यूनिवर्सिटी में अगले सत्र से लोकपाल

जस्टिस और रिटायर्ड प्रोफेसर्स ने की दावेदारी, उच्च शिक्षा विभाग को २६ मई तक किए जा सकते हैं आवेदन

By: amit mandloi

Published: 24 May 2018, 06:12 AM IST

इंदौर. उच्च शिक्षण संस्थानों में लोकपाल नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया अंतिम दौर में है। उम्मीद जताई जा रही है, अगले सत्र से ही सभी संस्थानों में लोकपाल नियुक्त हो जाएंगे। प्रदेश की यूनिवर्सिटी के लिए शहर के ही जस्टिस और रिटायर्ड प्रोफेसर्स ने दावेदारी पेश की है।
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन ने २०१२ में शैक्षणिक संस्थानों की समस्याएं सुलझाने के लिए लोकपाल के गठन के निर्देश दिए थे, लेकिन कई साल तक इसके लिए कोई कवायद ही नहीं की गई। पिछले सत्र में उच्च शिक्षा विभाग ने यूनिवर्सिटी को पत्र भेजे थे। इसके बाद विभाग ही आवेदन बुलवा रहा है। आवेदन की अंतिम तिथि २६ मई है। माना जा रहा है, प्रदेश की ४१ यूनिवर्सिटी में जुलाई तक लोकपाल नियुक्त होंगे। विभाग सिर्फ रिटायर्ड प्रोफेसर और कम से कम जिला स्तर के पूर्व जस्टिस के ही आवेदन स्वीकार कर रहा है। शहर के करीब एक दर्जन रिटायर्ड प्रोफेसर्स ने देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के साथ बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी, विक्रम यूनिवर्सिटी, जीवाजी यूनिवर्सिटी सहित अन्य यूनिवर्सिटी के लिए दावेदारी की है।


बीएड कॉलेजों का निरीक्षण नहीं करा पाई यूनिवर्सिटी

- १० मई तक प्रक्रिया निपटाने के सुप्रीम कोर्ट के है आदेश
अवहेलना से बचने जारी की संबद्धता

इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की लापरवाही बीएड कॉलेजों के लिए वरदान साबित हुई है। यूनिवर्सिटी ने बुधवार को हुई स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में ६० कॉलेजों को संबद्धता जारी कर दी। इसके लिए न तो कमेटी बनाई गई और न ही कॉलेजों का निरीक्षण हुआ। जिम्मेदारों का कहना है कि अभी संबद्धता का नवीनीकरण किया है। सत्र के बीच कॉलेजों का निरीक्षण कराया जाएगा।

पिछले सत्र में यूनिवर्सिटी से ६७ बीएड कॉलेज संबद्ध थे। इनमें से रॉयल कॉलेज कोर्स सरेंडर कर चुका है, जबकि इम्पीरियल कॉलेज के पास पिछले सत्र की ही मान्यता नहीं है। बाकी कॉलेजों में अरिहंत कॉलेज, एनी बेसेंट कॉलेज, वैदेही कॉलेज, लिबरल कॉलेज सहित दो अन्य कॉलेज को एनसीटीइ (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) से अनुमति नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि १० मई तक यूनिवर्सिटी बीएड कॉलेजों की संबद्धता की प्रक्रिया पूरी कर लें। आदेश की जानकारी होने के बावजूद यूनिवर्सिटी ने संबद्धता से पूर्व निरीक्षण कराने के लिए ही कोई कदम नहीं उठाया था। कोर्ट की अवहेलना से बचने के लिए संबद्धता के प्रकरण स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में रखे। कमेटी ने पिछले वर्ष की रिपोर्ट के आधार पर ही कॉलेजों को संबद्धता जारी कर दी। डीसीडीसी डॉ. सुमंत कटियाल ने बताया, नए कॉलेज या कोर्स के लिए निरीक्षण कराना जरूरी होता है। अभी संबद्धता के नवीनीकरण की प्रक्रिया थी। कई कॉलेजों के लिए कमेटी बन चुकी है। जल्द निरीक्षण भी करा लिया जाएगा।

 

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