हिमेश सर के साथ शुरू किया था करियर अब उनके साथ कोच की भूमिका में हूं- पलक मुछाल

पलक मुछाल एंड टीवी के अपकमिंग सिंगिग रियल्टी शो द वॉइस किड्स इंडिया शो के प्रमोशन के लिए शहर में थी।

इंदौर. फिल्म इंडस्ट्री में कॉम्पीटिशन काफी टफ हो गया है। बात चाहे फिल्मी बैकग्राउंड वाले लोगों की हो या नॉन-फिल्मी की, हर किसी के लिए इंडस्ट्री में सस्टेन रहना एक बड़ी चुनौती है। मेरा हिसाब से हर गाना एक नया स्ट्रगल और चैलेंज आपके सामने लेकर आता है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि किसकी अप्रोच से आपको काम मिला है, फर्क पड़ता है कि आपने उस काम को किया किस तरह से है। ये बात प्लेबैक सिंगर पलक मुछाल ने गुरुवार को होटल सयाजी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। वे एंड टीवी के अपकमिंग सिंगिग रियल्टी शो द वॉइस किड्स इंडिया शो के प्रमोशन के लिए शहर में थी। सहां उन्होंने अपनी लाइफ और शो से जुड़ी बातें शेयर की। वे शो में कोच की भूमिका में नजर आएंगी जिसमें वे बच्चों को म्यूजिक के लिए ट्रेन करेंगी।

लाइफ में हमेशा रखें प्लान बी
फिल्म इंडस्ट्री की सबसे अच्छी और बुरी बात एक ही है ये आपको जितनी जल्दी जगह देती है आप उतनी जल्दी भुला भी दिए जाते हैं। इसीलिए हमेशा एक प्लान बी होना चाहिए जिससे आप फ्यूचर में कभी हताश न हो। मैं नहीं चाहती कि जब मेरे पास काम न हो तो मैं डिप्रेशन में चली जाऊं, इसीलिए मैं अपनी पढ़ाई पर फोकस कर रही हूं। इंटनेशनल बिजनेस में पीएचडी कर रही हूं। हमेशा लाइव कंसर्ट के जरिए म्यूजिक से जुड़ी रहना चाहती हूं ताकि अपने मिशन हार्ट पेशेंट बच्चों की मदद कर सकूं। अभी तक 1292 का ट्रीटमेंट हो चुका है और 422 बच्चे वेटिंग में हैं।

दिल को छू जाए वहीं सच्चा संगीत
वे बताती हैं कि जब हम ऑडिशन लेते हैं तो वो ब्लाइंड ऑडिशन होता है। मेरा मानना है कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि फैमिली बैकग्राउंड क्या है और आप कितने संघर्ष के बाद इस मुकाम पर पहुंचे हैं। आपकी आवाज में जादू होना चाहिए। जो दिल को छू जाए वही सच्चा संगीत होता है। आवाज आत्मा से निकल कर आत्मा को छूने वाली होनी चाहिए।

बच्चों में डवलप न हो नेगेटिविटी
मैं जब 14 साल की थी तो हिमेश रेशमिया सर के सामने गाना गाया था। आज उनके साथ कोच की भूमिका में देखकर अच्छा महसूस कर रही हूं। जब भी कोई बच्चा एलिमिनेट होता है तो हमारे लिए सबसे जरूरी होता है कि जाते वक्त उसके चेहरे पर मुस्कान हो वह एक पॉजिटिविटी के साथ वापस जाएं। उसके मन में हारने का डर न हो।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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