इंदौर को दहला देने वाले कविता रैना हत्याकांड में आरोपी बरी, 2 साल चले ट्रायल, 41 गवाह, फिर भी कोई नतीजा नहीं

इंदौर को दहला देने वाले कविता रैना हत्याकांड में आरोपी बरी, 2 साल चले ट्रायल, 41 गवाह, फिर भी कोई नतीजा नहीं

Arjun Richhariya | Publish: May, 19 2018 01:56:53 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

इंदौर को दहला देने वाले कविता रैना हत्याकांड में आरोपी बरी, 2 साल चले ट्रायल, 41 गवाह, फिर भी कोई नतीजा नहीं

इंदौर. शहर को हिला देने वाले कविता रैना हत्याकांड में शुक्रवार को कोर्ट ने आरोपी महेश बैरागी को बरी कर दिया। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आरोपी को बरी करते हुए उसे दोषमुक्त करार दिया है। गौरतलब है कि इंदौर को दहला देने वाले इस हत्याकांड में दो साल तक ट्रायल चले और 41 लोगों की गवाही हुई।

इसके बावजूद इस केस में कोई नतीजा नहीं निकला। पूरे पुलिस महकमे के लिए चुनौती बने इस केस में कई सीनीयर अफसर और भारी भरकम अमला लगा रहा। पुलिस ने लंबी जांच पड़ताल के बाद मार्च 2016 में चार्जशीट पेश की और शुक्रवार दोपहर इस पर फैसला सुनाया गया।

आज भी बिलख पड़ती है मासूम बेटी
कविता रैना हत्याकांड को तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो इस हत्याकांड को शहर भूला है और न कविता का परिवार। कविता की बेटी आज भी मां का इंतजार कर रही है। अन्य बच्चों के साथ उनकी मां को देख वह रोने लगती है। बेटी के आंसू देख पिता कहते हैं कि तुम्हारी मां तारा बन गई है। वह आसमान से सब देख रही है, तुम रोओगी तो उसे तकलीफ होगी। ये सुनते ही बेटी चुप हो जाती है।

क्या था मामला
मित्रबंधु नगर निवासी संजय रैना की पत्नी कविता रैना की हत्या कर कई टुकड़े कर दिए गए थे। कविता का परिवार आज भी उस सदमे से नहीं उबरा है। संजय बताते हैं कि पत्नी की हत्या के बाद पूरा परिवार टूट गया है।

बड़ा बेटा धु्रव पूरे समय उदास रहता है। पहले तो वह घर से अकेला चला जाता था, लेकिन अब डरा-डरा रहता है। काफी समझाने के बाद दोस्तों के साथ कभी-कभार खेलने चला जाता है।

मां की मौत का उसे बहुत दुख है लेकिन वह कभी जाहिर नहीं करता है। उसकी परिजन काउंसलिंग करते हैं। हम नहीं चाहते हैं कि यह घटना उसके दिल-दिमाग में घर कर जाए और वह अवसाद में चला जाए।

अभी भी सदमें में हैं बच्चे
संजय बताते हैं कि बेटी यशस्वी (9) भी अब तक सदमे से उबर नहीं पाई है। पहले तो उसे लगता था कि एक दिन मां वापस लौट आएगी।

स्कूल में बच्चों के साथ उनकी मां को देख वह उदास हो जाती थी। घर आकर देर तक रोती रहती। बेटी की हालत देख परिजन परेशान रहते। फिर उसे छत पर ले जाकर आसमान में तारे दिखाकर कहा कि तुम्हारी मां भी तारा बन गई है।

वह आसमान से देख रही है। तुम रोओगी तो उसे दुख होगा। ये सुनकर बेटी चुप हो जाती है। शायद अब उसे यकीन हो गया है कि मां कभी वापस नहीं आएगी।

आज भी बिलख पड़ती है मासूम बेटी
कविता रैना हत्याकांड को तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो इस हत्याकांड को शहर भूला है और न कविता का परिवार। कविता की बेटी आज भी मां का इंतजार कर रही है। अन्य बच्चों के साथ उनकी मां को देख वह रोने लगती है। बेटी के आंसू देख पिता कहते हैं कि तुम्हारी मां तारा बन गई है। वह आसमान से सब देख रही है, तुम रोओगी तो उसे तकलीफ होगी। ये सुनते ही बेटी चुप हो जाती है।

क्या था मामला
मित्रबंधु नगर निवासी संजय रैना की पत्नी कविता रैना की हत्या कर कई टुकड़े कर दिए गए थे। कविता का परिवार आज भी उस सदमे से नहीं उबरा है। संजय बताते हैं कि पत्नी की हत्या के बाद पूरा परिवार टूट गया है।

बड़ा बेटा धु्रव पूरे समय उदास रहता है। पहले तो वह घर से अकेला चला जाता था, लेकिन अब डरा-डरा रहता है। काफी समझाने के बाद दोस्तों के साथ कभी-कभार खेलने चला जाता है।

मां की मौत का उसे बहुत दुख है लेकिन वह कभी जाहिर नहीं करता है। उसकी परिजन काउंसलिंग करते हैं। हम नहीं चाहते हैं कि यह घटना उसके दिल-दिमाग में घर कर जाए और वह अवसाद में चला जाए।

अभी भी सदमें में हैं बच्चे
संजय बताते हैं कि बेटी यशस्वी (9) भी अब तक सदमे से उबर नहीं पाई है। पहले तो उसे लगता था कि एक दिन मां वापस लौट आएगी।

स्कूल में बच्चों के साथ उनकी मां को देख वह उदास हो जाती थी। घर आकर देर तक रोती रहती। बेटी की हालत देख परिजन परेशान रहते। फिर उसे छत पर ले जाकर आसमान में तारे दिखाकर कहा कि तुम्हारी मां भी तारा बन गई है।

वह आसमान से देख रही है। तुम रोओगी तो उसे दुख होगा। ये सुनकर बेटी चुप हो जाती है। शायद अब उसे यकीन हो गया है कि मां कभी वापस नहीं आएगी।

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