300 करोड़ के फंड को आईटी स्टार्टअप कंपनियों का इंतजार

सरकार से सहयोग लेने नहीं पहुंच रहे युवा...एकेवीएन के इनक्यूबेशन सेंटर से पांच लोगों ने बनाई कंपनियां

इंदौर. शहर के उद्यमी व नवाचारी युवाओं पर प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया का असर नजर आने लगा है। युवक नए-नए स्टार्टअप के साथ छोटी कंपनियां बनाकर काम कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है, छोटी आईटी कंपनियां व स्टार्टअप के लिए सरकार ने लगभग 300 करोड़ का फंड सब्सिडी व सहायता के लिए रखा है, लेकिन अफसर कंपनियों का इंतजार कर रहे हैं। इंदौर में आईटी कैपिटल सब्सिडी के लिए मात्र 15 कंपनियों ने आवेदन किए थे, जिन्हें सरकार सहायता दे चुकी है।

शुक्रवार को एकेवीएन ने क्रिस्टल आईटी पार्क स्थित इनक्यूबेशन सेंटर से निकले उद्यमियों का सम्मान कार्यक्रम रखा था। इसमें शिशिर शुक्ला, राजेश भाटिया, पूजा माहेश्वरी, राजसिंह सिसौदिया सहित पांच स्टार्टअप समूहों को सम्मानित किया गया। इस दौरान 100 से अधिक एेसे युवा आए, जो बिना सरकारी सहायता के कंपनियां बनाकर कार्य कर रहे हैं। कुछ छोटे स्टार्टअप से शुरुआत कर 50 लोगों को रोजगार देने वाली कंपनी के मालिक बन गए हैं। कुछ युवा छोटी आईटी कंपनियां बनाकर 10-15 के समूहों में बीपीओ की तरह कार्य कर रहे हैं। एकेवीएन के एमडी कुमार पुरुषोत्तम ने उद्यमियों को आईटी पार्क के इनक्यूबेशन सेंटर की जानकारी दी। इनमें युवा कार्य कर कंपनी विकसित करते हैं। कामकाज जमने पर अपने ऑफिस में शिफ्ट हो जाते हैं।

रणनीति बनाई
इनक्यूबेशन सेंटर के शैलेंद्र पटेल ने रणनीति नाम से स्टार्टअप शुरू किया। कंपनी का फोकस एवरी वोट काउंट पर होता है। उम्मीदवार या पार्टी को चुनाव में सफलता के लिए बूथ तक की रणनीति तय करके दी जाती है। अभी तक 290 इलेक्शन मैनेज कर चुके हैं।
अभिषेक ने क्लीनिंग सॉल्यूशन नाम से स्टार्टअप शुरू किया। इसके लिए फार्मा कंपनियों के साथ काम किया जा रहा है। सेज में स्थित कंपनियों को रोज साफ ड्रेस की जरूरत होती है। कंपनियों को इसका हल देने के अलावा सुपर हाईजनिक क्लीनिंग की अवधारणा पर काम हो रहा है।

निधि वर्मा- हैप्पीनेस सॉल्यूशन को लेकर कार्य कर रही हैं। विकाससिंह ने क्लास मॉनिटर नाम से वेंचुअर बनाया है। इसमें क्लास रूम सॉल्यूशन और बच्चों की सुरक्षा
को लेकर एप और सॉफ्टवेयर
बनाया है। इससे पालक बच्चे पर नजर रख सकेंगे।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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