जीतू सोनी के करीबी नरेंद्र रघुवंशी ने लगाई फांसी, सुसाइड नोट में पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित होटल माय होम केस के आरोपी और जीतू सोनी के करीबी रहे नरेंद्र रघुवंशी ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली। सुसाइड नोट में पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को आत्महत्या का कारण बताया गया।

By: Faiz

Published: 27 Oct 2020, 03:56 PM IST

इंदौर/ मध्य प्रदेश के बहुचर्चित होटल माय होम केस के आरोपी और जीतू सोनी के करीबी रहे नरेंद्र रघुवंशी ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली। रघुवंशी का शव सुदामा नगर स्थित उन्हीं के घर पर फांसी के फंदे पर झूलता मिला। पुलिस जांच मे शव के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, मृतक नरेंद्र रघुवंशी द्वारा पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई को आत्महत्या का कारण बताया गया। हालांकि, सुसाइड नोट में उन्होंने अंग दान करने की भी इच्छा जताई है। रघुवंशी पिछले दिनों वृद्ध पिता के स्वास्थ्य को लेकर पैरोल पर सेंट्रल जेल से बाहर आए थे। आज ही उनकी पैरोल खत्म होने वाली थी।

 

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आज शाम को पैरोल पूरी कर लौटना था जेल

पुलिस के मुताबिक, पलासिया थाना में मानव तस्करी और देह व्यापार का केस में नरेंद्र रघुवंशी को जीतू सोनी के बेटे अमित के साथ गिरफ्तार किया गया था। कुछ दिनों पहले ही उनके पिता का स्वास्थ खराब होने के चलते उन्हें पैरोल पर छोड़ा गया था। मंगलवार को पैरोल खत्म हाेने वाली थी, जिसके बाद एक बार फिर उन्हें जेल भेजा जाना था। पुलिस तफ्तीश में सामने आया था कि, रघुवंशी पिछले 20-25 सालों से जीतू सोनी से जुड़ा हुआ था। वो जीतू के साथ होटल माय होम भी संभालता था।

 

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सुसाइड नोट में कही ये बात

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नरेन्द्र रघुवंशी के शव के पास से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उन्होंने लिखा कि, 'मैं अपनी मर्जी से जान दे रहा हूं। इसमें मेरे परिवार का कोई दोष नहीं है। पुलिस-प्रशासन द्वारा मेरे खिलाफ जो कार्रवाई की गई, उससे मेरी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। उसी बात को लेकर मैं जान दे रहा हूं। मेरे मरने के बाद आंख, दिल, किडनी, लीवर किसी जरूरतमंद को दे देना।'

 

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30 नवंबर 2019 को हुई थी कार्रवाई

हनी ट्रैप मामला सामने आने के बाद 30 नवंबर 2019 की रात जीतू सोनी के खिलाफ प्रशासन द्वारा कार्रवाई की शुरुआत की गई थी। पुलिस और प्रशासन की टीम ने सोनी के गीता भवन स्थित माय होम होटल पर छापा मारा और यहां से 67 युवतियों को बरामद किया। इसके बाद पलासिया थाने में जीतू और अन्य के खिलाफ मानव तस्करी और प्रिवेंशन ऑफ इम्पोरल ट्रैफिकिंग एक्ट (पीटा) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बाद नगर निगम ने जीतू के अवैध बने होटल सहित वैध संपत्तियों को जमींदोज कर दिया था।

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