डीएवीवी : सीईटी, नैक, हजारों डिग्री, लेट होते रिजल्ट और गुटबाजी से होगा नए कुलपति का वेलकम

सरकार और कुलाधिपति की खींचतान में 32वें दिन हो पाई डीएवीवी के कुलपति की घोषणा

By: हुसैन अली

Published: 26 Jul 2019, 02:04 PM IST

इंदौर. प्रदेश सरकार और कुलाधिपति की खींचतान के बाद आखिरकार राजभवन की मुहर से प्रो. रेणु जैन देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की नई कुलपति चुनी गईं। 24 जून को शासन ने धारा-52 लगाते हुए तत्कालीन कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ को बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद से ही कुलपति का पद रिक्त होने से यूनिवर्सिटी में एक भी प्रशासनिक फैसला नहीं हो सका। शुक्रवार दोपहर नई जिम्मेदारी संभालने के साथ ही प्रो. जैन को कई चुनौतियों से निपटना होगा। सबसे बड़ी चुनौती सीईटी पर फैसले की है, जिससे 17 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की उम्मीदें जुड़ी हैं। इस पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो यूटीडी के कई कोर्स में जीरो ईयर की स्थिति बन जाएगी। इसके अलावा जल्द प्रस्तावित नैक का दौरा, हजारों डिग्री पर हस्ताक्षर, समय पर परीक्षा कराना और नतीजे जारी करने के साथ चरम पर पहुंच चुकी गुटबाजी से भी उन्हें निपटना होगा।

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सीईटी पर फैसला विभागाध्यक्षों से चर्चा के बाद

प्रो. धाकड़ की रवानगी की एक बड़ी वजह सीईटी में हुई तकनीकी गड़बड़ी भी रही। यूनिवर्सिटी के कुछ अफसर चाह रहे हैं कि सीईटी निरस्त कर मेरिट के आधार पर एडमिशन दे दिए जाएं। शासन को प्रस्ताव भी भेज दिया। जबकि छात्र चाह रहे हैं कि सीईटी का रिजल्ट जारी कर काउंसलिंग कराई जाए। प्रो. जैन का कहना है, काउंसलिंग के लिए अब सीमित समय बचा है। किसी के साथ नाइंसाफी न हो इसलिए विभागाध्यक्षों से चर्चा के बाद सभी के समन्वय से इसका हल निकाला जाएगा।

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दूसरी बड़ी चुनौती नैक की ग्रेड में सुधार की रहेगी। डीएवीवी को पिछली बार ए ग्रेड हासिल हुई थी। इसके बाद नैक ने ए प्लस और ए प्लस प्लस ग्रेड भी निर्धारित की। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने डीएवीवी को कम से कम ए प्लस ग्रेड का लक्ष्य दिया है। इसे पाने में सबसे बड़ी दिक्कत फैकल्टी की कमी है। इसे दूर करने के लिए कांट्रेक्ट पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कराई। इसमें नियमों की अनदेखी के आरोप लगे। मौजूदा फैकल्टी के भरोसे ही ए-प्लस ग्रेड के लिए बाकी कमियां दूर करना होगी।

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हजारों डिग्री पर होना है साइन, इसमें ही लगेगा समय
एक महीने से ज्यादा समय तक डीएवीवी से एक भी डिग्री जारी नहीं हो पाई है। यह एक ऐसा दस्तावेज है, जिस पर कुलपति की ही साइन जरूरी है। हजारों डिग्री पेंडिंग होने से इन पर साइन करने में ही काफी समय लग जाएगा। प्रो. धाकड़ से पहले कुलपति रहे प्रो. डीपी सिंह ने इससे बचने के लिए डिग्री पर साइन की सील लगाने की व्यवस्था शुरू की थी। एक-एक डिग्री पर साइन करने की जगह नई कुलपति भी चाहें तो प्रो. सिंह की तरह सील बनवा सकती हैं।

सरकार से तालमेल बैठाना, अधिकारियों को भरोसे में लेना

कुलपति को लेकर सरकार और कुलाधिपति में खींचतान जगजाहिर है। उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी की पसंद की पेनल को कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल खारिज कर चुकी थी। आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। यूनिवर्सिटी के ज्यादातर काम सरकार की निगरानी में होते हैं। कुछ अधिकारी भी चाहते थे कि सरकार की पसंद का कुलपति आए। कुलपति को इन्हें भरोसे में लेना होगा। हालांकि, प्रो. जैन ने कहा कि वे शिक्षाविद् होने के नाते काम करेंगी। राजनीति से उनका लेना-देना नहीं है।

डीएवीवी की पहली महिला कुलपति बनना गर्व की बात: प्रो. रेणु जैन

कुलपति प्रो. जैन शुक्रवार दोपहर ढाई बजे इंदौर आकर डीएवीवी पहुंचेंगी। 55 साल के इतिहास में पहली महिला कुलपति चुनी जाने पर उन्होंने कहा कि इस जिम्मेदीर से मैं खुश और गौरवांवित हूं। इसे चुनौती के तौर पर भी देख रही हूं।

प्रो. जैन बोलीं, संस्थान और छात्र दोनों अपना दायित्व निभाएं तो सही विकास संभव है। ए ग्रेड डीएवीवी में नैक का निरीक्षण होना है। ऐसे में मेरी प्राथमिकता रहेगी कि हम कम से कम ए प्लस ग्रेड ला सकें। शैक्षणिक गुणवत्ता को सुधारने पर ध्यान रहेगा। प्रो. जैन ने जीवाजी यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को अपना आदर्श बताते हुए कहा कि उन्होंने साबित किया कि महिला अच्छी प्रशासक भी हो सकती है। मेरा मूल स्वभाव अकादमिक है। प्रोफेसर होने के नाते कोशिश करूंगी, समय निकालकर यूटीडी में पढ़ाऊं।

विवादों में रहा है प्रमोशन

कुलपति प्रो. रेणु जैन का प्रमोशन विवादों में रहा है। इसे लेकर लोकायुक्त तक शिकायत हो चुकी है। आपत्ति थी कि जीवाजी यूनिवर्सिटी में मेरिट के आधार पर एक ही बार प्रमोशन दिया जा सकता है। इसके अंतर्गत वह लैक्चरार से रीडर बन सकती थीं, लेकिन इसी सिस्टम से उन्हें प्रोफेसर प्रमोट कर दिया गया।

यूटीडी में उभरी गुटबाजी

प्रो. धाकड़ की रवानगी के बाद यूनिवर्सिटी में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। नालंदा परिसर में अफसरों के बीच पटरी नहीं बैठ रही। वहीं, यूटीडी में फैकल्टी के दो धड़ों की गुटबाजी उभरकर सामने आ गई है। सीनियर प्रोफेसरों ने फैकल्टी की संख्या को लेकर देवता (देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) पर ही निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया।

फिर खाली हाथ रह गए दिग्गज

प्रो. जैन के नाम की घोषणा होते ही कुलपति बनने के दावेदारों के अरमानों पर पानी फिर गया। इनमें शहर के प्रो. पीएन मिश्रा, प्रो. एसएल गर्ग, प्रो. आशुतोष मिश्रा और प्रो. सुरेश सिलावट शामिल हैं। धारा-52 लगने के बाद से ही सभी अपने स्तर पर सरकार और राजभवन के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश में लगे थे। हालांकि न तो सरकार और न ही राजभवन ने इन पर ध्यान दिया।

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