scriptIndore Cancer Foundation created Cancer Sanket mobile app | लॉकडाउन में मुश्किल हो गया कैंसर मरीजों का परीक्षण, इस ऐप के माध्यम से इलाज को किया आसान | Patrika News

लॉकडाउन में मुश्किल हो गया कैंसर मरीजों का परीक्षण, इस ऐप के माध्यम से इलाज को किया आसान

इंदौर कैंसर फाउंडेशन के मोबाइल एेप के जरिए हजारों लोगों तक पहुंच रही कैंसर परीक्षण की जानकारी।

इंदौर

Published: February 24, 2022 01:10:47 am

इंदौर. कोरोना त्रासदी का खमियाजा सिर्फ संक्रमितों को ही नहीं, बल्कि उन लोगों को भी भुगतना पड़ा जो पहले से गंभीर रोगों से पीडि़त थे। कोरोना के कारण पिछले २ साल में लगे दो लॉकडाउन से कैंसर जैसी जटिल बीमारी के रोगियों के लिए नियमित डॉक्टरी जांच और परामर्श मुश्किल हो गया था। न डॉक्टर मरीजों से मिल पा रहे थे, न ही उनका ठीक से उपचार हो रहा था। ऐसे में इंदौर कैंसर फांउडेशन के नवाचार ने दूरदराज के रोगियों को ढूंढऩा आसान हो गया, जो अस्पताल की जद से दूर थे।
लॉकडाउन में मुश्किल हो गया कैंसर मरीजों का परीक्षण, इस ऐप के माध्यम से इलाज को किया आसान
लॉकडाउन में मुश्किल हो गया कैंसर मरीजों का परीक्षण, इस ऐप के माध्यम से इलाज को किया आसान
10 हजार से ज्यादा लोगों तक बनाई पहुंच
इंदौर कैंसर फाउंडेशन ने कैंसर संकेत मोबाइल ऐप के जरिए अब तक 10 हजार पीडि़तों तक पहुंच बनाई है। इतना ही नहीं, ऐप से स्वपरीक्षण के बाद कई लोगों ने अस्पताल पहुंचकर उपचार लेना भी शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि स्वपरीक्षण के बाद जिन लोगों को खुद में ही कैंसर के प्रारंभिक लक्षण दिखाई दिए, उन्होंने तुरंत एेप की मदद से ही डॉक्टरी परामर्श लिया। मरीजों में कई अन्य राज्यों के लोग भी हैं। इन भी लोगों ने पहले अपना स्वपरीक्षण किया और फिर कैंसर के लक्षण नजर आने पर तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क किया।
टेलीमेडिसिन से 10 हजार से ज्यादा का इलाज
इंदौर कैंसर फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. दिग्पाल धारकर का कहना है, लॉकडाउन और संक्रमण सभी लोगों के साथ कैंसर रोगियों के लिए घातक साबित हुआ। लेकिन, हमने इसे चुनौती मानते हुए पिछले वर्ष जून माह में ही कैंसर संकेत नाम से मोबाइल एेप लॉन्च किया। इस एेप के माध्यम से अब तक करीब 10 हजार से ज्यादा लोग हमसेसंपर्क कर चुके हैं। हमने उन्हें टेलीमेडिसिन के माध्यम से उपचार दिया है।
455 लोगों तक पहुंचाया कैंसर संकेत
वन विभाग के सीसीएफ एचएस मोहंता का कहना है, विश्व कैंसर दिवस के उपलक्ष्य में वन विभाग के कर्मचारियों के जरिए सुदूर गांवों में रहने वाले लोगों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की पहचान, रोकथाम व इलाज के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान इंदौर ही नहीं, बल्कि धार, अलीराजपुर, झाबुआ, खंडवा, बुरहानपुर, सेंधवा, खरगौन, बड़वानी, बड़वाह, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर जैसे 16 वन मंडलों के 1022 कर्मचारियों के साथ ही 455 आम लोगों ने कैंसर संकेत को अपने मोबाइल में डाउनलोड किया।
10 भाषाओं में 5 तरह का कैंसर और 8 सवाल
कैंसर संकेत मोबाइल एेप में कैंसर की इन बीमारियों के बोर में पूरी जानकारी दी गई है। एेप खोलने पर सबसे पहले 10 भाषा के विकल्प सामने आ जाते हैं। इनमें हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मराठी, गुजराती, बांग्ला सहित दक्षिण भारत की 4 भाषाएं शामिल की गई हैं। भाषा चुनने के बाद इस एप्लिेकशन को बनाने के उद्देश्य और उसकी उपयोगिता के बारे में बताया गया है। इसके बाद मुंह व गले का कैंसर, बच्चेदानी के निचले भाग (ग्रीवा) कैंसर, फेफड़े का कैंसर, बड़ी आंत का कैंसर या कोलन कैंसर, स्तन कैंसर के बारे में 3 से 8 सवाल होते हैं, जिनके उत्तर देने पर बीमारी की प्राथमिक जांच खुद ही की जा सकती है।

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