नवरात्रि में चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग में कल डोली पर सवार हो आएगी मां

इस बार मां जगदंबे डोली पर सवार हो पधार रही है। देवी भागवत व ज्योतिर्ग्रन्थों की माने तो गुरुवार व शुक्रवार को नवरात्रि का आरंभ हो तो मां डोली पर सवार हो आती है। पुराणादि धर्मशास्त्रों के अनुसार जब मां डोली पर सवार हो आती है तो यह अच्छा शगुन माना जाता है।

By: लवीं ओव्हल

Published: 06 Oct 2021, 03:29 PM IST

इंदौर. शारदीय नवरात्र का आरंभ गुरुवार से होगा। इस बार मां जगदंबे डोली पर सवार हो पधार रही है। देवी भागवत व ज्योतिर्ग्रन्थों की माने तो गुरुवार व शुक्रवार को नवरात्रि का आरंभ हो तो मां डोली पर सवार हो आती है। पुराणादि धर्मशास्त्रों के अनुसार जब मां डोली पर सवार हो आती है तो यह अच्छा शगुन माना जाता है। इस वर्ष नवरात्र आठ दिनों की होगी। तृतीया व चतुर्थी दोनों एक ही दिन 9 अक्टूबर, शनिवार को प्रात: 7.48 बजे तक तृतीया है। बाद में चतुर्थी प्रारंभ होगी 15 को अपराह्न में दशमी है। अत: दशहरा शमी पूजन शुक्रवार को मनाया जाएगा। आचार्य पं. रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार, इस वर्ष नवरात्रि चित्रा नक्षत्र व वैघृति योग में शुरू हो रही है। इसके चलते घटस्थापना ब्रह्ममुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त में ही शुभ रहेगी। अत: शुभ मुहूर्त में ही अपनी कुल परम्परानुसार घटस्थापना करें।

तिथियों का घटना अच्छा संकेत नहीं

आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि शारदीय नवरात्रि इस वर्ष ८ दिनों की है। नवरात्र की तिथियों का घटना व श्राद्ध की तिथियों का बढऩा अच्छा संकेत नहीं है। यह योग देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से शुभ नहीं है। देश की अर्थ व्यवस्था कमजोर बनी रहेगी। छत्र भंग योग, राजनीतिक उठापटक, प्राकृतिक आपदा, नई असाध्य बीमारियों व महामारी का भय आदि रहेगा। शारदीय नवरात्र में मां की साधना, उपासना व विविध कामना पूर्ति के लिए नव कन्याओं को नवदुर्गा के स्वरूप में तिथि, वार व नक्षत्र के अनुसार नैवेद्य अर्पण करने से वांछित फल की प्राप्ति होती है।

-- नवरात्र में हर दिन ऐसे करें मां को नौ रूपों प्रसन्न --

7 अक्टूबर, गुरुवार, प्रतिपदा तिथि व चित्रा नक्षत्र - विवाह योग्य कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए मां शैलपुत्री के रूप में दो वर्ष की कन्या का गाय के घी से निर्मित हलवा व मालपुए का भोग लगाएं।

8 अक्टूबर, शुक्रवार, द्वितीया तिथि स्वाति नक्षत्र - विजय प्राप्ति व सर्वकार्य सिद्धि के लिए तीन वर्ष की कन्या का मां ब्रह्मचारिणी के रूप में पूजा कर मिश्री व शक्कर से बने पदार्थ का भोग लगाएं।

9 अक्टूबर, शनिवार तृतीया व चतुर्थी तिथि, विशाखा/अनुराधा नक्षत्र - दु:खों के नाश व सांसारिक कष्टों से मुक्ति के लिए चार व पांच वर्ष की कन्या का मां चंद्रघंटा/कुष्मांडा के रूप में पूजन कर दूध से निर्मित पदार्थों व मालपुए का भोग अर्पित करें।

10 अक्टूबर, रविवार, पंचमी तिथि व अनुराधा नक्षत्र - विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता व मनोकामना पूर्ति के लिए छ: वर्ष की कन्या का मां स्कंदमाता के स्वरूप में पूजन कर माखन का भोग लगाएं।

11 अक्टूबर, सोमवार, षष्ठी तिथि व ज्येष्ठा नक्षत्र - चारों पुरुषार्थ व रूप लावण्य की प्राप्ति के लिए सात वर्ष की कन्या का मां कात्यायनी के स्वरूप में पूजन कर मिश्री व शहद का भोग समर्पित करें

।12 अक्टूबर मंगलवार, सप्तमी तिथि व मूल नक्षत्र - नवग्रह जनित बाधाएं व शत्रुओं के नाश के लिए आठ वर्ष की कन्या का मां कालरात्रि के स्वरूप में पूजा-अर्चना कर दाख, गुड़ व शक्कर का नैवेद्य अर्पित करें।

13 अक्टूबर, बुधवार, अष्टमी तिथि व पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र - विभिन्न संतापों से मुक्ति व मनोकामना पूर्ति के लिए नौ वर्ष की कन्या का महागौरी स्वरूप में पूजन कर गाय के घी से निर्मित पदार्थ व श्रीफल का भोग लगाएं।

14 अक्टूबर, गुरुवार,नवमी तिथि व उत्तराषाढ़ा नक्षत्र - परिवार में सुख समृद्धि, भय नाश व मनोकामना पूर्ति के लिए दस वर्ष की कन्या का मां सिद्धि दात्री व नवदुर्गा स्वरूप में पूजन कर खीर, हलवा व सूखे मेवे का भोग लगाएं।

अष्टमी व नवमी को कुलदेवी पूजन का विधान

इस विधि विधान से नवरात्रि में दो से 10 वर्ष की कन्याओं का मां नवदुर्गा स्वरूप में पूजन अर्चन कर वांछित नैवेद्य समर्पण से देवीभक्तों की सभी वांछित मनोकामना शीघ्र प्राप्त होती है। अष्टमी व नवमी को कुलदेवी पूजन का भी विधान है। नवरात्र में अभ्यंग स्नान, घट स्थापना, ज्वारे का रोपण, प्रतिमा पूजा, चंडी पाठ, उपवास व हवन पूजन का ही विशेष महत्व है। सभी क्रियाएं शुद्धता, पवित्रता के श्रद्धा भक्ति पूर्वक सविधि करने से ही वांछित फल की प्राप्ति संभव है।
नवरात्रि पर्व पर घटस्थापना एवं कलश स्थापन करने के लिए शुभ मुहूर्त -

(पं. गुलशन अग्रवाल के अनुसार) सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त -

सुबह ०3.45 बजे से 03.59 बजे तक

(ब्रह्मवेला+स्थिर सिंह लग्न नवांश+लाभ चौघडिय़ा)

सुबह 06.53 बजे से ०7.08 बजे तक

(ब्रह्मवेला+द्विस्व. कन्या लग्न नवांश+शुभ चौघडिय़ा)

सुबह 10.44 बजे से 11.38 बजे तक

(स्थिर वृश्चिक लग्न+चर चौघडिय़ा)

चौघडिय़ा से -

सुबह 06.21 बजे से 07.49 बजे तक (शुभ)

सुबह 10.44 बजे से दोप. 12.12 बजे तक (चर)

सुबह 12.13 बजे से 01.39 मि. बजे (लाभ)

सुबह 04.35 बजे से सांय: 06.02 बजे तक (शुभ)

लवीं ओव्हल
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