छोटे दवा उद्योगों के लिए बनेगा एडवाइजरी बोर्ड

छोटे दवा उद्योगों के लिए बनेगा एडवाइजरी बोर्ड

Arjun Richhariya | Publish: Mar, 11 2018 03:44:41 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने दिया आश्वासन

इंदौर. प्रदेश के छोटे दवा उद्योगों के लिए अब एक एडवाइजरी बोर्ड बनेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दवा उद्योगों की समस्याओं को लेकर पहुंची लघु उद्योग भारती की टीम को आश्वासन दिया कि बोर्ड बेहतरी के लिए काम करेगा।

इसमें लघु उद्योग भारती के साथ दवा उद्योगोंं के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा।
लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता, सचिव तोषणीवाल के साथ इंदौर उपाध्यक्ष व स्मॉल स्केल ड्रग मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन के मानद सचिव अमित चावला ने दिल्ली जाकर नड्डा के साथ ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया से दवा उद्योगोंं की समस्याओं को लेकर चर्चा की।

मंत्री के सामने तथ्य रखे कि गलत नीतियों के चलते प्रदेश का दवा उद्योग बंद होने की कगार पर है। प्रदेश में दवा निर्माण का लाइसेंस केवल उन्हीं को मिलता है, जिनकी लिस्ट डीसीजेआई की लिस्ट में है, जबकि अन्य प्रदेशों में निर्माता द्वारा चाही गई दवा के निर्माण की अनुमति भी मिलती है। इस विसंगति को दूर करना चाहिए। मंत्री ने एडवाइजरी बोर्ड के गठन की बात की। नकली दवा निर्माण पर सख्ती से रोक लगाने, अच्छी गुणवत्ता की दवाओं के निर्माण के लिए कानून में बदलाव, ड्रग कंट्रोलर की गाइड लाइन को ड्रग एवं कॉस्मेटिक एक्ट में शामिल करने और ड्रग कंट्रोल प्राइस ऑर्डर की विसंगतियों को भी दूर करने का आश्वासन दिया।

लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष महेश गुप्ता ने बताया कि बैठक से प्रदेश के दवा उद्योग को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ लघु दवा उद्योग निर्माताओं की एक बैठक भी होगी, जिसकी सहमति भी मंत्री ने दे दी है।

अब समितियों की देखरेख में चलेंगी स्कूल बसें
डीपीएस बस हादसा : शिक्षा विभाग को मिली गठन की जिम्मेदारी समिति में पालकों को भी करेंगे शामिलजनवरी में हुए डीपीएस बस हादसे में चार मासूमों की जिंदगी चली गई थी। इसके तीन दिन बाद ही यानी ८ जनवरी को मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान ने स्कूल बसों को लेकर कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें से कुछ को तत्काल अमल में लाया गया तो कुछ के लिए अब निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एक निर्देश जारी किया है। इसमें शैक्षणिक संस्थाओं के वाहनों के सुरक्षित संचालन के लिए समिति बनाने के लिए कहा गया है। इस समिति में पालकों को भी जोड़ा जाएगा। समिति परिवहन विभाग के साथ मिलकर अपनी संस्था के वाहन चालकों को ट्रेनिंग दिलवाएगी। समय-समय पर ड्राइविंग टेस्ट भी दिलवाएगी।

रखना होगी निगरानी...
इस समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह यह तय करे कि बस बच्चों को स्कूल गेट पर न उतारते हुए अंदर परिसर में लेकर जाए। स्कूल वाहन में क्षमता से अधिक बच्चों को न बैठाया जाए। हर सीट पर बेल्ट लगा हो। ड्राइवर भी सीट बेल्ट लगाकर वाहन चलाएं। समिति के पास स्कूल द्वारा संचालित बसों की संपूर्ण जानकारी होना चाहिए।

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