बेटी की ख्वाहिश है इंडियन आइडल बनना, ऑडिशन के लिए गोद में उठाकर लाए पिता

बेटी की ख्वाहिश है इंडियन आइडल बनना, ऑडिशन के लिए गोद में उठाकर लाए पिता

इंदौर . सुबह 4 बजे से लोग लाइन में लगना शुरू हो गए थे। कोई मीलों का फासला तय करके आया था तो किसी ने अपना नंबर आने के लिए घंटों इंतजार किया।

इनकी आंखों में सपने और उम्मीद थी कि उनकी आवाज का जादू जजेस पर चलेगा। दो हजार लोगों की भीड़ बुधवार को स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल में चल रहे इंडियन आइडल सीजन-10 के ऑडिशन में देखने को मिली।

इंदौर के अलावा सतना, रीवा, जबलपुर, भोपाल, ग्वालियर, मुरैना के साथ महाराष्ट्र और पुणे से भी कंटेस्टेंट ऑडिशन के लिए आए थे। ऑडिशन के दो राउंड हुए। जज के रूप में सारेगामा 2016के विनर सचिन वाल्मीकि और शेखर शिवलंकी थे। ऑडिशन सुबह 8 बजे से शुरू हुए।

श्रेया घोषाल जैसा बनना है
ऑडिशन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हुए जो जीने का हौसला और आगे बढऩे की ताकत देते हैं। १७ साल की बेटी को पिता गोदी में लिए घूम रहे थे। 17 साल की सतना की भारती सिंह के हाथ और पैर बिल्कुल काम नहीं करते। एक से दूसरी जगह जाने के लिए भी मदद चाहिए होती है, लेकिन उनका हौसला कम नहीं था।

पिता प्रदीप सिंह ने बताया कि भारती बचपन से ही दिव्यांग है। सुबह 6 बजे से वह इंतजार में थी और अब 3 बजे नंबर आया है। भारती हर दिन चार घंटे से ज्यादा रियाज करती है और श्रेया घोषाल की तरह बनना चाहती है। भारती ने कहा कि जब मुझे जज किया जाए तो उसका आधार मेरी काबिलियत हो। भारती गाने के साथ पेंटिंग भी करती हैं और लिखने का भी शौक रखती हैं।

बिना नजरों के बुने ख्वाब
भोपाल से आई हुदा सिद्दिकी देख नहीं सकती है, लेकिन संगीत से उनका गहरा नाता है। हुदा अपनी बड़ी बहन के साथ ऑडिशन के लिए आई थी। बहन जुबिया सिद्दिकी बताती हैं कि हुदा प्रीमैच्योर बेबी है और उसे बचपन से ही दिखाई नहीं देता है।

हुदा तबला और पियानो बजाती है और गिटार बजाना सीख रही है। वह नेहा कक्कर की तरह बनना चाहती है। हुदा ने फस्र्ट राउंड क्लियर किया, लेकिन सेकंड राउंड में बाहर हो गाई। इस पर हुदा का कहना था कि मैं फिर से बेहतर तैयारी के साथ ऑडिशन दूंगी।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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