नदी, तालाबों में हुआ माता की मूर्तियों का विसर्जन

नदी, तालाबों में हुआ माता की मूर्तियों का विसर्जन
नदी, तालाबों में हुआ माता की मूर्तियों का विसर्जन

Mohit Panchal | Publish: Oct, 09 2019 10:50:34 AM (IST) | Updated: Oct, 09 2019 10:50:35 AM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

गणेशोत्सव जैसी प्रशासन, पुलिस और निगम की सख्ती नजर नहीं आई, नगर निगम ने नहीं की कोई व्यवस्था

इंदौर। जल प्रदूषण को रोकने के लिए गणेशोत्सव में प्रशासन और नगर निगम की सख्ती नवरात्रि में नदारद नजर आई। घर और सार्वजनिक पंडालों में स्थापित पीओपी से बनी माताजी की प्रतिमाओं को बड़े पैमाने पर शहर के आसपास नदी-तालाबों में ही विसर्जित किया गया। कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था। यहां तक कि भोपाल हादसे से भी इंदौर पुलिस ने सबक नहीं लिया।

हिंदू मान्यताओं के हिसाब से देव प्रतिमा को जलमग्न करके विसर्जन किया जाता है। इसके चलते श्रद्धालू कुआं, बावड़ी, नदी और तालाबों में प्रतिमा विसर्जित करते हैं, लेकिन जल प्रदूषण को देखते हुए जिला सरकार ने गणेशोत्सव पर सख्ती कर रखी थी, लेकिन नवरात्रि में वह नजर नहीं आई। बड़ी संख्या में लोग माता प्रतिमाओं को लेकर तालाबों व नदी में विसर्जन करने पहुंचे।

शिप्रा, गंभीर और नर्मदा नदी में सार्वजनिक गरबा मंडल के लोग माता लेकर पहुंचे। बकायदा विधि विधान से उन्हें पानी में विसर्जित किया गया। इधर, आम जनता जिन्होंने घरों में माता को स्थापित किया था, वे तालाब में प्रतिमा व जवारों को विसर्जित करते नजर आए। चौंकाने वाली बात ये है कि किसी ने उन्हें रोका-टोका भी नहीं। निगम की टीम भी कहीं नजर नहीं आई।

तालाब पर लगा लेते काउंटर
गणेशोत्सव में निगम ने विकल्प के तौर पर १०० अस्थाई कुंड बनाए थे, जिसमें ११ नदियों का जल रखा गया ताकि आस्था को ठेस नहीं पहुंचे और परंपरा का विधिवत् निर्वाह भी हो जाए। लाखों की संख्या में गणेश प्रतिमा इक_ी करके जवाहर टेकरी पर विधि विधान से पूजा करके विसर्जित किया गया।

इसी प्रकार नवरात्रि में दस काउंटर शहर में और तालाबों के किनारे भी लगा दिए जाते तो पीओपी की प्रतिमाओं को तालाब में छोड़े जाने से रोका जा सकता था। इसके लिए निगम ने कोई कार्ययोजना भी नहीं बनाई, तो प्रशासन की तरफ से कोई आदेश भी जारी नहीं किया गया।

पुलिस को हादसों का इंतजार
भोपाल में गणेशोत्सव के दौरान प्रतिमा ठंडी करने के दौरान एक हादसा हो गया था। ११ युवकों की डूबने से मौत हो गई थी, जिसको देखकर इंदौर की पुलिस ने सबक नहीं लिया। किसी भी तालाब में पुलिस प्रबंध नहीं किया गया था। बेरोक-टोक आ जा रहे थे और प्रतिमा विसर्जित कर रहे थे। गंभीर नदी में लोग माताजी को विसर्जन करने के साथ ही निर्माल्य भी प्रवाहित कर रहे थे, वहीं स्नान भी कर रहे थे।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned