टेम्स की तरह कान्ह को संवारना हो तो बनाएं अलग ‘विभाग’

तीन सूत्र, जिसके तहत लंदन की तरह विकसित हो सके उनके सपनों का इंदौर

इंदौर. मेरी जन्मभूमि है, लंदन कर्मभूमि। मेरा लगाव दोनों से बेहद गहरा है। मुझे लगता है, यदि लंदन की कुछ अच्छाइयां अपना लें, तो हम अपने इंदौर को और अधिक विकसित कर सकते हैं। यूं देखा जाए तो क्षेत्रफल और जनसंख्या में लंदन और इंदौर दोनों ही बराबर हैं।

पहला सूत्र
नदी ही जीवन है। हर सभ्यता और शहर की बसाहट नदियों के किनारे हुई है। मेरी जिंदगी के सबसे सुनहरे पल इंदौर में बीते हैं। स्कूल और कॉलेज के समय हम यह समझ ही नहीं पाए थे कि हमारे शहर के बीचोंबीच एक नदी बहती है। जब लंदन गया, तब वहां टेम्स को देखा, पता चला यह भी कभी जहरीला नाला बन गई थी, अब साफ कल-कल बहती नदी है। कान्ह (खान) नदी की तरह टेम्स में भी सीवरेज का पानी मिलता था। लंदन में एक बड़ा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया। लंदन में टेम्स नदी को म्युनसिपल कॉर्पोरेशन नहीं संभालता। टेम्स के लिए एक अलग विभाग बना हुआ है। जो टेम्स की सफाई को लेकर लगातार नई योजनाएं बनाता रहता है। अभी सीवरेज प्लांट के लिए 20 बिलियन पाउंड की एक योजना पर काम हो रहा है। यदि कान्ह नदी को टेम्स की तरह सुधारना है तो एक अलग विभाग बनाना चाहिए।

दूसरा सूत्र
लंदन में हम प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर भी बेहद सचेत हैं। लोक परिवहन को बढ़ावा देकर ही हवा में होने वाले प्रदूषण को रोका जा सकता है। हमनें गाडिय़ों के लिए नया टैक्स लगाया है। टी चार्ज ( टाक्सिक चार्ज)। यदि आप लंदन में अपनी कार लाना चाहते हैं तो आपको टी-चार्ज के लिए 12.50 पौंड देने होंगे। अन्यथा पब्लिक व्हिकल है। इंदौर में अब लोक परिवहन की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। सिटी बस से लेकर आईबस से सफर शुरू हो चुका है। मेट्रो ट्रेन और आ जाएं तो पर्सनल व्हिकल को बढऩे से रोका जा सकता है। इससे प्रदूषण का स्तर कम होगा। हमें ग्लोबल वार्मिंग को लेकर बेहद सचेत रहना होगा। मैं डिप्टी मेयर के रूप में हमेशा यह याद रखता हूं कि पर्यावरण में जो बिगड़ चुका है उसे संभाला जाए और आगे कुछ और ना बिगड़ सके इसके प्रति सचेत रहा जाए।

तीसरा सूत्र
मैंने जिस समय लंदन में डिप्टी मेयर का पदभार संभाला था, लंदन यूरोपियन यूनियन से बाहर हुआ ही था। मैं फायनेंस में अच्छा हूं, इसलिए मुझे नए रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की कोशिश करने के लिए कहा गया। मैंने महसूस किया कि लंदन में एजुकेशन हब है, वहां 50 से अधिक यूनिवर्सिटी हैं। वहां बाहर से पढऩे आए छात्र बहुत है, जिनका लंदन को लेकर लगाव हमेशा रहता है। ऐसे ही इंदौर भी एजुकेशनल हब है, यहां पूरे देश से छात्र पढऩे आते हैं जिनका इंदौर से खास लगाव है। हमें उन छात्रों के लगाव को शहर की ताकत बनाना चाहिए। युवा दिमाग के पास नई योजनाओं की ताकत होती है, यदि यह ताकत किसी शहर के विकास में लग जाए तो उसे कोई नहीं रोक सकता। युवाओं की ताकत को पहचानकर रणनीति से आगे बढऩे की कोशिश करना चाहिए, जिससे बहुत आसानी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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