जवाहर मार्ग का बिगड़ा ट्रैफिक निकाल रहा दम

नगर निगम ने कहीं सिग्नल निकाले, कहीं उखाड़े

इंदौर . नगर निगम और पुलिस की अनेदखी से शहर के ट्रैफिक का हाल बुरा हो रहा है। पूरे जवाहर मार्ग पर दिन भर कई बार जाम की स्थिति बनती है। इन दिनों यहां के ट्रैफिक का हाल कुछ ज्यादा ही खराब है। पहले जवाहर मार्ग के तीन चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे थे, लेकिन अब नहीं हैं। इससे ट्रैफिक गुत्थमगुत्था हो रहा है। निगम व पुलिस के जिम्मेदारों का इसकी जानकारी तक नहीं है।

श हर के कई ऐसे चौराहे हैं, जहां पर ट्रैफिक सिग्नल लगना है। निगम ऐसे चौराहों पर सिग्नल लगवा तो नहीं पा रहा है, बल्कि जहां लगे हुए हैं, उन्हें निकालने में लगा है। मालगंज चौराहे के सिग्नल सडक़ निर्माण के दौरान उखाड़ दिए गए थे, वहीं नृसिंह बाजार और सैफी होटल चौराहा के सिग्नल निगम ने निकाल दिए हैं। इससे अब रोजाना यहां जाम की स्थिति बनती है।

जवाहर मार्ग के तीनों ट्रैफिक सिग्नल निकालने की जानकारी नहीं है। पता करवाता हूं, सिग्नल क्यों निकाले गए है। क्षतिग्रस्त टै्रफिक संसाधन दे रहे दुर्घटना को न्योता
शहर की सडक़ों पर नगर निगम और पुलिस ने स्टॉपर और ट्रैफिक रिफ्लेक्टर लगा रखे हैं, लेकिन देखने में आता है कि जगह-जगह ऐसे संसाधन टूटे हुए पड़े हैं। बीच सडक़ में इनके मुहाने निकले रहते हैं। कई जगह ये टूटकर नीचे पड़े हुए हैं। ऐसे में वाहन चालक इनसे टकरा सकते हैं। पुलिस और निगम दोनों ही टूटे संसाधनों को सडक़ से हटाना मुनासिब नहीं समझते हैं। समय रहते अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

तीनों चौराहें पर सिग्नल नहीं होने से दिन में कई बार वाहन भिड़तेे हैं व जाम लगता है। लोग भी परेशान हो रहे हैं, लेकिन पुलिस और निगम के जिम्मेदारों को इसका इल्म ही नहीं है। यातायात के मामले में अधिकांश देखा गया है कि निगम और ट्रैफिक पुलिस में आपस में समन्वय नहीं होता है, इसीलिए सडक़ों पर यातायात का कुप्रबंधन नजर आता है और इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।

पुलिसकर्मी भी नदारद
तीनों चौराहों पर पुलिसकर्मी भी नहीं होते हैं। अगर कभी होते भी हैं तो साइड में खड़े रहते हैं। वाहन चालक गुत्थम-गुत्था होते रहते हैं। गाडिय़ां आपस में टकराती हैं और कई बार नौबत मारपीट तक आ जाती है। इन चौराहों से शहर के मुख्य व्यापारिक क्षेत्र जुड़े होने से वाहनों का दबाव अधिक होता है। लापरवाही का यह आलम महीनों से जारी है, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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