21 साल बाद शराब ठेकेदार को याद आया किराया

एमटीएच कंपाउंड में ली थी लीज पर जमीन, ठेकेदार मांग रहा जमा किया गया किराया, नगर निगम ने कार्रवाई कर हटाई थी दुकान

By: Mohit Panchal

Published: 07 Jun 2018, 11:17 AM IST

इंदौर। २१ साल बाद शराब ठेकेदार को सरकार से पैसे लेना याद आया। उसने दुकान के लिए नजूल से लीज पर जमीन ली थी, लेकिन शिकायत के बाद नगर निगम ने कार्रवाई कर दुकान हटा दी थी। अब ठेकेदार जमा किया गया किराया मांग रहा है। नजूल विभाग ने निगम से पूछा है कि उस दौरान ऐसी कोई कार्रवाई की थी क्या?
गोधा कॉलोनी में रहने वाले सुरेंद्र कुमार जायसवाल ने जिला प्रशासन के नजूल विभाग और नगर निगम को पुराने पन्ने पलटने पर मजबूर कर दिया। जायसवाल नजूल विभाग से २१ साल पुराना जमा कराया गया लीज रेंट वापस मांग रहे हैं। असल में जायसवाल ने 1997 में काछी मोहल्ला क्षेत्र की शराब दुकान का ठेका लिया था। 18 नवंबर 1997 को एमटीएच कंपाउंड सर्वे नंबर २१२/१६ की ४०० वर्ग फीट जमीन में नजूल विभाग में 84600 रुपए जमाकर कर दुकान बनाई थी। यह दुकान शिव मंदिर के पास होने से लोगों ने विरोध कर दिया था।
चार दिन बाद तत्कालीन कलेक्टर के आदेश पर नगर निगम ने दुकान तोड़ दी थी। २० साल बाद जायसवाल ने कलेक्टर को जमा कराई गई राशि वापस मांगी, उस पर आबकारी विभाग और नगर निगम को पत्र भी जारी हुए। आबकारी का कहना था कि उन्होंने केवल लाइसेंस जारी किया था। जमीन की लीज से उनका लेना-देना नहीं है।

लीज राशि आबकारी विभाग द्वारा नहीं ली गई है, नजूल विभाग ने ली थी। इसके बाद गेंद नजूल विभाग के पास पहुंच गई है। नजूल अधिकारी बिहारी सिंह ने नगर निगम आयुक्त से पूछा है कि वे बताएं- क्या उस दौरान कोई अतिक्रमण हटाया गया था? निगम की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि जायसवाल को जमा किराया वापस मिलेगा या नहीं।

कई लेनदार हंै नजूल के
गौरतलब है कि सरकारी जमीनों का लेखा-जोखा जिला प्रशासन के नजूल विभाग के पास होता है। नजूल ने अपनी जमीन कई सरकारी व निजी संस्थाओं के अलावा व्यक्तियों को भी लीज पर दी। उन पर आवासीय व व्यावसायिक भवन तने हुए हंै। कई संस्था जमीन लेने की कतार में हैं, जिन्होंने जमीन की लीज के पैसे भी भर दिए। ऐसे लेनदारों की फेहरिस्त लंबी है। वे जमीन के फेर में चक्कर लगाकर थक गए। कुछ ने तो अब जमा राशि मांगना भी शुरू कर दी है। इसको लेकर पिछले दिनों नजूल विभाग ने ही राजस्व विभाग को पत्र लिखकर जमा राशि संस्थाओं को लौटाने का आग्रह किया था।

Mohit Panchal Reporting
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