगह पर ही फोर डी पेंटिंग बनाई। इसमें रस्टिक लुक में महराबे हैं। इसमें दो फीट की गहराई को 25 फीट का दिखाने के लिए एक मेहराब प्लाई से बनाई। प्लाई और दीवार के बीच की कुछ इंच जगह पर ऊपर लाइट लगाई जो बाहर से दिखती नहीं है, लेकिन पूरी पेंटिंग पर इससे उजाला हो जाता है।
लाइट एंड शेड और ज्योमेट्रि का इस्तेमाल
आटिस्ट धीरेंद्र मांडगे कहते हैं, इस तरह की पेंटिंग में कलर्स के इस्तेमाल में लाइट एंड शेड का इस तरह यूज किया जाता है जिससे नेचुरल लुक आए। पास की मेहराब पर ज्यादा लाइट और दूर की मेहराब पर कम लाइट रंगों के शेड के जरिए दिखाई जाती है। मेहराबों, और पिलर्स के बीच सही डेफ्थ दिखाने के लिए ज्योमेट्री का भी थोड़ा ज्ञान होना चाहिए, ताकि मेहराबें सही अनुपात में दिखें और शेष काम पेंटिंग के कौशल का है।

पेंटिंग ऐसी कि दीवार में दिखे दरवाजा , पास जाएं तो दिखे दीवार ही है

ऑफिस, लॉबी, ड्रॉइंग रूम में इस्तेमाल
मिलिंद ने बताया, इसे कॉन्सेप्ट को वहां इस्तेमाल किया जाता है, जहां डेड एंड है। डेड एंड को इसके जरिए लाइव बनाया जाता है। हमने इसे अपने ऑफिस के बाद एक बंगले के ड्रॉइंग रूम में भी यूज किया। दरअसल उस बंगले में ड्रॉइंग रूम में एक खिडक़ी थी जो बंद कर दी गई थी, इसलिए वह दीवार ठीक नहीं लग रही थी। वहां हमने दरवाजे की आकृति की फोर डी पेंटिंग बनाई। करीब दो फीट के खांचे में हमने पहले प्लाई से दो सीढि़यां बनाई और तीसरी सीढ़ी पेंटिंग से बनाई। तीनों सीढि़यां इस तरह से मर्ज हो गईं कि कई बार घर में आने वाले उसे असली का दरवाजा ही समझ बैठते हैं। इसी तरह एक और बंगले में छत पर बनी लॉबी में इल्यूजन पेंटिंग बनाई जहां छत आधी कवर्ड थी।

राजेश मिश्रा
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