Election 2018 : बड़े नेताओं के दखल ने बिगाड़े इंदौर- 5 नंबर और राऊ के समीकरण

Election 2018 : बड़े नेताओं के दखल ने बिगाड़े इंदौर- 5 नंबर और राऊ के समीकरण

Amit S. Mandloi | Publish: Sep, 07 2018 11:56:26 AM (IST) | Updated: Sep, 07 2018 12:25:35 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

इंदौर-5 और राऊ विधानसभा सीटें इंदौर की उन सीटों में शामिल हैं, जिनमें कई हिस्सों का मिजाज जुदा-जुदा है।

इंदौर. इंदौर-5 और राऊ विधानसभा सीटें इंदौर की उन सीटों में शामिल हैं, जिनमें कई हिस्सों का मिजाज जुदा-जुदा है। इस बार ये दोनों ही सीटें भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। इंदौर-5 में जहां कांग्रेस में अंदरूनी कलह ज्यादा है, वहीं भाजपा में भी कलह साफ दिखती है। राऊ के विधायक कांग्रेस के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष हैं, जिसके चलते भाजपा उन्हें हराने के लिए अलग रणनीति पर काम कर रही है। राऊ से भाजपा के कई बड़े नेताओं के नाम चल रहे हैं, जिससे सीट के समीकरण उलझ गए हैं। कांग्रेस वर्तमान विधायक पर ही दांव खेल सकती है।

इंदौर-5 : टिकट के लिए आपाधापी

शहर की पॉश कॉलोनियों सहित अल्पसंख्यक बहुलता और अवैध कॉलोनियों वाली इंदौर-5 पर तीन बार से भाजपा के प्रत्याशी महेंद्र हार्डिया जीतते आ रहे हैं। इस बार भी हार्डिया ही यहां से ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस में यहां बड़ी संख्या में दावेदार हैं। इस कारण टिकट को लेकर अंतद्र्वंद्व की स्थिति बन गई है।

2013 के वोट

भाजपा : महेंद्र हार्डिया : 68,334
कांग्रेस : पंकज संघवी : 55,016

मजबूत दावेदार भाजपा

- अजयसिंह नरूका: नगर निगम सभापति
- नानूराम कुमावत: नगर उपाध्यक्ष

मजबूत दावेदार कांग्रेस

- पंकज संघवी : पूर्व प्रत्याशी
- छोटे यादव : पार्षद
- अमन बजाज : जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष

- डॉ. आनंद राय, सोशल एक्टिविस्ट

ये भी ठोक रहे ताल

- शैली राणावत (आप प्रत्याशी), विजय व्यास और अजय नायक, दिलीप शर्मा, विनय बाकलीवाल, अरविंद बागड़ी, शेख अलीम, रघु परमार

राजनीतिक समीकरण : भाजपा में हार्डिया को लेकर अंदरूनी विरोध है। हालांकि, यहां आधा दर्जन दावेदारों के कारण कांग्रेस भी भीतरघात को लेकर डरी हुई है।

चुनौतियां : भाजपा में अंदरूनी विरोध, अल्पसंख्यक क्षेत्रों में विरोध और अतिक्रमण मुहिम।

विधायक की परफॉर्मेंस
राज्य सरकार की योजनाओं को लागू करने में सबसे आगे रहने वाले विधायक का खिताब हार्डिया को मिल चुका है। क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहते हैं। कार्यकर्ताओं से जीवंत संपर्क, लेकिन तटस्थता के चलते पार्टी की गुटबाजी से परेशान।

- हमारे क्षेत्र में लगातार विकास हो रहा है। विकास के साथ मूलभूत सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। पेयजल एक बड़ी समस्या है, अन्य दिक्कत नहीं है।

- अशोक पंड्या, वरिष्ठ नागरिक
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राऊ : ग्रामीण ही होंगे भाग्य विधाता

2008 में परिसीमन के बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को मिलाकर राऊ सीट ने आकार लिया। यहां एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस आई। दोनों बार विधायक खाती समाज से ही रहे हैं। खाती समाज बहुसंख्यक होने से यहां प्रत्याशियों का भाग्य तय करता आया है। इस बार भी रोचक मुकाबला होने के आसार हैं।

2013 के वोट

कांग्रेस : जीतू पटवारी : 91,885
भाजपा : जीतू जिराती : 73,326

मजबूत दावेदार भाजपा

- जीतू जिराती: पूर्व विधायक
- मधु वर्मा: पूर्व आईडीए अध्यक्ष
- रवि रावलिया: किसान नेता, पूर्व जिलाध्यक्ष, भाजपा ग्रामीण

मजबूत दावेदार कांग्रेस

- पंकज संघवी: पूर्व प्रत्याशी
- छोटे यादव: पार्षद
- अमन बजाज: जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष

ये भी ठोक रहे ताल

- विजय जाट: आप प्रत्याशी
- अभिषेक तंवर (प्रोफेशनल)
- मंदार महाजन, कृष्णमुरारी मोघे, दीपक राजपूत, दौलत पटेल

राजनीतिक समीकरण

भाजपा ने इसे टारगेट सीट बना दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के नाम यहां से चलने के कारण यह सीट अभी से चर्चा में है।

चुनौतियां : शहरी क्षेत्र में विधायक को लेकर विरोध, कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति, ग्रामीण क्षेत्रों में विधायक को लेकर नाराजगी।

विधायक की परफॉर्मेंस

जनता के बीच बने रहते हैं। साइकिल से ही क्षेत्र में घूमते हैं। जनता से सीधे संवाद हैं। हालांकि क्षेत्र में कई समस्याएं बनी हुई हैं।

- विधायक सक्रिय हैं। अपराध और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर माहौल में सुधार की जरूरत है। एबी रोड का प्लान बनाकर काम किया जाना चाहिए।

- संदीप मिश्रा, आम नागरिक

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