‘अगर डरते हो तो मत करो और करते हो तो मत डरो’

वैष्णव विद्यापीठ यूनिवर्सिटी के इंडक्शन प्रोग्राम अभिनंदन 2018 का आगाज, राजदूत डॉ. दीपक वोहरा ने कहा- ‘अगर डरते हो तो मत करो और करते हो तो मत डरो’

By: amit mandloi

Updated: 24 Jul 2018, 11:14 AM IST

इंदौर. श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय का तीन दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम अभिनंदन 2018 सोमवार से शुरू हुआ। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. दीपक वोहरा, स्पेशल एडवाइजर, पीएमओ, लेसोथो एंड गुनिया बीसेउ ने कहा, १९७२-७३ में तीन बॉलीवुड फिल्मों में भी मैंने काम किया जो सुपरफ्लॉप रहीं। एक्टर के तौर पर फेल हुआ, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मुझमें काबिलियत नहीं थी, बल्कि कुदरत मुझे किसी दूसरे रास्ते पर भेज रही थी।

मैंने उस असफलता को स्वीकार किया और आगे बढ़ता गया। जब मैं छोटा था तो मेरी मां ने मेरे पीछे बाइबल की कुछ लैटिन पंक्तियां गुदवाई थीं, जिसका मतलब था, भले ही सब, बाकी मैं नहीं। भले ही सब धोखा दे रहे हैं मैं नहीं... भले ही सब भ्रष्ट हैं, मैं नहीं... ये सबक मेरी मां ने मुझे बचपन में दिया था। चंगेजखान को मैं तानाशाह नहीं बड़ा लड़ाकू समझता हूं। यूरोप के दरवाजे तक चला गया। उसने एक बात कही थी- ‘अगर डरते हो तो मत करो और करते हो तो मत डरो।’

मानसिकता के कारण हम आज भी गुलाम
उन्होंने कहा, हेनिबल ने २२०० साल पहले उत्तरी अफ्रीका पर राज किया था। उसने सेनापति के मना करने के बावजूद पहाड़ों के ऊपर हाथियों को चढ़ाकर रोम पर हमला किया। कहता था- रास्ता ढूंढना या फिर बनाना पड़ता है।
उन्होंने कहा, हम आज भी गरीब क्यों हैं। अमरीका, यूरोप, फ्रांस जैसे देश के लोगों में बहुत आत्मविश्वास होता है, लेकिन हमारे पास नहीं है। इसका कारण साफ है। कोई भी देश गुलाम रहा हो तो उसे तीन पीढिय़ां चाहिए होती हैं आत्मविश्वास लाने के लिए। मेरे दादा, पिता और मेरी पीढ़ी की सोच में अंतर आया है। लेकिन अब चौथी पीढ़ी स्टूडेंट्स की है, जो हमारी भारत मां को वापस पुराना सम्मान लौटाएंगी, क्योंकि उनके कंधों पर किसी प्रकार का कॉलोनियर बोझ नहीं है। जो हमारे ऊपर था।

इंडिया में थ्योरी ज्यादा, अमरीका में प्रैक्टिकल
विशेष आतिथि सेंट क्लाउड स्टेट यूनिवर्सिटी, अमरीका के प्रोफेसर डॉ. केंथ मिलर ने बताया, इंडिया के एजुकेशन सिस्टम में थ्योरी ज्यादा है, लेकिन अमरीकी कॉलेज में प्रैक्टिकल ज्यादा होते हैं। वहां ९० फीसदी मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को जॉब मिल जाती है। कार्यक्रम में विवि चांसलर, पुरुषोत्तम दास पसारी, श्री वैष्णव ट्रस्ट के मानद सचिव कमल नारायण भुराडिय़ा, डॉक्टरेट स्टडीज एंड रिसर्च डीन डॉ. संतोष धर, पूर्व प्राचार्य डॉ. वीएन वालिवडीकर, समन्वयक डॉ. आनंद राजवत मौजूद थे।

मां बोली- बेटा नहीं है, उसका मेडल सीने से लगाकर रखूंगी
कार्यक्रम में विवि के पूर्व मेधावी स्टूडेंट्स व उनके पैरेंट्स को सम्मानित किया गया। इसमें २००९ बैच के टॉपर आदित्य सुप्रेकर का नाम भी लिया गया, जिनका निधन 2013 में एक ट्रेन दुर्घटना में हुआ था। स्टेज पर पहुंची मां नीता, पिता शशिकांत और बहन अंजलि की आंखों से मेडल लेते वक्त लगातार आंसू निकल रहे थे। मंचासीन अतिथियों ने उन्हें ढाढस बंधाया। मां ने कहा, अब बेटा तो नहीं रहा, लेकिन उसका मेडल हमेशा अपने सीने से लगाकर रखूंगी।

प्लानिंग सीखें, हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है : कुलाधिपति धर
विवि कुलाधिपति डॉ. उपिंदर धर ने न्यू स्टूडेंट्स को सक्सेस मंत्रा दिए। उन्होंने कहा, हार्डवर्क का कोई विकल्प नहीं होता है। ऑर्गनाइज होने के लिए प्लानिंग करना सीखें लक्ष्य निर्धारित करें लेकिन ये रियलिस्टिक होने चाहिए। हर काम का एक्शन प्लान बनाएं। असफलता से निराश नहीं हों। हमेशा नैतिकता बनी रहे। पॉजीटिव एटीट्यूड रखें। सवाल पूछने की आदत डालें। पर्यावरण और समाज के प्रति संवेदनशीलता बनी रहनी चाहिए। हर काम करने के लिए एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। आखिरी में हमें कृतज्ञ बनना होगा।

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