फर्जी रजिस्ट्री से लिया लोन, बैंक मैनेजर पर केस

रोपित ने अन्य के साथ मिलकर 15 साल पहले यह फर्जीवाड़ा किया था।

इंदौर. सांवरिया नगर के दो प्लॉट की फर्जी रजिस्ट्रार तैयार कर उनके जरिए साढ़े 5 लाख रुपए का लोन लेने के आरोप में ईओडब्ल्यू ने रुकमणि नगर निवासी प्रदीप पिता लीलाधर गुप्ता को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है। आरोपित ने अन्य के साथ मिलकर 15 साल पहले यह फर्जीवाड़ा किया था।

आरोपित को कोर्ट में पेश कर तीन दिन की रिमांड पर लिया

ईओडब्ल्यू के निरीक्षक केएस गेहलोत के मुताबिक, आरोपित को कोर्ट में पेश कर तीन दिन की रिमांड पर लिया है। ईओडब्ल्यू ने 2015 में विश्वास गृह निर्माण सहकारी संस्था के सांवरिया नगर के प्लॉट नंबर 186 व 213 की फर्जी रजिस्ट्री तैयार कर लोन लेने के मामले में धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया है। इस केस में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष रामसुमिरन कश्यप के साथ ही अन्य लोगों को भी आरोपित बनाया है। प्रदीप पहले प्रॉपर्टी ब्रोकर था, बाद में सांवरिया नगर में मकान बनाकर बेचने का काम किया और अभी तेल का कारोबार कर रहा है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपित प्रदीप गुप्ता व साथियों ने दोनों प्लाटों की फर्जी रजिस्ट्री करवा ली। बाद में संस्था ने यह प्लॉट अन्य को बेचे और वे वहां मकान बनाकर निवास कर रहे हैं।

सांठगांठ की बात भी सामने आने पर उन्हें भी केस में आरोपित बनाया

बाद में पता चला 2002-03 में प्रदीप ने जो फर्जी रजिस्ट्री तैयार की थी, उसका फर्जी तरीके से विक्रय करने के बाद उस पर करीब साढ़े पांच लाख का लोन भारतीय स्टेट बैंक की शाखा स्कीम 54 से ले लिया। बैंक के तत्कालीन प्रबंधक विजय दांभक के साथ सांठगांठ की बात भी सामने आने पर उन्हें भी केस में आरोपित बनाया है। रिमांड के दौरान प्रदीप से अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की है। ईओडब्ल्यू की और से कोर्ट में पक्ष लोक अभियोजक अश्लेष शर्मा ने रखा। रिमांड के दौरान प्रदीप से अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की है।

 

अर्जुन रिछारिया Incharge
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