वाइव्स का दिल जीतने हसबैंड बने मास्टर शेफ

दिगंबर जैन सोशल ग्रुप ब्रिलियंट द्वारा ‘ब्रिलियंट मास्टर शेफ कुकरी ’ कार्यक्रम

इंदौर. ऐसा कहा जाता है कि पति के दिल का रास्ता पेट से होकर जाता है, इसीलिए वाइव्स को अच्छी कुकिंग की सलाह दी जाती है, लेकिन दिगंबर जैन सोशल ग्रुप ब्रिलियंट द्वारा आयोजित ब्रिलिंयट मास्टर शेफ कुकरी में कुछ अलग नजारा दिखा। रविवार को आदिनाथ बाग में ब्रिलियंट मास्टर शेफ (मेल कुकरी) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें ग्रुप के सभी मेल मेंबर्स ने अपनी फैमिली के लिए कुकिंग की। यहां हसबैंड ने अपनी वाइफ और फैमिली का दिल जीतने के लिए तरह-तरह के लजीज व्यंजन तैयार किए। ग्रुप के ११० मेल मेंबर्स ने अपनी फैमिली के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाए।

देसी ढाबा, महिला सशक्तिकरण जैसी थीम पर सजे स्टॉल्स : कार्यक्रम का आकर्षण थी अलग-अलग राज्यों की थीम पर सजे स्टॉल्स। किसी ने अपने स्टॉल में गुजराती रंग सजाए तो कहीं पंजाब की मस्ती देखने को मिली। पार्टिसिपेंट्स ने देसी ढाबा, राजस्थानी स्टाइल, महिला सशक्तिकरण, ब्लैक, ब्लैक एंड रेड, सतरंगी, तिरंगा, तोतला शेफ जैसी अलग-अलग थीम पर स्टॉल्स डेकोरेट किए।

कार्यक्रम में प्रत्येक टीम द्वारा बनाए गए व्यंजन के आधार पर उनकी टीम के साथ फीमेल मेंबर्स के सामने अपनी डिशेज को प्रमोट करना था, जिसका ग्रुप के सभी मेंबर्स ने आनंद लिया। कार्यक्रम में विधायक महेंद्र हार्डिया, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन प्रमुख प्रदीप कासलीवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष हंसमुख गांधी उपस्थित थे। अध्यक्षता ग्रुप परिवार अध्यक्ष कमल बिलाला ने की। आभार अतुल बाकलीवाला ने माना।

‘अघोरी कोई पंथ नहीं बल्कि पथ है’
अघोरी पुस्तक के लेखक मनोज ठक्कर व जयेश राजपाल का वडोदरा में बड़ौदा सिटी क्लब द्वारा आयोजित पुस्तक व्याख्यान कार्यक्रम में सम्मान किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी पूंजी है हमारे शास्त्र। शास्त्र उपेक्षित हो रहे हैं और युवा वर्ग का इसके प्रति ध्यान नहीं है। इसलिए ऐसा न हो कि हमारी शास्त्र रूपी पूंजी हमसे खो जाए।

अपनी पुस्तक अघोरी के बारे में उन्होंने बताया कि अघोर के बारे में जितनी भ्रांतियां है, शायद ही किसी ओर के बारे में हो। अघोरी कोई पंथ नहीं बल्कि एक पथ है जो सहज चलते हुए ही पार किया जा सकता है। श्मशान का महत्व मात्र अघोरी के लिए मृत्यु के भय को दूर करने के लिए होता है। ईसाई, यहूदी और सूफी महात्माओं ने भी इस पथ पर चलकर गंतव्य को प्राप्त किया।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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