अवैध कॉलोनी काटने वाले 101 कालोनाईजर्स पर एफआईआर के लिए चिट्ठी जारी

- निगमायुक्त ने डीआईजी को पत्र लिखकर की मांग
- कॉलोनी बसवाने वाले अफसरों को छोड़ा

By: नितेश pal

Published: 24 Jul 2018, 06:02 AM IST

इंदौर.
शहर में मौजूद अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के साथ ही इन्हें बसाने वाले अफसरों पर भी निगम ने कार्रवाई की तैयारी की है। निगम ने शहर की १०१ अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कार्रवाई शुरू की है। इसीके तहत इन कॉलोनियों को बसाने वाले 101 कॉलोनाइजर्स पर अवैध कॉलोनी बसाने के चलते एफआईआर दर्ज करने के लिए निगमायुक्त आशीषसिंह ने एक चिट्ठी डीआईजी को लिखी है।
निगम द्वारा शहर की 572 अवैध कॉलोनियों की सूची नियमितिकरण हेतू बीते माह जारी की गई थी। इन कॉलोनियों में से 101 कॉलोनियों को नियमितिकरण प्रक्रिया में लिया था। इसके साथ ही निगम ने इन कॉलोनियों को बसाने वाले कॉलोनाइजर्स के खिलाफ भी सबूत के तौर पर इनकी पहली रजिस्ट्री और नोटरी यहां रहने वालों से ली थी। सभी कॉलोनियों से ऐसी 5-5 नोटरी-रजिस्ट्री इकट्ठा की गई थी। इनके आधार पर इन्हें बसाने वालों पर कार्रवाई का निर्णय लेते हुए निगमायुक्त ने डीआईजी को चिट्ठी लिख विभिन्न थानों में निगम द्वारा की जाने वाली शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के लिए निर्देश जारी करने के लिए कहा है।
पहले की समीक्षा
सोमवार को निगम के अपर आयुक्त कॉलोनी सेल संदीप सोनी ने इसके पहले सभी भवन अधिकारियों और भवन निरीक्षकों की नगर निगम में बैठक ली, और इन कॉलोनियों को बसाने वालों के संबंध में आए दस्तावेजों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही अफसरों को उनके थाना क्षेत्र में लिखित शिकायत करते हुए एफआईआर दर्ज कराने के लिए कहा।
धारा 292 के तहत है अपराध
मध्यप्रदेश म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट की धारा 292 के तहत अवैध कॉलोनी को बसाना अपराध है। इसे एक्ट में गंभीर अपराध मानते हुए अवैध कॉलोनी बसाने वाले को 10 साल की सजा का प्रावधान भी है।

अफसरों को बचाया
नगर निगम ने मध्यप्रदेश म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट की धारा 292 का आधा ही पालन किया जा रहा है। इस धारा में नगर निगम द्वारा अवैध कॉलोनाइजर्स पर तो एफआईआर दर्ज कराई जा रही है, लेकिन इसे बसाने में सहयोग करने और बसने के समय कार्रवाई नहीं करने वाले निगम अफसरों को बचाया जा रहा है। इसी धारा में ऐसे अफसरों को भी 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। नगर निगम ने इन्हें बसाने के समय कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को नहीं लिखा है।

नितेश pal
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