scriptkanh river | कान्ह नदी में मिल रहे गंदे पानी को देखने के लिए पहुंचे संत, व्यवस्था देख हुए खुश | Patrika News

कान्ह नदी में मिल रहे गंदे पानी को देखने के लिए पहुंचे संत, व्यवस्था देख हुए खुश

इंदौर में की गई व्यवस्था से संतों ने संतोष जाहिर किया

इंदौर

Published: December 22, 2021 09:38:58 pm

इंदौर. कान्ह नदी में मिलने वाले गंदे पानी की स्थिति देखने के लिए बुधवार को उज्जैन के संतों का दल इंदौर पहुंचा। इंदौर पहुंचे संतों के दल को नगर निगम द्वारा नदी को साफ करने के लिए जो व्यवस्था की गई है, उसे अफसरों ने दिखाया। इंदौर में की गई व्यवस्था से संतों ने संतोष जाहिर किया।
शिप्रा नदी में मिलने वाले कान्ह नदी के गंदे पानी और उसके कारण शिप्रा के गंदे होने का मामला सामने आने के बाद बुधवार को उज्जैन से संतो का दल, महंत डॉ. रामेश्वर दास के नेतृत्व में इंदौर आया। इस दल में मंहत भगवानदास, मंहत विनितगिरी, मंहत रामदास, मंहत रामचंद्रदास, मंहत गुप्तगिरी, मंहत देवपुरी, मंहत दादू महाराज, मंहत ज्ञानदास, मंहत शंकरदास आदि लोग शामिल थे। इस दल को कलेक्टर मनीष सिंह और नगर निगम आयुक्त प्रतिभा पाल ने पहले राजेंद्रनगर में सरस्वती नदी पर बनाए गए एसटीपी पर ले गए। यहां पर उन्हें सीवरेज का गंदा पानी किस तरह से साफ किया जा रहा है, इसकी पूरी प्रक्रिया बताते हुए जानकारी दी। इसके बाद संतो का दल मूसाखेड़ी क्षेत्र में पहुंचा। यहां पर नगर निगम ने नाले के गंदे पानी को रोकने का काम किया था। यहां की व्यवस्था देखने के साथ ही जनता से भी संतों ने चर्चा की।
व्यवस्था से दिखे संतुष्ट
इंदौर में कान्ह नदी में मिल रहे गंदे पानी को साफ करने के लिए किए गए प्रयासों से संत काफी हद तक संतुष्ट नजर आए। संतों के दल की अगुआई कर रहे महंत डॉ. रामेश्वरदास के मुताबिक इंदौर में नदी की सफाई के लिए काफी अच्छे इंतजाम किए गए हैं। हालांकि मांगलिया और सांवेर के हिस्से में नदी का पानी काफी गंदा है। देवास की ओर से भी जो पानी नदी में मिल रहा है वो काफी गंदा है। हमने इंदौर कलेक्टर से कहा है कि पंथ पिपलाई में पानी को साफ करने के लिए एसटीपी बनवाएं।
पीने का पानी नहीं है तो न छोड़ें नदी में
डॉ. रामेश्वरदास के मुताबिक नदी का जो पानी एसटीपी से साफ किया जा रहा है, उसके बारे में कलेक्टर ने बताया कि ये पानी पीने योग्य नहीं है। इस पर हमने उन्हें कहा है कि शिप्रा नदी में स्नान और आचमन का महत्व है। ऐसे में यदि ये पानी पीने योग्य नहीं है तो उसे शिप्रा में न छोड़ा जाए।
 इंदौर में की गई व्यवस्था से संतों ने संतोष जाहिर किया
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