मर्दों की शक्ति बढ़ाता है काले खून वाला कडक़नाथ, पैटेंट के लिए भिड़ी सरकार

आदिवासी इसे मर्दों की शक्ति बढ़ाने की औषधि मानते हैं ...

राणापुर. मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में काले खून वाला कडक़नाथ मुर्गा मिलता है जिसकी खूबियां दूर दूर तक चर्चित हैं। यहां के आदिवासी इसे मर्दों की शक्ति बढ़ाने की औषधि मानते हैं। कडक़नाथ इतना लोकप्रिय हो चुका है कि अब देश के हर कोने से इसकी डिमांड आने लगी है। इसी डिमांड को देखते हुए अब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार इसका पैटेंट हासिल करना चाहती है।

मप्र सरकार की सुस्ती के चलते अब छत्तीसगढ़ सरकार कडक़नाथ को दंतेवाड़ा का बताकर जीआई टैग हासिल करने की तैयारी में है। परेशानी की बात यह है कि खुद फिक्की जैसा संगठन इस कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार की मदद कर रहा है। दंतेवाड़ा के कलेक्टर सौरभ कुमार इस मिशन में लगे हैं।

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दरअसल झाबुआ के कडक़नाथ के नाम से 2014 में कृषि विज्ञान केंद्र झाबुआ के साथ कडक़नाथ प्रोजेक्ट पर काम कर रही संस्था ने आवेदन देकर भौगोलिक संकेतक पंजीयन कार्यालय में आवेदन किया था। इसके बाद हुए पत्राचार में मप्र का पशुपालन विभाग भी इस प्रक्रिया में शामिल हो गया था, लेकिन इसके बाद किसी ने ज्यादा रुचि नहीं ली। इधर छत्तीसगढ़ में मिलता-जुलता वातावरण मिलने से झाबुआ से गए कडक़नाथ के चूजे जब विकसित हुए तो वहां की सरकार ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हेचरियों में व्यापक उत्पादन शुरू किया। फिर दंतेवाड़ा की कृषि उत्पाद कंपनी भूमिवाडी को जीआई टैग के लिए आवेदन तैयार कर कडक़नाथ का जीआई टैग हासिल करने की शुरुआती रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया।

झाबुआ कलेक्टर ने सरकार को लिखा पत्र
समाचार पत्रों माध्यम के जरिए झाबुआ कलेक्टर आशीष सक्सेना को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कडक़नाथ को खुद का मुर्गा साबित करने के प्रयासों की भनक लगी तो उन्होंने तत्काल पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव अजीत केसरी को पत्र लिखकर झाबुआ के कडक़नाथ के जीआई टैग एप्लीकेशन पर तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह छत्तीसगढ सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए लिखा। इसके बाद मप्र सरकार का पशुपालन विभाग हरकत में आया और भौगोलिक संकेतक कार्यालय से संवाद स्थापित किया।

आवेदन निरस्त होगा
आवेदन करने वाली जीवीटी की फौजिया करीम का कहना है कि हमने विधिवत 2014 में आवेदन किया है। नियमानुसार हमारे आवेदन के चलते उनका आवेदन हो ही नहीं सकता। इसलिए कडक़नाथ झाबुआ का ही घोषित होगा और जल्दी इसे जीआई टैग मिलेगा।

झाबुआ से ले गए थे चूजे
झाबुआ के कृषि विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ.आईएस तोमर ने छत्तीसगढ सरकार या दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के कडक़नाथ का ब्रिड होने के दावों को खारिज करते हुए कहा, हमारी यूनिट भारत सरकार ने खोली है और जीवीटी उस समय हमारे साथ थी। इसलिए जीवीटी की ओर से आवेदन गया है। डॉ तोमर के अनुसार वह खुद सारे देश में कडक़नाथ चूजे भेजते हैं। डॉ. तोमर के अनुसार हमारे यहां उमेश साहू नामक एक कर्मचारी थे।

जो 5 साल पहले तबादला होकर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा गए थे। उन्होंने यहां से 1000 चूजे बुलाकर काम करना शुरू किया था। अब ब्रिड पर दावा कर रहे हैं यह गलत है। डॉ. तोमर का कहना है कि छत्तीसगढ़ का दावा खारिज होगा। क्योंकि हमारे पास इतने दस्तावेजी सबूत है कि वह कानूनी लड़ाई मे टिक नहीं पाएंंगे।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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