लोक अदालत : 18 हजार केसों का निराकरण, 121 करोड़ रुपए के अवार्ड पारित

प्रकरणों के निराकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट काफी गंभीर है।

By: हुसैन अली

Published: 30 Dec 2018, 12:26 PM IST

विकास मिश्रा @ इंदौर. देश के विभिन्न न्यायालयों में वर्षों से पेंडिंग प्रकरणों के निराकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट काफी गंभीर है। पिछले करीब तीन साल से इन्हीं पेंडिंग केसों के निराकरण के लिए लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। पहले यह सिर्फ वर्ष में एक बार होती थी, लेकिन दो साल से हर दो महीने इसका आयोजन हो रहा है। इसके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। बीते वर्ष में जिला कोर्ट में आयोजित पांच नेशनल लोक अदालतों की बात करें तो इस दौरान 18169 केसों का निराकरण हुआ है और 121 करोड़ 65 लाख 24 हजार 997 रुपए की अवार्ड राशि प्राप्त हुई। जिन केसों का आपसी सहमति से निराकरण हुआ है। उनमें 7311 केस लंबे समय से कोर्ट में विचाराधीन थे। इनमें चेक बाउंस, समझौते योग्य आपराधिक प्रकरण, क्लैम, सिविल, बिजली कंपनी, श्रम, पारिवारिक विवाद सहित अन्य केस शामिल हैं। लोक अदालत के लिए बाकायदा विधिक सेवा प्राधिकरण का गठन किया गया है जो लगातार लोक अदालत के आयोजन एवं प्री-लीटिगेशन के केसों के निराकरण का प्रयास करता है। इंदौर जिला कोर्ट में इस साल 18169 केसों का निराकरण किया गया है जो प्रदेश की अन्य जिलों की तुलना में सर्वश्रेष्ट है। जिला विधिक सहायता अधिकारी सुभाष चौधरी के सितंबर में आयोजित लोक अदालत में इस साल के 9847 केसों का निरकारण हुआ था। वहीं फरवरी में हुए लोक अदालत में 1735 केसों का निराकरण हुआ था।

कोर्ट फीस होती है वापस
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते लोक अदालत के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार भी विशेष प्रयास कर रही है। लगातार इसका प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है। लोक अदालत में प्रकरणों का निराकरण करने पर पक्षकारों
को उनकी कोर्ट फीस वापस की जाती है। इसके साथ ही यहां पर निर्णित केसों को आगे चुनौती भी नहीं दी जाती है।

160 पद पर 69 जज ही कर रहे काम
जिला कोर्ट में एक साल में 5-5 लोक अदालत आयोजित होने के बावजूद यहां फिलहाल एक लाख 60 हजार केस पेंडिंग है। पेंडेंसी खत्म नहीं होने के पीछे मुख्य कारण जजों की कमी है। जिला कोर्ट के लिए 160 जजों की पोस्ट है, लेकिन यहां 69 जजों की ही नियुक्ति है। जिले में 31 सेशन जज सहित 38 प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी काम कर रहे हैं। जिला कोर्ट में अभी जजों की 91 पोस्ट खाली पड़ी हैं। हालंकि जजों की नियुक्ति नहीं होनेके पीछे कोर्ट रूम की कमी भी मुख्य कारण है।

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