अब तो खुद के नाम से ज्यादा ‘जेठालाल’ कहलाना पसंद है- दिलीप जोशी

तारक मेहता का उलटा चश्मा फेम दिलीप जोशी

इंदौर. सब टीवी पर प्रसारित होने वाले सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा में जेठालाल की भूमिका निभाने वाले एक्टर दिलीप जोशी रविवार को शहर में थे। वे यहां स्वामिनारायण मंदिर में आयोजित सत्संग सभा में आए थे। इस दौरान पत्रिका से विशेष चर्चा की।

जोशी ने कहा कि असल जिंदगी में बेहद गंभीर व्यक्ति हूं। साहित्य से लेकर हर वेद्पुराण पढ़ता हूं। मैं भूतकाल और भविष्य के बारे में नहीं सोचता हूं। मेरे लिए वर्तमान इम्पोर्टेंट है। एक कलाकार के तौर पर मैं जेठालाल के किरदार से खुश हूं। इसे देखकर बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक खुश हो जाते हैं। मेरा सीरियल में सबसे अहम किरदार है, यही मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी और अवॉर्ड भी है। एक्टिंग से ज्यादा मुश्किल कॉमेडी करना है। एेसी कॉमेडी करना और मुश्किल है जिसे देखकर पूरा परिवार हंस सकें। मेरे लिए इससे बड़ी बात नहीं हो सकती है कि मुझे देखकर रोता हुआ बच्चा और बुजुर्ग भी हंस देता है। कई बार लोग दिलीप जोशी की जगह जेठालाल बुलाते है। इससे चिढ़ता नहीं बल्कि खुश होता हूं कि मुझे मेेरे काम की वजह से पसंद किया जाता है।

एक साल तक काम नहीं था मेरे पास
मेरे पास तारक मेहता का उल्टा चश्मा सीरियल से पहले एक साल तक काम नहीं था। यह बात होगी २००६ व २००७ की, जबकि मैं इंडस्ट्री में १२ साल की उम्र से काम कर रहा हूं। कई गुजराती थिएटर किए और प्ले लिखे थे। फिल्मों में भी काम किया। इसके बवाजूद भी काम नहीं मिलना चिंता का विषय था। कभी सोचता था कि अब इस उम्र में काम नहीं मिल रहा है। अब आगे क्या होगा। एेसे में इंडस्ट्री के लोगों से मिलने गया तो वे भी टाल देते थे। मां-बाप के संस्कार और खुद पर विश्वास ने मुझे हारने नहीं दिया। इसीलिए सबसे पहले खुद पर भरोसा कायम रखें।

टीम का हर सदस्य जमीन से जुड़ा है
तारक मेहता सीरियल की टीम का हर सदस्य ग्लैमर लाइफ से दूर है। मैं भी खुद पर कभी ग्लैमर चढऩे नहीं देता हूं। जमीन से जुड़ा हूं और जुड़े ही रहने चाहता हूं। एेसा इसलिए कि मुझे जीवन का सच मालूम है। आज हम जहां है कल कोई और था और आने वाले वक्त पर कोई और होगा। इसीलिए हमारी टीम का हर सदस्य जमीन से जुड़ा हुआ है। पूरी टीम परिवार की तरह है। हर किसी के सुख-दुख में साथ हैं।

मां-बाप के संस्कार ही सक्सेस का रास्ता
आज के दौर में मां-बाप से बच्चे दूर होते जा रहे हैं जबकि इस आधुनिक दौर में बच्चों को सबसे ज्यादा संस्कार और सभ्यता की जरूरत है। मां-बाप के दिए संस्कार में इतनी ताकत होती है कि हर बच्चा तरक्की के रास्ते पर पहुंच ही जाता है। इसीलिए बच्चों से कहता हूं कि अपने जीवन में सिंगल •ारुर रखें। सिंगल मतलब मां-बाप के संस्कार। जो जीवन में एक्सीडेंट से बचाएंगे। इस दुनिया में गुरु और मां-बाप का दर्ज सबसे ऊपर है।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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